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अधीनस्थ न्यायालय के जजों-स्टाफ को हाईकोर्ट से उपयुक्त संरक्षण की जरूरत : जस्टिस धर्मचंद चौधरी
न्यायिक प्रतिष्ठान लोकतंत्र की रीढ़ है। अधीनस्थ न्यायालय न्यायिक प्रणाली के महत्वपूर्ण पिल्लर है। इन न्यायालयों में कार्यरत न्यायाधीश और स्टाफ को हाईकोर्ट से उपयुक्त सरंक्षण की जरूरत है ताकि निष्पक्ष, निर्भीक व बिना किसी द्वेष से न्याय प्रदान किया जा सके। अधीनस्थ जज भी न्याय निष्पादन में वही पावन भूमिका निभाते हैं जो उच्च न्यायालय के जज निभाते हैं। यह बात न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी ने अपनी सेवानिवृत्ति के अवसर पर हाईकोर्ट में आयोजित फुल कोर्ट रेफरेंस के दौरान कही।
अपने पिता स्वर्गीय नरोत्तम राम व माता दलतु देवी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया। उनके दिए आशीर्वाद व संस्कारों की बदौलत ही वह इन ऊंचाइयों को छू सके। अपने बड़े भाई एनसी भारद्वाज को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी प्रेरणा से ही उन्होंने न्यायिक क्षेत्र को चुना। अपने दूसरे भाई प्रेम सिंह के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही वे एलएलबी की डिग्री हासिल कर पाए। हिमाचल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश भवानी सिंह को याद करते हुए कहा कि वे उनके गुरु व आदर्श रहे हैं और न्यायपालिका के क्षेत्र में उनका अहम योगदान रहा है। उन्होंने हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीशों, बार एसोसिएशन के सदस्यों, न्यायिक अधिकारियों, अधिकारियों और रजिस्ट्री के अधिकारियों को उनके स्नेह और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। इस अवसर पर प्रदेश महाधिवक्ता अशोक शर्मा,असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल राजेश शर्मा, बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा, बार एसोसिएशन अध्यक्ष एनएस चंदेल ने अपने अपने संबोधन में कहा कि न्यायाधीश चौधरी लोकप्रिय, न्यायाप्रिय और जूनियर वकीलों को प्रोत्साहित करने वाले रहे। उनके सेवानिवृत्त होने से हाईकोर्ट को अपूर्णीय क्षति पहुंची है। इस अवसर पर हाईकोर्ट के तमाम न्यायाधीश व हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीएस राणा, बार एसोसिएशन के सदस्य और हाई कोर्ट के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
फुल रेफरेंस कोर्ट में जस्टिस धर्मचंद चौधरी और बाकी जज।