मान्यता बचाने के लिए बदली किए दाे डाॅक्टर, वापस भेजे अाॅपरेशन वाले मरीज
मेडिकल कॉलेजाें में मान्यता बचाने के लिए सरकार ने डाॅक्टराें की अदल-बदली शुरू कर दी है। एमसीअाई की टीम काे दिखाने के लिए अब अाईजीएमसी से ऑर्थाे से दाे डाॅक्टर नाहन मेडिकल कॉलेज भेज दिए हैं। डाॅक्टराें की अदला बदली का असर सीधा मरीजाें पर पड़ने लगा है। असर भी एेसा है कि अब बिना अाॅपरेशन के ही मरीजाें काे घर भेजा जा रहा है। एेसा ही मामला आईजीएमसी में ऑर्थाे में एडमिट 57 वर्षीय पेशेंट जग्गी राम के साथ हुअा। जग्गी राम को अाईजीएमसी में 19 दिन तक एडमिट रखा। डाॅक्टराें ने उनके सभी टेस्ट भी करवाए। दाे बार अाॅपरेशन के लिए टाइम दिया। एक बार एनेस्थिसिया तक दे दिया, मगर इस बीच उनके डाॅक्टर का ट्रांसफर नाहन मेडिकल कॉलेज के लिए हाे गया, ताे यहां पर पेशेंट पर अाैर डाॅक्टराें ने ध्यान देना बंद कर दिया। अाखिर डाॅक्टर की ट्रांसफर के चार दिन बार उन्हें बिना अाॅपरेशन किए यह कहकर छुट्टी कर दी कि अापके डाॅक्टर की ट्रांसफर नाहन के लिए हाे गई है। वही अापका केस देखेंगे। अगर वह वापस अाते हैं ताे अाॅपरेशन के लिए अापकाे बुला लेंगे। नहीं ताे अाप कहीं अाैर अाॅपरेशन करवा सकते हैं। इसी अदला-बदली के चक्कर में पहले ही टांडा मेडिकल कालेज में पीजी की 13 सीटें खत्म हाे चुकी हैं।
कई दूसरे मरीजाें काे भी भेजा जा रहा घर
कुंदन लाल ने दावा किया कि उनके पिता वार्ड में 28 नंबर बैड पर थे। उनके साथ कई पेशेंट एेसे थे, जाे ट्रांसफर किए डाॅक्टर ही देख रहे थे। अब उन सभी मरीजाें काे जबरन घर भेजा जा रहा है। उन्हाेंने कहा कि वार्ड में एक रामकुमार नाम का मरीज तीन माह से एडमिट है। अभी उनका अाॅपरेशन नहीं हुअा है। उसे भी यह बाेल दिया है कि वह घर चला जाए। जब तुम्हारे डाॅक्टर अाएंगे ताे ही अाॅपरेशन किया जाएगा। कई अन्य मरीज भी इसी तरह की परेशानी झेल रहे हैं।
21 फरवरी को एनेस्थिसिया देने के बाद भी नहीं किया ऑपरेशन
अाईजीएमसी में जब जग्गी राम का ऑपरेशन नहीं हुअा तो वे वापस बैसाखी के सहारे लौट गए। दाईं जांघ की हट्टी टूटी है।
दाे डाॅक्टराें की ट्रांसफर नाहन मेडिकल कॉलेज के लिए कर दी गई है। तीन डाॅक्टर पहले से वैकेशन पर है। अब ऑर्थाे में केवल एक ही डाॅक्टर बचा है। जबकि राेजाना कई अाॅपरेशन हाेते हैं। एक डाॅक्टर कितने अाॅपरेशन कर पाएगा। हालांकि किसी पेशेंट काे अाॅपरेशन के लिए मना नहीं किया जा सकता। फिर भी किसी पेशेंट काे मना किया गया हाे ताे मै इस बारे में पता करूंगा। डाॅक्टराें का काम मरीजाें की सेवा है। इसमें काेताही नहीं बरती जाएगी।
डाॅ. मुकुंद, प्रिंसिपल एवं एचअाेडी ऑर्थाे डिपार्टमेंट अाईजीएमसी शिमला
बदली के चक्कर में गई टांडा की 13 सीटें एमसीअाई की टीम के अाने के दाैरान मेडिकल कालेजाें में बड़े स्तर पर डाॅक्टराें के तबादले किए जाते हैं। जिस मेडिकल कालेज में टीम जांच के लिए अाती है, वहां पर स्टाॅफ पूरा दिखाने के लिए अन्य कालेजाें से स्टाॅफ भेजा जाता है। इसी अदला बदली के चक्कर में इस बार एमसीअाई ने टांडा मेडिकल कालेज में एनेस्थिसिया पीजी की 13 सीटें खत्म कर दी है। अब दाेबारा से उन सीटाें काे वापिस पाने के लिए कालेज काे काफी दिक्कतें अाएंगी।
