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आसान शिकार की तलाश में जंगल से शहर की ओर रहा तेंदुआ, ले गया कुत्ते को उठा

खास बात यह है कि यह तेंदुआ कभी जाखू में तो कभी पंथाघाटी नवबहार में देखा जा रहा है।

Dainik Bhaskar

Nov 25, 2017, 07:23 AM IST
Leopard from the jungle to the city

शिमला. शहर में तेंदुए का खौफ कम नहीं हो रहा है। अब सीपीअारअाई कॉम्प्लेक्स में तेंदुआ पहुंचा। यहां पर उसने एक कुत्ते को अपना शिकार बनाया। यह पूरा वाक्या सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ है। अब भोजन की तलाश में तेंदुआ रिहाइशी इलाके में पालतू कुत्तों को अपना शिकार बना रहा है। इससे पहले भराड़ी और जाखू में राह चलते लोगों पर ये हमला कर चुका है। खास बात यह है कि यह तेंदुआ कभी जाखू में तो कभी पंथाघाटी नवबहार में देखा जा रहा है। ऐसे में लोगों को देर शाम के बाद अपने घरों से निकलना मुश्किल हो रहा है।

सीपीअारअाई कॉम्प्लेक्स की सिक्योरिटी में तैनात संजीव कहते हैं कि हमने रात को करीब डेढ़ बजे कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनी। ये कुत्ते आसपास के घराें से कॉम्प्लेक्स में आए थे। थोड़ी देर बाद कुत्तों के भौंकने की आवाज बंद हो गई। हमने जब दूसरे दिन सीसीटीवी कैमरे देखे तो इसमें तेंदुआ कुत्ते का शिकार करते हुए साफ दिख रहा है।

वन विभाग ने तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम करवाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए की मौत का कारण निमोनिया बताया गया है।
भोटा बसस्टैंड के पास शुक्रवार सुबह खेतों में एक नर तेंदुआ मृत हालत में मिला है। डेढ़ साल के इस तेंदुए का शव जंगल के पास पड़ा हुआ था। लोगों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी।

बचाव के लिए लोग फोड़ रहे पटाखे
इन दिनों नवबहार इसके अासपास के क्षेत्रों में लोग दिवाली में प्रयोग किए जाने वाले पटाखों का इस्तेमाल कर रहे हैं। देर रात पटाखों के धमाके किए जाते है, ताकि तेंदुआ डर कर भाग जाए।
रात आठ बजे के बाद कोई भी जंगल के रास्ते से नहीं गुजर रहे हैं।
पालतू कुत्तों को कमरे में बंद कर रहे हैं, ताकि वे तेंदुए का शिकार हो जाए।
खासकर भराड़ी ओर जाने वाले लोग एक दूसरे के सहारे अपने घरों की ओर जा रहे हैं।

गुर्राहट से रिहाइशी इलाके के लोग दहशत में
इससे पहले तेंदुआ भराड़ी में ही एक युवक पर हमला कर चुका है। तीन दिन पहले एक युवक जब बाइक पर घर जा रहा था तो तेंदुए ने उस पर हमला किया था।
मिनी कुफ्टाधार, बड़श, शांकली, भराड़ी, एवरसन्नी के आसपास लंबे समय से तेंदुआ घूम रहा है। रात 8 से 9 के बीच तेंदुआ घूमता दिखाई देता है।
तेंदुए को पकड़ने के लिए इन क्षेत्रों में जगह-जगह करीब आठ पिंजरे लगाए हैं, पर वह हाथ नहीं रहा है।
दरअसल, विभाग ने जितने भी पिंजरे लगा रखे हैं, उनमें तेंदुए को फंसाने के लिए प्रयास तो होते है, लेकिन वह इसमें जाता ही नहीं है।
कुछ दिन पहले ढेंड़ा में स्थानीय लोगों की मदद से एक तेंदुअा पकड़ा गया था। वह अस्वस्थ था, जिस कारण वह पकड़ में अाया।

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