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कोरोनावायरस से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 147 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका
सुरक्षा कारण बता ईरान ने वैज्ञानिकों को लैब स्थापित नहीं करने दी
नई दिल्ली| ईरान ने भारत सरकार के अनुरोध के बाद भी वहां लैब स्थापित करने की मंजूरी नहीं दी। लैब बनाने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के छह वैज्ञानिक सात दिन पहले ईरान भेजे गए थे। मंजूरी नहीं मिलने के चलते वहां फंसे भारतीयों के नमूनों को जांच के लिए देश लाया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक ईरान में करीब 3000 भारतीय फंसे हैं। सूत्रों ने बताया ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारतीय वैज्ञानिकों को वहां लैब स्थापित करने और नमूने लेने के लिए भी फील्ड में जाने की भी मंजूरी नहीं दी। अब ईरान में भारतीय राजदूत की मदद से नमूनों को जुटाया किया जा रहा है। अभी तक करीब 550 भारतीयों के नमूनों को एकत्रित किया गया है, जिसमें से 108 सैंपल को जांच के लिए भारत लाए गए हैं। भारत सरकार मालदीव में भी कोरोना की जांच के लिए लैब स्थापित करने की तैयारी है।
नई दिल्ली |दुनिया के सौ से ज्यादा देशों में फैल चुका कोरोनावायरस चीन के साथ साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी रोग बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र की ट्रेड एंड डेवलेपमेंट एजेंसी ने कहा है कि कोरोनावायरस से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2 लाख करोड़ डॉलर (148 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान होने की आंशका है। दुनिया के कई देश इसकी वजह से मंदी में जा सकते है। साथ ही वैश्विक सालाना विकास दर के 2.5 फीसदी से नीचे आने का अनुमान है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा कि कोरोना वायरस से फैली महामारी के दुखद मानवीय परिणामों के अलावा इससे आर्थिक अनिश्चितता भी फैल गई है। हमारा अनुमान है कि ग्लोबल इकोनॉमी इस साल आर्थिक सुस्ती में रहेगी और आर्थिक विकास दर 2 फीसदी से नीचे आ सकती है। इस मानवीय त्रासदी से इस साल हजारों लोगों की मौत के साथ साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ डॉलर का नुकसान होगा। एक प्रारंभिक अनुमान के आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को चीन सहित कुल 2 लाख करोड़ का नुकसान होने की आशंका है। इसमें सबसे बुरी तरह प्रभावित तेल आयातक और कमोडिटी आयातक देश होंगे। इन देशों की विकास दर लगभग 1 फीसदी तक कम होगी। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ल्ड इकोनॉमी के लिए यह तबाही का दौर साबित हो रहा है। अर्थव्यवस्था 0.5 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ रही है। ग्लोबल सप्लाई चेन टूटने से पहले ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को गिरते कच्चे तेल की कीमतों ने दोहरे संकट में फंसा दिया है।