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प्रदेश में पौने तीन लाख के करीब बंदर, शहरों के साथ गांव बुरी तरह से प्रभावित

Shimla News - राजधानी में बंदरों के आंतक को कम करने के लिए वन विभाग ने मथुरा से मंकी कैचर बुलाए हैं। ये टीम शिमला भी पहुंच गई। ...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:10 AM IST
प्रदेश में पौने तीन लाख के करीब बंदर, शहरों के साथ गांव बुरी तरह से प्रभावित
राजधानी में बंदरों के आंतक को कम करने के लिए वन विभाग ने मथुरा से मंकी कैचर बुलाए हैं। ये टीम शिमला भी पहुंच गई।

शनिवार को बंदरों को पकड़ने के लिए ये टीम निकली, लेकिन इस टीम का बंदरों को पकड़ने का अभियान पहले ही दिन धार्मिक आस्था की भेंट चढ़ गया। ये टीम बंदरों को पकड़ने शनिवार को जाखू मंदर पहुंची। मंदिर में पहले ही भारी संख्या में लोग दर्शन करने पहुंचे थे। वन विभाग के अधिकारियों की टीम भी मंकी कैचर के काम को देखने के लिए स्पॉट पर मौजूद थी, लेकिन जैसे ही इस टीम ने बंदरों को पकड़ने की तैयारी शुरू की तो वहां आए लोगों ने टीम से आग्रह किया कि आज हनुमान जयंती के दिन बंदरों को न पकड़ा जाए। लोगों के आग्रह के बाद विभाग ने शनिवार को इस काम को बंद करवा दिया।अब विभाग रविवार को दोबारा जाखू में बंदरों को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाएगा।

बंदर पकड़ने मथुरा से आई टीम, जाखू पहुंचते ही पकड़ने की तैयारी की तो लोग बोले-आज रहने दो, हनुमान जयंती है

वर्मिन घोषित हैं लेकिन नहीं मारा था एक भी बंदर | राजधानी शिमला सहित प्रदेश की 38 तहसीलों में बंदरों को वर्मिन घोषित किया गया है। दिसंबर 2017 में बंदरों को वर्मिन घोषित किया गया था। बावजूद इसके प्रदेश में एक भी बंदर नहीं मारा गया था। इसके पीछे धार्मिक आस्था व वन विभाग की ओर से लगाई गई सख्त शर्तें शामिल हैं। ऐसे में वन विभाग ने अब मंकी कैचर को बुलाकर इनकी नसंबदी करने का निर्णय लिया है।

क्या वाकई हैं शिमला

में सिर्फ

2166 बंदर

वन विभाग के वाइल्ड लाइफ विंग की ओर से वर्ष 2015 में बंदरों की गणना का कार्य किया गया था। इस गणना में प्रदेश में 2,07,614 बंदर पाए गए थे। शिमला अर्बन में 2166 बंदर है। जबकि शिमला सर्कल में 5580 बंदर हैं। लेकिन शिमला शहर में बंदरों को देखकर क्या ये अांकड़ा यही होगा।

बंदरों को पकड़ने के बाद ये होगा

मंकी कैचर इन बंदरों को पकड़न कर बंदर नसबंदी केंद्र (मंकी स्टरलाइजेशन सेंटर) टूटीकंडी में भेजेगी। पकड़ने गए बंदरों की नसबंदी की जाएगी। तीन महीने तक इन्हें टूटीकंडी में ही रखा जाएगा। उसके बाद उन्हें शहर के बाहर के जंगलों में छोड़ने की योजना है। वन विभाग की ओर से अक्टूबर से दिसंबर महीने तक खुद 481 बंदरों को पकड़ा गया है। ठंड के कारण इस कार्य को बंद कर दिया गया था। अब विभाग ने प्रोफेशनल मंकी कैचर को बंदरों को पकड़ने के लिए बुलाया है। टूटीकंडी में इन्हें अलग-अलग पिंजरों में रखा जाएगा।

सुबाथू में लोगों ने उठाए हथियार | सोलन जिला के सुबाथू में लोगों ने बंदरों के आतंक से परेशान होकर उन्हें मारने का बेड़ा उठा लिया है। किसानों ने इन्हें खुद ही मारने का निर्णय लिया है। वन विभाग के पास इसकी सूचना पहुंची है। विभाग का कहना है कि बंदरों को वर्मिन घोषित किया जा चूका है। ऐसे में लोग इन्हें मार सकते हैं।

आज से शुरू होगा काम, लगाए पिंजरे

डीएफओ शिमला शहरी इंद्र कुमार ने कहा कि बंदरों को पकड़ने के लिए जाखू में पिंजरे लगा दिए हैं। उन्होंने कहा कि शनिवार से ये कार्य शुरू किया जा रहा था। हनुमान जयंती होने के चलते वहां पर लोगों ने उन से आग्रह किया कि इस कार्य को फिलहाल आज के दिन न किया जाए। लोगों के आग्रह के बाद एक दिन तक इस कार्य को टाल दिया गया है। पूरे शहर में बंदरों को पकड़ा जाएगा।

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