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कंडक्टर भर्ती मामले में पुलिस तैयार कर रही चार्जशीट, भर्ती से जुड़े अधिकारियों की बढ़ेंगी मुश्किलें, अांसरशीट में थी ओवरराइटिंग

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:25 AM IST

Shimla News - एचआरटीसी भर्ती मामले में पुलिस चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। पुलिस अपनी चार्जशीट में एचआरटीसी में तैनात रहे...

Shimla News - chargesheet preparing police in the conductors recruitment case the problems associated with the recruitment of the officers will be difficult the underwriting was in the overwriting
एचआरटीसी भर्ती मामले में पुलिस चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। पुलिस अपनी चार्जशीट में एचआरटीसी में तैनात रहे उन अधिकारियों को नामजद कर रही है जो कि भर्ती से जुड़े रहे हैं। भर्तियों में धांधली को लेकर करीब आधा दर्जन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय है।

हिमाचल पथ परिवहन निगम में साल 2003-04 में हुई कंडक्टर भर्तियों में पुलिस को भारी अनियमितताएं मिली हैं। जांच में पाया गया कि निगम ने स्वीकृत पदों से कहीं ज्यादा भर्तियां कर दीं, और कुछ के लिए मंजूरी ही नहीं ली गई। एचआरटीसी के निदेशक मंडल ने पहले कंडक्टरों के 300 पदों को भरने की मंजूरी दी थी। इसके बाद 65 और पद भरने को निदेशक मंडल ने मंजूरी दी। लेकिन भर्ती के लिए मेरिट लिस्ट कंबाइंड बनाने की बजाए डिविजन वाइज बनाई गई। मेरिट लिस्ट जारी करने के बाद वेटिंग लिस्ट भी नहीं बनाई, जबकि एचआरटीसी ने 13 और उम्मीदवारों को चयनित भी कर लिया। इन पदों के लिए निदेशक मंडल तक की मंजूरी नहीं ली गई। चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए आंसरशीट से छेड़छाड़ की बात भी सामने आई है। पुलिस को जांच के दौरान कई आंसरशीट ऐसी मिली हैं, जिनमें आंसर को मिटाकर इनके स्थान पर ओवर राइटिंग हुई है। इस तरह गलत आंसरों को भी सही करवाकर चहेतों को लिखित परीक्षा में भी अच्छे नंबर दिलाए गए। वहीं यह भी पाया गया कि कुछ परीक्षा केंद्रों से हैडक्वार्टर भेजे गए आंसरशीट के करीब आधा दर्जन लिफाफों में सीलें ही नहीं लगी थी। हालांकि परीक्षा होने पर इनकी आसंरशीटों को लिफाफों में सीलबंद किया जाता है। यह काम परीक्षा केंद्र के अधिकारी करते हैं। लेकिन जांच में आंसरशीट के कुछ लिफाफों पर सीलें नहीं मिली। पुलिस अब आंसरशीट की फारेंसिक जांच करवा रही है। इसके लिए भर्ती से जुड़े अधिकारियों की हैंडराइटिंग की भी जांच करवाई जा रही है। पुलिस ने अधिकारियों की लिखावट के नमूने लिए हैं और उनको फारेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इस तरह पुलिस भर्तियों में हुई धांधली को लेकर साइंटिफिक सबूत जुटाए जा रही है। पुलिस अब इसकी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। माना जा रहा है कि इसके मिलते ही चार्जशीट फाइनल कर दिया जाएगा। वहीं जांच में पाया गया है कि लिखित परीक्षा में अधिक अंक वालों के इंटरव्यू में कम अंक दिए गए जबकि कम अंक वालों को ज्यादा अंक मिले।

ये था मामला एचआरटीसी के निदेशक मंडल ने 24 अक्टूबर 2003 को कंडक्टरों के 300 पदों को भरने की मंजूरी दी थी। इसके लिए एचआरटीसी को करीब 20 हजार आवेदन मिले। लेकिन बाद में एचआरटीसी ने 378 पदों पर भर्तियां कर दी। लेकिन यह भर्तियां विवादों में घिर गईं। इस मामले की विजिलेंस भी जांच कर चुकी है। बिलासपुर निवासी जयकुमार की याचिका पर की शिमला की एक अदालत ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद सदर थाने में इसको लेकर केस दर्ज किया गया है। अब पुलिस इसकी जांच कर चार्जशीट तैयार कर रही है। इसमें पुलिस भर्ती बोर्डों के प्रमुख रहे तत्कालीन डीएम सहित करीब आधा दर्जन अधिकारियों को नामजद करने की तैयारी है। ये वो अधिकारी हैं जो कि भर्ती से सीधे जुड़े रहे हैं और इनके अधीन ही भर्ती प्रक्रिया हुई। इससे इन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय है।

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