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जस्टिस चौहान बने हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश,अब तक 41,600 मामलों में सुना चुके हैं फैसला

एक वर्ष पहले
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_photocaption_जस्टिस तरलोक सिंह चौहान*photocaption*

शिमला| प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की सेवानिवत्ति के साथ ही न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान प्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश बन गए हैं। वे 23 फरवरी 2014 को हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के बाद 30 नवंबर 2014 को स्थाई न्यायाधीश बनाए गए। उन्होंने अब तक 41,600 मामलों का निपटारा किया है, जिनमें कई अहम व ऐतिहासिक निर्णय भी शामिल हैं। 9 जनवरी 1964 को रोहड़ू में जन्मे न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी हुई। इस दौरान स्कूल के कैप्टन भी रहे। डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ से ऑनर्स के साथ स्नातक, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद वर्ष 1989 में वकील बने व लाला छबील दास वरिष्ठ अधिवक्ता के प्रख्यात चैंबर में शामिल हुए। प्रदेश हाईकोर्ट में वकालत शुरू करते हुए कानून की सभी क्षेत्रों में महारत हासिल की। राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड व राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अलावा कई बोर्डों, निगमों, वित्तीय संस्थानों, सार्वजनिक और निजी कंपनियों, शैक्षिक संस्थानों और सहकारी समितियों व विभिन्न विभागों के कानूनी सलाहकार रहे। विभिन्न लोक अदालतों के सदस्य बने। हाइडल प्रोजेक्ट्स, रोपवे, पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन, प्लास्टिक और तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध, सॉलिड वेस्ट प्रबंधन परियोजनाओं के कार्यान्वयन और हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण नीति के निर्धारण से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों में सहयोग के लिए हाईकोर्ट द्वारा कोर्ट मित्र नियुक्त किए गए। 23 फरवरी 2014 को वह हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के बाद 30 नवंबर 2014 को हाई कोर्ट के स्थाई न्यायाधीश बनाए गए और आजतक के कार्यकाल के दौरान इन्होंने 41,600 मामलों का निपटारा कर दिया, जिनमें कई अहम व ऐतिहासिक निर्णय भी सुनाए गए।
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