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जिनके फोटो सीएम की फेसबुक पेज से हुए थे वायरल, वे सूरज की मौत के गवाहों में

हैरानी...सीबीआई की चार्जशीट में गवाहों की सूची में दूसरे, तीसरे नंबर पर हैं दोनों संदिग्ध

Dainik Bhaskar

Nov 30, 2017, 07:19 AM IST
gudia murder case in shimla

शिमला. मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के अधिकारिक फेसबुक पेज से गुड़िया गैंगरेप और मर्डर केस के संदिग्धों के रूप में जिनके फोटो वायरल हुए थे, सीबीआई ने सूरज की कस्टोडियल डेथ मामले में उन्हें भी गवाह बना दिया। कस्टोडियल डेथ मामले में सीबीआई की ओर से निचली अदालत में सौंपी गई चार्जशीट में गवाहों की सूची में दोनों संदिग्धों इशान चौहान और प्रशांत के नाम दूसरे और तीसरे नंबर पर है। सूची में कुल 84 गवाह हैं। इन संदिग्धों को कस्टोडियल डेथ केस में गवाह बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। न तो उन्होंने सूरज को लॉकअप में टार्चर करते देखा और न ही वे यह जानते हैं कि सूरज को किसने मारा था। दोनों संदिग्धों को पुलिस ने गुड़िया केस में हिरासत में लिया था। दो दिन बाद उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया था। सूरज की मौत पुलिस लॉकअप में 18 जुलाई की देर रात इंटेरोगेशन के दौरान हुई थी। इस नाते दोनों का इस केस से दूर-दूर का नाता नहीं लग रहा है। बावजूद इसके केस में उनको गवाह बनाना समझ से परे है।

11 जुुलाई की रात को वायरल हुए थे फोटो

गुड़िया गैंगरेप और मर्डर केस में पुलिस ने 12 और 13 जुलाई को छह लोग गिरफ्तार किए थे। अब सभी जमानत पर रिहा हैं। इससे पहले 11 जुलाई की रात को कुछ संदिग्धों के फोटो सीएम के ऑफिशियल फेसबुक पेज पर अपलोड किए गए थे। संदिग्धों के तौर पर इन्हें पेश किया गया था। हालांकि, कुछ समय के भीतर ही पेज से फोटो हटा दिए गए थे, मगर तब तक वे वायरल होकर हजारों लोगों तक पहुंच गए थे। अगले दो दिन में पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद लोग विरोधस्वरूप सड़कों पर उतर गए। 14 को ठियोग में बड़ा प्रदर्शन हुआ और थाने पर पथराव किया गया। लोगों का आरोप था कि पुलिस ने निर्दोष लोग पकड़े हैं और जिनके फोटो सीएम के पेज पर संदिग्धों के तौर पर डाले गए थे, उन्हें छोड़ दिया। अमीर घराने के संदिग्धों को हिरासत से छोड़ देने पर शिमला जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में विरोध की चिंगारी भड़की थी। लोगों ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए और गुनहगारों को पकड़ने के लिए केस सीबीआई को सौंपने की मांग की। लोगों के विरोध के बाद केस सीबीआई को सौंपा गया, पर सीबीआई गुनहगारों तक अभी तक नहीं पहुंच पाई।

फोटो कैसे जारी हुए, मामले की जांच में क्या सामने आया, जिक्र नहीं

सीबीआई ने संदिग्धों को गवाह तो बनाया दिया, मगर उनके फोटो सीएम के अधिकारिक पेज से कैसे संदिग्धों के तौर पर वायरल हो गए, इसके बारे में चार्जशीट में जिक्र नहीं है। कस्टोडियल डेथ की चार्जशीट में आधे से अधिक जिक्र गुड़िया केस को लेकर है, मगर फोटो जारी होने के मामले में क्या जांच हुई, और क्या सामने आया, इसके बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

कस्टोडियल मामले में ये गवाह क्यों

चार्जशीट में सीबीआई ने कहा है कि पुलिस ने संदिग्धों को गलत इंटेंशन से हिरासत में रखा था। इंटेरोगेशन के दौरान उन पर दबाव डाला गया। कस्टोडियल डेथ मामले में उन्हें गवाह क्यों बनाया, इसके बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।

सूरज और अन्यों को टार्चर करने के पीछे की कहानी का पता नहीं
कस्टोडियल डेथ मामले में अदालत को सौंपी 640 पेज की चार्जशीट में सीबीआई ने जांच कर यह तो सामने लाया है कि पुलिस ने सूरज और अन्य को टार्चर किया था और उन्हें जबरन फंसाया, मगर इसके पीछे की कहानी को लेकर सीबीआई स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई है। 6 जुलाई को दांदी जंगल में गुड़िया का शव मिलने के बाद 10 को जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी। सीबीआई के मुताबिक 10 से 18 जुलाई के बीच पुलिस गिरफ्तार किए आरोपियों को टार्चर करती रही और 18 की रात को एक आरोपी की मौत हो गई। ऐसा तो है नहीं कि पुलिस ने हफ्ते में ही गुनहगारों को तलाशने में हार मान ली थी और जबरन निर्दोष लोग फंसाए। पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद लोगों ने पुलिस पर रसूखदारों को बचाने का आरोप लगाया था। लोगों का आरोप था कि पुलिस ने जो लोग पकड़े गए, उन्हें किसी और का गुनाह अपने सिर लेने के लिए बाध्य किया गया, लेकिन सीबीआई जांच में रसूखदारों को लेकर सच्चाई सामने नहीं ला पाई है।

कस्टोडियल डेथ मामले में सीबीआई आज सौंपेगी फाइनल स्टेटस रिपोर्ट

गुड़िया गैंगरेप के आरोपी सूरज की कस्टोडियल डेथ मामले में सीबीआई वीरवार को हाईकोर्ट में फाइनल स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी। सीबीआई ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। दिल्ली में इसे अंतिम रूप दिया गया। 25 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई को अंतिम रिपोर्ट फाइल करने के आदेश दिए थे। सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि मामले में 29 से पहले आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर वह 30 को रिपोर्ट सौंपेगी। सीबीआई ने मामले में निलंबित आईजी जैदी, डीएसपी मनोज जोशी और अन्य छह पुलिस कर्मियों के खिलाफ 25 नवंबर को निचली अदालत में चार्जशीट दाखिल कर ली है। हालांकि, मामले में सीबीआई को अभी सप्लीमेंटरी चार्जशीट भी दाखिल करनी है। सीबीआई ने इस मामले में 16 नवंबर को शिमला के पूर्व एसपी डी डब्ल्यू नेगी को गिरफ्तार किया था।

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