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एचपीयू ने नोएडा में बंद हो चुके सेंटर पर इस साल भी खर्चे 40 लाख रुपए

हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी की लापरवाही का हाल ये हैं कि एचपीयू इक्डोल का नोयडा में बंद हो चुके सेंटर पर अभी भी पैसे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:10 AM IST

हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी की लापरवाही का हाल ये हैं कि एचपीयू इक्डोल का नोयडा में बंद हो चुके सेंटर पर अभी भी पैसे खर्च कर रहा है। इस साल भी यूनिवर्सिटी के 40 लाख रुपए उस सेंटर पर खर्च कर रहा है। यहां पर न तो कक्षाएं लग रही है और न ही कोई और गतिविधियां हो रही हैं, लेकिन बिजली, पानी सिक्योरिटी और केयरटेकर के साथ दूसरे खर्च मिलाकर इस सेंटर पर खर्च करना पड़ रहा है।

इक्डोल के फंड से करोड़ों रुपए खर्च कर सेंटर का भवन 2006 में बनाया गया, लेकिन पिछले वर्ष से इसे बंद कर दिया है। अब यहां पर कक्षाएं और काॅन्टेक्ट प्रोग्राम भी नहीं लग रहे हैं। एचपीयू प्रशासन इस सेंटर को न बेच पा रहा है और न ही लीज पर लेने के लिए काेई आगे आया है। अब इस इस सेंटर से यूनिवर्सिटी को 250 करोड़ का नुकसान हो चुका है।

यूपी सरकार ने अभी तक एचपीयू को इसे बेचने और लीज पर देने की परमिशन नहीं दी है। अब विवि प्रशासन ने रजिस्ट्रार केके शर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है। यह कमेटी नाेएडा सेंटर का दौरा करके यूपी सरकार के सामने अपना पक्ष रखेगी। फिर आने वाले दिनों में इसकी स्टेटस रिपोर्ट ईसी में भी रखी जाएगी। इक्डोल के निदेशक प्रो. पीके वैद का कहना है कि सेंटर की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। यह अपनी रिपोर्ट आगामी ईसी की बैठक में रखेगी।

यह हाल है नोएडा में चल रहे सेंटर का

नोयडा में चल रहे सेंटर में कक्षाएं नहीं लग रही

न ही कोई और गतिविधियां हो रही हैं

यहां हो रहा खर्च : बिजली, पानी सिक्योरिटी और केयरटेकर के साथ दूसरे खर्च मिलाकर इस सेंटर पर खर्च करना पड़ रहा है।

इक्डोल के फंड से करोड़ों खर्च कर सेंटर का भवन 2006 में बनाया गया।

तीन वर्षों में छात्रों की संख्या रह गई दो हजार

इक्डोल के नोएडा सेंटर में पिछले तीन वर्ष में छात्रों की संख्या घटकर 10 हजार से घटकर दो हजार रह गई थी। यहां पर लगभग एक लाख से ज्यादा हर महीने बिजली और पानी का बिल रहा है। कमाई हजारों में ही हो रही है। जिस कारण एचपीयू को नुकसान उठाना पड़ रहा था। अब भी खर्चा यहां पर विवि ही कर रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि यदि यहां पर छात्रों की संख्या कम हो रही है तो इसके लिए एचपीयू की ओर से कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। इस सेंटर को पहले ही बंद क्यों नहीं किया गया।

पहले भी बनी थी कमेटी, हुआ कुछ नहीं |बीते वर्ष 2017 में भी विवि प्रशासन की अोर से इस सेंटर के नफा नुकसान की जांच के लिए एक कमेटी बनी थी। पूर्व ईसी सदस्य हरीश जनारथा इसके अध्यक्ष बनाए गए थे। इस कमेटी में चंद्रशेखर और तत्कालीन सचिव एजुकेशन राकेश शर्मा भी थे। इस कमेटी ने जांच भी की थी, लेकिन नतीजा शून्य रहा। क्याेंकि इस सेंटर को अभी तक पूरी तरह से बंद ही नहीं किया जा सका है।

एचपीयू प्रशासन अब यूपी सरकार के सामने रखेगी अपना पक्ष

अब तक इस सेंटर से एचपीयू

को हुआ 250 करोड़ का नुकसान

इसलिए फेल नोएडा सेंटर

निजी शिक्षण संस्थान और दूसरे राज्यों के सेंटर, जो हिमाचल में खुले हैं। वे आसानी से प्रोफेशनल कोर्सिस करवाते हैं। छात्र फीस देकर इन कोर्सिस को कर लेते हैं।

नाेएडा सेंटर में कक्षाएं लगाना व प्रेक्टिकल की अनिवार्यता नाम मात्र की रहती है।

समय पर स्टडी मेटेरियल उपलब्ध न करवा पाने के कारण भी छात्रों की संख्या कम हुई।

इक्डोल अपने छात्रों को अंग्रेजी मीडियम में ही किताबें देता है, ऐसे में हिंदी मीडियम के छात्रों को दिक्कतें हुई।

कोर्स करने के बाद छात्रों की जॉब प्लेसमेंट की गारंटी नहीं थी।

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Web Title: एचपीयू ने नोएडा में बंद हो चुके सेंटर पर इस साल भी खर्चे 40 लाख रुपए
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