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कई दशकों से सतलुज किनारे तत्तापानी में माघ की संक्रांति पर बनती रही खिचड़ी, लेकिन इस बार इस तरह से बनी 1995 किलो रिकॉर्ड खिचड़ी

Shimla News - रश्मिराज भारद्वाज/ सतनाम गिल| तत्तापानी तत्तापानी पर कई दशकों से हजारों लोग माघ की संक्रांत के दिन दान और स्नान...

Jan 15, 2020, 07:25 AM IST
रश्मिराज भारद्वाज/ सतनाम गिल| तत्तापानी

तत्तापानी पर कई दशकों से हजारों लोग माघ की संक्रांत के दिन दान और स्नान करने पहुंच रहे हैं। लेकिन इस मंगलवार यहां पहुंचे लोगों को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हो चुकी खिचड़ी चखने का भी मौका मिला। पर्यटन विभाग द्वारा इस बार की मकर संक्रांति के रोज एक बड़े बर्तन में खिचड़ी बनाने का इंतजाम किया गया था। कई हफ्तों से तैयारियां चल रही थी। हर बार यहां खिचड़ी का सामान देने वाले दुर्गा देवी बिहारी लाल ट्रस्ट को जब पर्यटन विभाग की इस बार की खिचड़ी के आयोजन को इतने बड़े पैमाने पर बनाने का प्लान पता चला तो ट्रस्ट हर बार की तरह इस बार भी खिचड़ी बनाने का सारा सामान देने को तैयार हो गया। पर्यटन विभाग ने आयोजन को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया गया। खिचड़ी बनाने से पहले ही 405 किलो चायल, 190 किलो दाल, 90 किलो घी, किलो मसाले पहुंचा दिए गए था। खिचड़ी बनाने के लिए पर्यटन निगम की टीम सोमवार शाम ही यहां पहुंच गई थी। मंगलवार सुबह तीन बजे सबसे पहले भट्टी काे जलाया गया। क्रैन की मदद से पतीला अाग पर रखा गया। फिर 3 बजकर 25 मिनट पर घी डालने के बाद खिचड़ी बनाने का काम शुरू हुआ। साढ़े अाठ बजे तक खिचड़ी बनकर तैयार थी। लेकिन इसे दस बजे तक आग पर ही रहने दिया गया। हालांकि लकड़ियां हटाई जा चुकी थी। साढ़े दस बजे वजन किया तो पता चला कि तत्तापानी में बनी खिचड़ी एक ही बर्तन में तैयार होने का रिकार्ड गिनीज बुक में शामिल हो चुका है। इसके अलावा यहां पर वाटर स्पोट्रर्स की गतिविधियां भी शुरू की गई।

हर बार यहां खिचड़ी का सामान देने वाले दुर्गा देवी बिहारी लाल ट्रस्ट को जब इस आयोजन का पता चला तो ट्रस्ट ने खिचड़ी बनाने का सारा सामान देने को तैयार हो गए

तत्तपानी में मकर संक्रांति के लिए खिचड़ी बनाने के लिए सुबह 3 बजे तैयार हुई शैफ की टीम।

तत्तपानी में बनाई गई खिचड़ी के पतीले को बड़ी क्रेन के सहारे उठा कर भट्‌टी से नीचे उतारा गया। जिसके बाद खिचड़ी परोसी गई।

खिचड़ी बनाने के लिए तैयार पतीले के साइज के हिसाब से तैयार की गई भट्टी। जिसमें सुबह तीन बजे लकड़ियां डालने का काम शुरू किया गया। खिचड़ी को तैयार करने में करीब पांच घटे का समय लग गया। जिसके बाद वहां पर मौजूद लोगों ने खिचड़ी को चखा।

शिमला के तत्तापानी में मकर संक्रांति पर जगाधरी से लाए गए इस बड़े पतीले में 1995 किलाे खिचड़ी तैयार की गई। इसे तैयार करने में 25 शैफ को पांच घटे का समय लग गया। जिसके बाद यहां पर श्रद्धालुओं ने इस खिचड़ी को खाया।

कुछ इस तरह पक्की खिचड़ी









लड़कियांे को आग लगाने के बाद भट्‌टी पर पतीला चढ़ाया गया। जिसके बाद पर्यटन विभाग के शैफ खिचड़ी तैयार करने में जुट गए।

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