शिमला

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प्रशासनिक ट्रिब्यूनल कर्मचारियोंं के लिए मंडी-धर्मशाला में खोलेगा बैंच

सीएम ने सभी विभागों से तलब की है रिपोर्ट

Danik Bhaskar

Sep 09, 2018, 04:32 AM IST

शिमला | राज्य सरकार शीघ्र ही कर्मचारियों को राहत देने के लिए मंडी आैर धर्मशाला में स्थाई ट्रिब्यूनल के बैंच बनाने पर फैसला ले सकती है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सरकार के आला अधिकारियों से इसकी पूरी डिटेल मांगी है। इसमें सर्किट बैंच को स्थाई बैंच में बदलने के बाद कितना प्रशासनिक खर्च पड़ेगा, इसके खुलने से कितने कर्मचारियों को लाभ मिलेगा, कितने कर्मचारी प्रशासनिक न्यायालय पहुंच रहे हैं। इसकी पूरी डिटेल विभाग से मांगी है। कार्मिक विभाग अब सभी विभागों से प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में चल रहे मामलों की रिपोर्ट ले रहा है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के बाद सरकार को सौंपी जानी है।


कर्मचारियों से जुड़े कितने मामले प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर के गृहजिले मंडी आैर धर्मशाला में अभी तक ट्रिब्यूनल के सर्किट बैंच लगते है। इस दौरान कर्मचारियों के कुछ मसलों की सुनवाई तो होती है, लेकिन यदि याचिका दायर करनी है तो उन्हें शिमला ही आना पड़ता है।

दो सदस्यों की नियुक्ति का है इंतजार
राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में अभी अध्यक्ष के अलावा न्यायिक सदस्य ही है। प्रशासनिक सदस्यों के दोनों पद खाली चल रहे हैं। हरिंद्र हीरा आैर प्रेम कुमार दोनों ही सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। राज्य में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में दो सदस्यों की तैनाती के लिए 11 आवेदन पहुंचे हैं।

वीरभद्र सरकार में खुला था प्रशासनिक ट्रिब्यूनल
राज्य में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को पूर्व वीरभद्र सरकार के समय में शुरू किया था। इससे पहले भाजपा की सरकार में इसे बंद किया था। इसका कर्मचारी विरोध कर रहे थे आैर दोबारा से खोलने की मांग कर रहे थे। कर्मचारियों की मांग पर केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद पूर्व कांग्रेस सरकार ने इसे खोलने का फैसला लिया था।

राजनीतिक महत्व से भी महत्वपूर्ण हैं मंडी-कांगड़ा
हिमाचल की राजनीति में कांगड़ा के बाद मंडी का कद अहमियत रखता है। कांगड़ा में विधानसभा की 15 सीटें आैर मंडी में दस सीटें है। ऐसे में दोनों ही जिलों के राजनीतिक महत्व को देखते हुए जयराम सरकार 2019 के चुनावों से पहले दाव खेल सकती है। शिमला में पहले ही प्रशासनिक ट्रिब्यूनल है।

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