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आनी में लगे हैं कूड़े के ढेर,स्वच्छता अभियान यहां कागजों में ही सीमित

कुल्लू जिला के उपमण्डल मुख्यालय आनी में प्रशासनिक अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते...

Danik Bhaskar | May 03, 2018, 02:00 AM IST
कुल्लू जिला के उपमण्डल मुख्यालय आनी में प्रशासनिक अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ चुकी हैं। प्रशासन द्वारा पिछले दो सालों से गाहे बगाहे बनाई गयी स्वच्छता कमेटी की ट्रैक्टर योजना का भी दम निकल चुका है। फलस्वरूप आनी कस्बा एक बार फिर गंदगी के ढेर में तब्दील होने की कगार पर पहुंच चुका है। लोगों को अपने घरों के कूड़े को यहां वहां या नदी के किनारे फेंकना पड़ रहा है। वहीं देशभर में सम्पूर्ण स्वच्छ घोषित जिला कुल्लू को भी गन्दगी का कलंक लग गया है।

बखनाओं पंचायत के मिशन कॉलोनी में मरी गाय: पंचायत प्रतिनिधियों और खण्ड विकास अधिकारी की उदासीनता के चलते बीते 4 दिनों से आनी कस्बे के बखनाओं पंचायत के अंतर्गत आने वाली मिशन कॉलोनी मे देवरी खड्ड के किनारे मरी गाय को सूचित करने के बावजूद हटाया नहीं गया। जिसके चलते मिशन कॉलोनी के अलावा साथ लगते आनी पंचायत के स्कूल रोड में बदबू का आलम बना हुआ है। साथ ही मृत गाय को कुत्तों और कौवो ने नोंचना शुरू कर दिया है। जिसके कारण बीमारियों के फैलने का अंदेशा भी बना हुआ है। लेकिन लोगों के पिछले 4 दिनों से पंचायत प्रधान और मंगलवार को खण्ड विकास अधिकारी आनी को सूचित करने के बावजूद भी किसी के कान पर जूं तक न रेंगी। किया। बल्कि बखनाओं पंचायत प्रधान के बाद खण्ड विकास अधिकारी आनी ने पंचायत प्रधान से बात करने का आश्वासन देने के बजाए स्वंसेवियों को आगे आने की नसीहत दे डाली। जिससे कि स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन पर भी सवालिया निशान लग गए हैं।

खड्ड के किनारे मृत पड़ी गाय और खड्ड के किनारे लगते कूड़े के ढेर।




स्वच्छता कमेटी का भी निकला दम, चारों तरफ गंदगी

आनी, कराना,बखनाओं,कुंगश और नमहोंग पांचायतों से घिरे आनी कस्बे को स्वच्छ रखने को लेकर एसडीएम आनी, बीडीओ आनी ने पंचायत प्रतिनिधियों,व्यापार मंडल, युवक मण्डल और कस्बे वासियों के साथ मिलकर एक कूड़ा एकत्रीकरण योजना की शुरुआत की थी। जिसके तहत घरों और दुकानों से 50-100 रुपयों का शुल्क एकत्र किया जाना था। जो व्यापार मंडल से किया भी गया,लेकिन घरों से कभी हुआ नही। यह योजना पिछले करीब डेढ़ साल से घिसटती, पिटती चल तो रही थी, लेकिन कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। जबकि बैठकों में बकायदा जगह चिन्हित कर कूड़ा करकट ठिकाने लगाने को लेकर एक डंपिंग यार्ड बनाने की बातें भी हुई। लेकिन अधिकारियों के तबादलों और उदासीनता के चलते योजना ठप्प हो गयी। जबकि वर्तमान में लोगों के घरों दुकानों का कूड़ा करकट एक बार फिर से नदी नालों के किनारे इकट्ठा होना शुरू हो गया। लोगों का कहना है कि योजना बना तो दी जाती है लेकिन इसे गम्भीरता से लागू नहीं किया जाता।