पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Shimla News Jungle Left In First Winter Left 11 Out Of 18 Pine Fires Seven Could Not Cope With New Environment And Cold Found Dead

पहली सर्दी में सरवाइव कर गए जंगल छोड़े गए 18 में से 11 चीड़ फीजेंट, सात नहीं झेल पाए नया वातावरण और ठंड, मिले मृत

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

कोटी के सेरी के जंगल में छोड़े गए 11 चीड़ फीजेंट पहली सर्दी में सरवाइव कर गए हैं। वन विभाग ने जंगल में 18 फीजेंट छोड़े थे जिनमें से 11 जीवित बताए जा रहे है। हालांकि सात नए वातावरण में एडजस्ट न कर पाने के कारण मरे हैं। वन विभाग इन परिंदों की मॉनीटरिंग कर रहा है और अभी आगे भी इन पर निगरानी रखी जाएगी।

चीड़ फीजेंट को तैयार कर इनको जंगल में नैचुरल ब्रीडिंग का प्रोजेक्ट कामयाब होता दिखाई दे रहा है। वन विभाग चायल की खड़ीऊण फीजेंटरी में चीड़ फीजेंट तैयार करने का काम कर रहा है। यह प्रोजेक्ट बीते कई सालों से चल रहा है। अब अगले चरण में फीजेंट को जंगल में भेजा जा रहा है ताकि वे प्राकृति में ब्रीडिंग कर अपनी संख्या बढ़ा सके। इसके तहत पहला प्रयास वन विभाग द्वारा गत साल 3 अक्टूबर को किया गया। मुख्यमंत्री ने औपचारिक रूप से फीजेंट को रिलीज किया था। इसके दूसरे दिन चार अक्टूबर को 18 चीड़ फीजेंट को सेरी जंगल में छोड़ा गया, इनमें 12 छोटे परिंदे थे। जहां वे करीब एक माह तक बाड़े में रखे गए। इनमें से पहले चरण में कुछ ही दिनों में पांच छोटे फीजेंट्स की मौत हो गई थी। इसके बाद यहां 13 फीजेंट बाकी रह गए थे जिनको जंगल में छोड़ दिया गया।

{बीमारी से नहीं मरे, क्लाइमेट में एडजस्ट नहीं कर पाए सेरी जंगल में छोड़े गए 18 चीड़ फीजेंट में से सात की मौत हुई है। इनमें से पांच छोटे फीजेंट की आरंभ में ही मौत हो गई थी, जबकि दो की मौत बाद में हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक फीजेंट की मौत की मुख्य वजह इनका जंगल के नए वातावरण में एडजस्ट न हो पाना है। वहीं बाहर पहली बार इन परिंदों ने सर्दियों का मौसम झेला है। यही वजह है कि शुरूआत में ही छोटे पांच फीजेंटों की मौत के बाद दो व्यस्क फीजेंट भी जीवित नहीं रह सके। बताया जा रहा है पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इन परिंदों में कोई बीमारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि सर्दियों के मौसम और वहां के नए वातावरण में समायोजित नहीं हो सकने के कारण ही इन परिंदों की मौत हुई है।

{रेडियो कॉलर लगाकर की जा रही है मॉनिटरिंग वन विभाग ने बड़े चीड़ फीजेंट को रेडियो कॉलर लगा रखी है। इससे उनकी गतिविधियां रिकार्ड की जाती है। ये परिंदा कहां -कहां जा रहे हैं यह सब इससे मॉनीटर किया जाता है। वन विभाग की ओर से दो लोकल केयरटेकर इसी काम के लिए लगाए गए हैं। इसके अलावा एक रिसर्चर और एक वन कर्मी इनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। बताया जा रहा है कि अभी आगे भी इनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। सीएफ वाइल्ड लाइफ अनिल ठाकुर का कहना है कि चीड़ फीजेंट जंगल के वातारण में एडजस्ट हो गए हैं, यह बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि अभी इन पक्षियों की मॉनीटरिंग जारी रहेगी।

{अब बचे 7 छोटे और 4 बड़े फीजेंट बताया जा रहा है कि सेरी जंगल में छोड़े गए बाकी 13 फीजेंट में दो बड़े फीजेंटों की मौत हुई है। इस तरह अब जंगल में 11 चीड़ फीजेंट बचे हैं जिनमें सात छोटे और बाकी 4 बड़े फीजेंट है। चायल की खड़ीऊण फीजेंटरी में तैयार किए गए इन फीजेंट के लिए पहली सर्दी का मौसम काफी कठिन था। लेकिन अब जबकि सर्दी आखिरी चरण में हो तो यह उम्मीद बढ़ गई है कि बाकी फीजेंट अब सरवाइव कर जाएंगे। पहली सर्दी में इनको एडजस्ट करना बेहद मुश्किल था। आरंभ में इनको बाहर के खान पान का आदी बनाया गया। धीरे-धीरे इनको फीडिंग से हटाकर प्राकृतिक भोजन की ओर डाइवर्ट किया गया। अब ये परिंदे पूरी तरह से बाहर का प्राकृतिक भोजन जैसे जंगली जड़ी बूटियां व वनस्पतियां ग्रहण कर रहे हैं। वहीं बताया जा रहा है कि मरे हुए पक्षियों का पोस्टमार्टम में इनकी मौत में कोई भी बीमारी सामने नहीं आई है। इनकी मौत बाहरी वातावरण में समायोजित न होने से बताई जा रही है। वहीं अधिकांश फीजेंट जिंदा है। ऐसे में बाकी परिंदों के जीवित रहने की बात वन विभाग के लिए उत्साहित करने वाली है।
खबरें और भी हैं...