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खड़े पेड़ों की गिनती, नंबर लगाने के लिए निगम को चुकाने होंगे साढ़े 10 लाख रुपए

प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला को आदेश दिए कि वह वन विभाग को 30 अप्रैल तक निगम परिधि के तहत निजी व सरकारी भूमि पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:10 AM IST

प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला को आदेश दिए कि वह वन विभाग को 30 अप्रैल तक निगम परिधि के तहत निजी व सरकारी भूमि पर खड़े पेड़ों की गिनती व उनमें नंबर लगाने के बिलों का भुगतान करे। वन विभाग ने करीब साढ़े 10 लाख रुपये का बिल निगम को सौंपा है। 23, 284 पेड़ों में नंबर लगाने के लिए यह बिल सौंपा है।

कोर्ट ने पीसीसीएफ डॉक्टर जीएस गोराया के शपथ पत्र के माध्यम से दी गई जानकारी से पाया कि प्रत्येक पेड़ में नंबर लगाने का खर्च लगभग 50 रुपए बैठता है। कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा कि इस खर्च को संबंधित भूमि मालिक द्वारा वहन किया जाना चाहिए। कोर्ट ने नगर निगम को संबंधित भूमि मालिकों से इस खर्च को वसूलने की छूट देते हुए कहा कि निगम इस बाबत 2 माह के भीतर निर्णय लें। प्रदेश सरकार में मुख्य साइंटिफिक अधिकारी कुणाल सत्यार्थी ने शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट को बताया कि प्रत्येक पेड़ में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग्स लगाने का प्रयोग ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ अतः अन्य एजेंसी को इस बारे विचार-विमर्श के लिए बुलाया गया है। जिसके पास इसी तरह की कोई अलग तकनीक है। वन विभाग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नगर निगम परिधि में कुल 2,81,780 पेड़ों की गिनती कर उनमें नंबर लगाए जा चुके हैं। करीब 50 हजार पेड़ों के जीपीएस कोऑर्डिनेट रिकॉर्ड कर लिए गए हैं।

पेड़ों की प्रजातियों की गिनती जरूरी

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने वन विभाग को निर्देश जारी करते हुए कहा था कि नगर निगम शिमला के क्षेत्राधिकार में आने वाले सभी पेड़ों की निगरानी करने हेतु उनकी गिनती के साथ साथ प्रत्येक पेड़ व पौधे पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग्स लगाए जाए। यह पेड़ चाहे सरकारी भूमि पर हों या निजी भूमि पर। हर प्रकार के पेड़ों की प्रजातियों के लिए यह गिनती जरूरी की गई है। निजी भूमि पर उगे पेड़ों पर टैग्स लगाने की कीमत भूमि मालिक से लेने को कहा गया है क्योंकि पर्यावरण को बचाने का संवैधानिक कर्तव्य सबका बनता है। इन टैग्स की मदद से पेड़ का विकास व उसको काटे जाने की निगरानी आसानी से की जा सकेगी। कोर्ट के आदेशानुसार शिमला नगर निगम परिधि में जरूरत पड़ने पर केवल सरकारी एजेंसी ही पेड़ काटने के लिए अधिकृत की गई है। शिमला नगर निगम के भीतर निजी भूमि पर खड़े पेड़ों को यदि काटना हो तो उसे केवल सरकारी एजेंसी ही काट सकेगी।

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