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आईजीएमसी-टांडा मेडिकल काॅलेज में कैंसर पेशेंट्स के लिए लगेगी पेट स्कैन

एक वर्ष पहले
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कैंसर के शुरुअाती दाैर का पता लगाने के लिए शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल काॅलेज और धर्मशाला के टांडा मेडिकल काॅलेज में पेट स्कैन मशीन इंस्टॉल की जाएगी। शिमला में कैंसर अस्पताल के पास पेट स्कैन के लिए भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए फाॅरेस्ट क्लियरेंस का मामला अंतिम चरण में पहुंच गया है। भवन निर्माण के लिए नगर निगम शिमला से एनओसी मिल गई है। यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा में विधायक नरेंद्र ठाकुर और पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल द्वारा पेट स्कैन को लेकर पूछे गए संयुक्त सवाल के जवाब में कही। भास्कर ने प्रदेश के कैंसर पेशेंट्स का दर्द समझा और 25 फरवरी को इस मुद्दे को प्रमुख्ता से प्रकाशित किया। अब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा सत्र के दौरान दो मेडिकल कॉलेजों में शुरुअाती दौर में पेट स्कैन मशीन इंस्टॉल करने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो साल में सरकार ने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बहुत काम किए। मुख्यमंत्री ने कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश और देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व इस बीमारी के लिए चिंतित है। मुख्यमंत्री ने कहा मेडिकल साइंस में कैंसर का इलाज संभव है। इस रोग की रोकथाम के लिए इसका शुरूआती दौर में पता लगाना बेहद जरूरी है। यह पेट स्कैन के कारण ही मुमकिन हो सकता है। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि अभी प्रदेश में यह सुविधा नहीं है। मरीजों को इस रोग के लक्षणों का पता लगाने के लिए अभी भी चंडीगढ़ और दिल्ली भेजा जा रहे है। मुख्यमंत्री ने माना कि प्रदेश में अपनी पेट स्कैन मशीन होनी चाहिए सरकार का इस दिशा में प्रयास जारी है।

धीरे-धीरे सभी मेडिकल कॉलेज में इंस्टॉल होगी ये मशीन

अभी जाना पड़ता है पीजीअाई, मरीजों का समय और पैसा होता है बर्बाद कैंसर का पता लगाने के लिए अब प्रदेश के लाेगाें काे अब प्रदेश के बाहर जाकर पेट स्कैन के लिए या ताे पीजीअाई जाना पड़ रहा है या फिर फाेर्टिस या सेक्टर 46 के अस्पताल में पहुंचना पड़ रहा है। पीजीअाई में दाे से तीन माह की वेटिंग हाेती है, वहां पर यह टेस्ट 10 हजार में हाेता है, जबकि प्राइवेट अस्पतालाें में 25 हजार रुपए इस टेस्ट के चुकाने पड़ते हैं। प्रदेश के अस्पतालों में ये सुविधा अभी तक शुरू नहीं हाे पाई है। जिसका सीधा खामियाजा कैंसर पेशेंट उठा रहे हैं। उन्हें पीजीअाई पहुंचकर टेस्ट करवाना पड़ रहा है।

लेटेस्ट टेक्नोलॉजी पर काम कर रही सरकार मुख्यमंत्री ने कहा अस्पतालों में मौजूद सभी मशीनें ठीक हैं। रेगुलेटरी बाॅडी के मुताबिक मशीनों में कोई डिफेक्ट नहीं पाया गया है। विधायक आशीष बुटेल ने कहा कि अस्पतालों में आधुनिक मशीनों से उपचार हो ताकि अधिक से अधिक मरीजों का उपचार हो सके। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकंे इसके लिए सरकार लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की सुविधा देने का विचार कर रही है।

जयराम ठाकुर

मुख्यमंत्री

25 फरवरी को प्रकाशित।

मशीन पूरे शरीर में कैंसर कहां-कहां फैला है इसका लगाती है पता पेट स्कैन टेस्ट मरीज के शरीर में कैंसर का पता करने के लिए किया जाता है। इससे पूरे शरीर का स्कैन किया जाता है। मरीज के शरीर में कैंसर कहां-कहां तक फैला है, इस टेस्ट से पूरा पता लग जाता है। मरीज को मशीन में डाला जाता है, मशीन में उसकी पूरी बीमारी सामने जाती है। वहीं साधारण अन्य टेस्ट में यह पता नहीं चल पता। पेट स्कैन टेस्ट करने के बाद डॉक्टर मरीज के शरीर में जिस पार्ट में कैंसर फैला हो वहां का इलाज आसानी से कर सकते हैं। यह टेस्ट आर्थो में भी काम आता है। कैंसर का पता लगाने के लिए कैंसर विशेषज्ञ एमआरआई एवं सीटी स्कैन जाच करवाते हैं। उसके आधार पर ही मरीजों का इलाज करते हैं। अलग-अलग अंगों के लिए अलग-अलग जांच करानी पड़ती है। बावजूद इसके कैंसर कोशिकाओं की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पाता है। इस वजह से कई बार कैंसर की स्टेज बदलती जाती है। धीरे-धीरे मरीज मौत की तरफ बढ़ता जाता है।

18 करोड़ रुपए की है एक पेट स्कैन मशीन जयराम ने कहा कि एक पेट स्कैन मशीन की कीमत 18 करोड़ रुपए है। इसलिए सभी मेडिकल काॅलेज में एक साथ यह मशीन लगाना आसान काम नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले आईजीएमसी और टांडा मेडिकल काॅलेज में इसे लगाया जाएगा। जयराम ठाकुर ने जगत सिंह नेगी द्वारा आउटसोर्स पर पेट स्कैन मशीन लिए जाने की बात को सिरे से नकारा और कहा कि सरकार के पास इस मशीन को इंस्टॉल करने के लिए जमीन उपलब्ध है और सभी तरह की क्लियरेंस मिल रही है। ऐसे में इसे आउटसोर्स पर लेने की जरूरत ही नहीं है। इस मशीन से ट्रीटमेंट नहीं होता, बल्कि यह डाइग्नोसिस के लिए है। सरकारी क्षेत्र में यह सुविधा मिले सरकार इस दिशा में काम कर रही है।


भास्कर ने उठाया था कैंसर पेशेंट्स का दर्द, मुख्यमंत्री जयराम ने समझा
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