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भज्जी, भारद्वाज, चौहान और जनारथा में फंसी शिमला सीट, कोई भी किसी से कम नहीं

भाजपा को भितरघात का डर सता रहा है।

bhaskar news | Last Modified - Nov 05, 2017, 06:05 AM IST

  • भज्जी, भारद्वाज, चौहान और जनारथा में फंसी शिमला सीट, कोई भी किसी से कम नहीं
    शिमला. चुनाव से पहले आसान दिख रही शिमला के सियासी मैदान की लड़ाई अब उलझ गई है। कांग्रेस के बागी के मैदान में आने के बाद अब यह मुकाबला सस्पेंस थ्रिलर की तरफ बढ़ रहा है। कांग्रेस को यहां बागी ने उलझा दिया है तो भाजपा को िभतरघात का डर सता रहा है। चार प्रत्याशियों की 50 हजार वोटरों को रिझाने की कोशिश...
    कांग्रेस के पूर्व विधायक हरभजन सिंह भज्जी को इस बार हरीश जनारथा की जगह टिकट तो मिल गया लेकिन जनारथा ने मैदान में आजाद आकर समीकरण उलझा दिए हैं। मौजूदा हालात में इस तरह बंटी हुई कांग्रेस का फायदा उठाने की स्थिति में भाजपा भी नहीं है। इस सीट से भाजपा का अंदरूनी कलह जिस तेजी से सामने आई तो इसे दबाने की कोशिश भी पार्टी ने उसी तेजी से करने की कोशिश की। हालांकि भाजपा दावा तो कर रही है कि बगावत को शांत करने में कामयाबी भी मिल रही है। भाजपा ने सीएम कैंडिडेट प्रो. प्रेम कुमार धूमल को शहर में प्रचार के दौरान पार्टी के अंदर बगावत को शांत करने की भी कोशिश की है। बगावत का धुआं आने वाले संभावित नाभा एरिया में शुक्रवार रात को प्रचार करने के साथ रूठों को मनाने की भी कोशिशें हुई हैं।
    शिमला शहर की सीट जीतना कांग्रेस और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। इस बार चार प्रत्याशी चुनावी मैदान में है। कांग्रेस से हरभजन सिंह भज्जी, भाजपा के सुरेश भारद्वाज, सीपीआईएम से संजय चौहान और निर्दलीय हरीश जनारथा। इन चारों प्रत्याशियों को शहर में कुल 50,406 वोटरों में से बड़ा वोट बैंक हासिल करना ही होगा। 2012 के विधानसभा चुनावों में भी कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। भाजपा को 11,563 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस को 10,935 मत मिले थे।
    कांग्रेस 628 वोटों से ये चुनाव हारी थी। सीपीआईएम के प्रत्याशी टिकेंद्र पंवर 8025 वोट मिले थे। नोटबंदी और जीएसटी ने सबसे ज्यादा कारोबारियों को प्रभावित किया है। शिमला शहर में कारोबारियों का वोट बैंक अच्छा खासा है। दोनों ही दल कारोबारियों को मनाने में जुटे हुए हैं। इसके नफे नुकसान को भी वोट में तोला जा रहा है। नगर निगम शिमला के कुल 34 वार्ड हैं। इनमें 18 वार्ड शहरी सीट के अधीन आते हैं जबकि 12 कसुम्पटी और 4 शिमला ग्रामीण विस क्षेत्र में। शिमला सीट में आने वाले 18 वार्डों में से 11 पर भाजपा की पांच महीने पहले हुई जीत कारोबारियों के नाराज होने से हो रहे नुकसान की भरपाई कर सकती है।
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