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कांग्रेसियों ने पूरे प्रदेश में फूंके सत्ती के पुतले

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:26 AM IST

Shimla News - भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती के बयान पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शिमला सहित प्रदेश भर में विराेध प्रदर्शन किया।...

Shimla News - congressmen burnt effigies of the whole state
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भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती के बयान पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शिमला सहित प्रदेश भर में विराेध प्रदर्शन किया। विरोध स्वरूप कांग्रेस ने सत्ती के पुतले फूंके। सत्ती द्वारा एक जनसभा में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी काे अपशब्द कहे जाने के मामले पर बिफरी कांग्रेस ने सत्ती के खिलाफ विराेध प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि जब तक भाजपा अध्यक्ष अपनी गलती पर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांग लेेते तब तक उनके खिलाफ यह विराेध प्रदर्शन जारी रहेगा। कांग्रेस ने शिमला से लेकर चंबा तक अाैर जिला से लेकर ब्लाॅक स्तर तक सत्ती के खिलाफ विराेध प्रदर्शन किया अाैर खूब नारेबाजी की। सभी जगह विराेध प्रदर्शन के दाैरान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनके पुतले फूंके। शिमला में पार्टी मुख्यालय राजीव भवन से डीसी अाॅफिस तक विराेध रैली निकाली गई। कार्यकर्ता सत्ती के खिलाफ नारे बाजी करते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। पार्टी के नेता अाैर कार्यकर्ताओं ने यहां पर एकत्रित हाेकर अपना विराेध प्रदर्शन किया अाैर सतपाल सत्ती का पूतला फूंका। कांग्रेस जिला अध्यक्ष यशवंत छाजटा ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती द्वारा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कहे गए आपत्तिजनक शब्दों से उनकी मानसिकता का पता चलता है। उन्होंने कहा कि जब तक सत्ती सार्वजनिक ताैर पर माफी नहीं मांग लेते तब उनका यह विराेध प्रदर्शन प्रदेश भर में जारी रहेगा।

अभी तक हिमाचल में तीखे हमले तो थे आम, लेकिन शब्दों की मर्यादा नहीं होती थी पार

शांत वादियों में दूषित राजनीति के बिगड़े बोल, कहीं दी जा रही गालियां तो कोई जारी कर रहा फतबा

भास्कर न्यूज | शिमला

शांत आबोहवा, साफ दिल, मीठी जुबान के लिए देश भर में पहचान रखने वाले हिमाचल की राजनीति में नेताआें के बोल बिगड़ने लगे हैं। राजनीतिक लड़ाई में नेता मंच से ही शब्दों की सभी मर्यादा पार कर रहे हैं। पहाड़ निजी हमलों की बजाय मुद्दों की राजनीति नेताआें के साथ वोटरों भी पसंद करते थे। अब हिमाचल ये पहचान खो रहा है।

पिछले एक दशक में वीरभद्र सिंह आैर धूमल परिवार के बीच एचपीसीए को लेकर जमकर राजनीति जंग हुई। राजनीति इतनी गहरी की लड़ाई देश के सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ी गई, लेकिन कभी खुले मंच से एक दूसरे को गाली नहीं दी, न ही किसी के लिए फतबा जारी किया। सत्ता में आते दूसरे के खिलाफ केस बने, सत्ता से बाहर हुए तो खुद केस झेले। हिमाचल लंबे समय तक इस राजनीति के लिए जाना गया। 2017 के चुनावों से पहले चुनाव बाद इसी तरह की राजनीति की उम्मीद की जा रही थी, रिजल्ट ऐसे आए कि समीकरण ही बदल गए। बदलाव अच्छा होगा, यहीं उम्मीद प्रदेश की 70 लाख आबादी को थी, लेकिन 2019 के चुनावों में हिमाचल में राजनीति का स्तर इस तरह गिरता दिख रहा है कि हिमाचल की शर्मसार हो गया।

83 फीसदी साक्षर हिमाचल में नेता वोट बटोरने के लिए राजनीतिक मंच से गालियां दे रहे हैं। दूसरी तरफ से गाली के जवाब में फतबे जारी किए जा रहे हैं। ये हिमाचल की राजनीति के लिए कितना खराब होगा, ये तो समय ही तय करेगा, लेकिन यह तय है कि इस तरह की बातों से देश भर में हिमाचल की साख को धक्का जरूर लगेगा। भाजपा अध्यक्ष बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाते है। लंबे समय से हिमाचल भाजपा के अध्यक्ष है।

चुनाव आयोग ने नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। जवाब संतोषजनक आयोग की नजर में नहीं रहा तो चुनाव आयोग का फैसला भी हिमाचल के लिए इतिहास हो सकता है। इससे पहले न ही हिमाचल के किसी नेता पर ऐसे आरोप लगे आैर न ही चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगना पड़ा है।

कांग्रेस ने भी इसे खत्म करने की बजाय अपना स्तर गिराते हुए फतबा जारी किया है, हालांकि विनय कुमार हिमाचल के कद्दावर नेता नहीं है। वीरभद्र सरकार के समय में ही एचपीसीए मामले को तूल देने पर सुर्खियों में रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस की आेर से इस राजनीति से हिमाचल का नाम खराब होना लगभग तय है।

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