खाली पेट ओटी भी ले गए, फिर वापस भेजा अानी निवासी कुंदन लाल ने बताया कि उनके पिता जग्गी राम काे टांग में हड्डी के अाॅपरेशन के लिए 18 फरवरी काे एडमिट किया था। 21 फरवरी काे उनके अाॅपरेशन हाेना था। 21 फरवरी काे खाली पेट उन्हें सुबह अाेटी में ले गए। इस दाैरान उन्हें अाॅपरेशन के लिए पूरी तरह से तैयार कर दिया गया। एनेस्थिसिया भी दे दिया गया। मगर देरशाम बिना अाॅपरेशन के ही लाैटा दिया। जबकि वह दिन भर खाली पेट रहे। उसके बाद दाे बार अाॅपरेशन के लिए बाेला, मगर अाॅपरेशन नहीं किया। चार मार्च काे उन्हें बताया कि उनके डाॅक्टर की ट्रांसफर अाईजीएमसी से नाहन मेडिकल कॉलेज कर दी गई है। लिहाजा अब उनका अाॅपरेशन नहीं हाे सकता। उन्हें छुट्टी कर दी जाएगी। कुंदन लाल ने बताया कि उन्हें इसका विराेध किया अाैर सात मार्च तक मना करते रहे। मगर सात मार्च काे दूसरे डाॅक्टर उनके पास अाए अाैर उन्हें कहा कि अाॅपरेशन अाैर काेई डाॅक्टर नहीं करेगा अगर अापके डाॅक्टर वापस अाते हैं ताे बता दिया जाएगा। नहीं ताे अाप कहीं अाैर भी अाॅपरेशन करवा सकते हैं। एेसे में सात मार्च शात काे उन्हें जबरन घर भेज दिया गया। अब वह पीजीअाई में अाॅपरेशन करवाने जाएंगे।
अगस्त 2018 से लगातार हो रहे ऑपरेशन कुंदन लाल ने बताया कि अगस्त 2018 में उनके पिता की टांग पर लाेहे का गेट गिरने से टूट गई थी। 27 अगस्त 2018 काे उनका अाॅपरेशन अाईजीएमसी में इमरजेंसी में करवाया गया था। इस दाैरान उनकी टांग की हड्डी में हल्का गैप रह गया था। डेढ़ साल तक डाॅक्टर दवाएं देते रहे अाैर कहते रहे कि गैप भर जाएगा। कुंदन लाल ने बताया कि जब गेप दवाअाें से नहीं भरा ताे दाेबारा से अब 18 फरवरी काे उन्हें अाईजीएमसी अाॅपरेशन के लिए बुलाया गया था। उन्हाेंने कहा कि उनके पास हेल्थ कार्ड है। अाईजीएमसी में उनका अाॅपरेशन निशुल्क हाे जाना था। मगर अब उन्हें या ताे पीजीअाई जाना पड़ेगा या फिर एमएमयू में, जहां उन्हें जेब से खर्चा करना पड़ेगा। क्याेंकि पहले भी अाॅपरेशन में वह डेढ़ लाख रुपए खर्च चुके हैं।
अाईजीएमसी में राेजाना ऑर्थो में सबसे अधिक अाेपीडी रहती है। यहां पर 250 से अधिक मरीज जांच के लिए अाते हैं। इसमें अधिकांश पेशेंट के प्लास्टर अाैर अाॅपरेशन की जरूरत रहती है। मगर अाईजीएमसी के अार्थाे डिपार्टमेंट का हाल एेसा हाे गया है कि यहां पर अब केवल एक ही डाॅक्टर बचा है। कुल छह डाॅक्टराें में से 3 डाॅक्टर विंटर वैकेशन पर हैं। दाे डाॅक्टराें की ट्रांसफर नाहन मेडिकल कालेज काे कर दी गई है। एक डाॅक्टर ही बचा है। वह अाेपीडी देखे या फिर मरीजाें के अाॅपरेशन करें। एेसे में अब यहां पर मरीजाें काे दिक्कतें अाना तय है।
अब बचा सिर्फ ऑर्थो का एक ही डाॅक्टर