नगर निगम की बनाई पार्किंग काे छीन रही सरकार, 2 मंजिलें पहले ली, दो और मांगी

Shimla News - नगर निगम की बनाई शहर की सबसे बड़ी टूटीकंडी पार्किंग पर सरकार धीरे-धीरे कब्जा करती जा रही है। पहले से दाे फ्लाेर पर...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:31 AM IST
Shimla News - government snatching parking of municipal corporation took 2 floors first asked for two more
नगर निगम की बनाई शहर की सबसे बड़ी टूटीकंडी पार्किंग पर सरकार धीरे-धीरे कब्जा करती जा रही है। पहले से दाे फ्लाेर पर कब्जा कर चुकी सरकार ने अब दाे फ्लाेर अाैर मांग लिए हैं। शहर के एंट्री प्वाइंट टूटीकंडी बायपास पर बनी इस पार्किंग में प्रदेश सरकार का जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट यानी जीएडी काे दो मंजिलें पहले ही दे दी थी, मगर अब उन्हाेंने दाे मंजिल अाैर मांग ली है।

इन चार मंजिलों पर जनता या शहर में आने वाले सैलानियों की 300 गाड़ियों की पार्किंग पर जीएडी नेताओं, विधायकों, ब्यूरोक्रेसी और ब्यूरोक्रेट्स के बाहर से आने वाले मेहमानों की गाड़ियों के लिए फ्री में जगह चाहिए, इसमें कुछ विभाग भी शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। इस पार्किंग काे शहर में बाहर से आने वाली गाड़ियों काे अंदर आने से रोकने के लिए बनाया गया है। लेकिन साढ़े सात सौ गाड़ियों की क्षमता वाली इस पार्किंग में 40 फीसदी जगह वीवीआईपी को बिलकुल मुफ्त चाहिए।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने 29 नवंबर 2018 काे इस पार्किंग का उद्घाटन िकया था। पार्किंग काे हैंडअाेवर करने के मामले में एडीबी अाैर नगर निगम अामने-सामने अा गए थे। एडीबी ने सरकार के अादेशाें के बाद ही इसे एमसी काे दिए जाने की बात की थी जबकि एमसी का ये कहना था िक पार्किंग एमसी के दायरे में हैं ताे इसे एडीबी उन्हें क्याें नहीं साैंप रहा। यह विवाद काफी दिनाें तक चला था अाैर बाद में इसे एमसी काे हैंडअाेवर करना पड़ा। लेकिन अब जिस तरह धीरे-धीरे सरकार इस पार्किंग के प्लोर अपने लिए मांग रही है, उससे आने वाले समय में शिमला शहर में पार्किग की समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है। जिससे यातायात व्यवस्था चरमा सकती है।

टूटीकंडी के पास बनी पार्किंग, जिसे सरकार धीरे-धीरे छीन रही है।

जब नगर निगम नहीं चला पा रहा ताे है ये हाल

एक साल पहले इस पार्किंग का उद्धाटन हाे चुका है, मगर अभी तक निगम इसके टेंडर नहीं कर पाया है। इसका खामियाजा शहर की जनता के साथ-साथ शिमला आने वाले सैलानियों को भुगतना पड़ रहा है। करीब 80 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस पार्किंग में अभी भी 600 से अधिक वाहन खड़ा करने की क्षमता है। लेकिन इस पार्किंग का आज तक इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इस पार्किंग की दो मंजिल में आईटी विभाग ने अपना एक सेल खोला है और बाकी मंजिलें खाली हैं। अब सरकार की नजर इस पार्किंग की कुछ और मंजिलें हासिल करने की है। इसे लेकर सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारी विजिट भी कर आए हैं।

सरकार ने पार्किग बनाने पर नहीं किया कोई खर्च, अब किस हक से दो प्लोर मांग रही है प्रदेश सरकार

हैरानी की बात है कि सरकार ने इस पार्किंग में काेई पैसा नहीं लगाया है। एडीबी ने इस पार्किंग का निर्माण करवाया था अाैर निगम काे साैंपी है। अब सरकार इस पर नजर जमाए बैठी है। एेसे में अब सरकार इस पार्किंग के दाे अाेर फ्लाेर मांग रही है। बताया जा रहा है कि निगम भी अब दाे फ्लाेर काे सरकार काे साैंपने की तैयारी में है। हालांकि इसे लेकर अभी मुद्दा हाऊस में भी उठ सकता है। पहले पार्षदाें ने दाे फ्लाेर देने का विराेध किया था।

शिमला के ट्रैफिक काे कम करने के लिए बनाई गई है यह पार्किंग, ऐसे कैसे कम होगा ट्रैफिक

शहर के ट्रैफिक काे कम करने के लिए यह पार्किंग बनाई गई थी। इस पार्किंग में 750 वाहनाें काे खड़े करने की क्षमता है। शहर की यह सबसे बड़ी पार्किंग है। बाहरी राज्याें से अाने वाले टूरिस्ट यहीं पर अपने वाहन खड़े कर सकते हैं। इससे शहर में ट्रैफिक कम हाे सकता था। मगर अब धीरे-धीरे यह पार्किंग निगम सरकार काे साैंप रहा है। ऐसे में शिमला शहर में आने वाले दिनों में ट्रैफिक की व्यवस्था चरमरा सकती है। क्योंकि पार्किंग की एक स्टोरी में 60 से 70 गाड़ियां पार्क होती थी। ऐसे में अब यह गाड़ियां सड़क किनारे की पार्क करनी पड़ेगी।

मेयर कुसुम सदरेट से सीधी बात


मेयर: सरकार ने निगम से पार्किंग में दाे फ्लाेर मांगे हैं।


मेयर: सरकार ने फ्लाेर मांगे हैं ताे देने ही पड़ेंगे।


मेयर: हाऊस की अप्रूवल के बाद ही इसे सरकार काे दिया जा रहा है।


मेयर: कमी ताे हाेगी, मगर अब सरकार ने जब इसे मांगा है ताे देना ही पड़ेगा।

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