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बोर करने गई मशीनें बैरंग लौटी, 320 फीट पर भी नहीं निकला पानी, आखिर खच्चरों से ही ढोना पड़ेगा

श्यामलाल पुंडीर | पांवटा साहिब आंज-भौज क्षेत्र की शिवा पंचायत का दुर्गम गांव रूदाणा के ग्रामीणों का किस्मत भी...

Dainik Bhaskar

May 09, 2018, 02:00 AM IST
बोर करने गई मशीनें बैरंग लौटी, 320 फीट पर भी नहीं निकला पानी, आखिर खच्चरों से ही ढोना पड़ेगा
श्यामलाल पुंडीर | पांवटा साहिब

आंज-भौज क्षेत्र की शिवा पंचायत का दुर्गम गांव रूदाणा के ग्रामीणों का किस्मत भी साथ नहीं दे रही है। उनकी पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए आईपीएच विभाग ने प्रयास किए। मगर कामयाबी नहीं मिली।

गत दिनों ग्रामीणों ने जब बोर मशीन गांव की ओर आते देखी, तो खुशी से फूले नहीं समाए, मगर जब दो दिन तक दो स्थानों पर बोर के बाद भी पानी नहीं निकला, तो ग्रामीणों के चेहरों पर वहीं मायूसी छा गई।

गौरतलब है कि रूदाणा का गांव आज से नहीं पिछले 10 साल से भी अधिक समय से गर्मियों में पानी की समस्या से जूझता है। आज एक उम्मीद की किरण भू-जल था, वह भी नहीं निकला। गौरतलब है कि ग्रामीणों का गांव के पास पाब से जलस्त्रोत से पानी आता है। मगर गर्मीयों में अप्रैल, मई व जून महीने में पानी सूख जाता है। जिस कारण पानी के लिए गांव में हाहाकार मच जाता है। रूदाणा गांव में पेयजल स्रोत सूख जाने के कारण पानी के लिए हाहाकार मचा है।

लोग रात को तीन बजे तक पानी भरने के लिए कतारों में लगे रहते हैं। गर्मियों में रूदाणा गांव के करीब 40 परिवार बूंद-बूंद पानी को तरस जाते हैं। पिछले साल भी गांव पेयजल पहुंचाने के लिए खच्चरें लगाई गई थीं, जिससे पानी ढोकर गांव तक पहुंचाया जाता था। हालांकि इस बार गांव में सड़क पहुंच गई है। अब वहां अधिकारी भी पहुंचने शुरू हो गए हैं और मशीने भी गई थी। मगर सफलता नहीं मिली। इसके बाद पांवटा बीडीसी के चेयरमैन रमेश तोमर व आईपीएच विभाग के अधिकारियों मशीनों को लेकर गांव में पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी किस्मत में भू-जल नहीं है। गर्मियों में हर साल की तरह इस साल भ खच्चरों से दूर से पानी ढोया जा रहा है। हालांकि आईपीएच विभाग खच्चरों से पानी का खर्च उठाता है। मगर अपने गांव में पानी नहीं निकलने से लोग मायूस हैं। मगर पानी नहीं निकला।

10 साल से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं रूदाणा के ग्रामीण, विभाग के समस्या से निजात दिलवाने का प्रयास असफल

बोरवैल मशीनें भेजी थी नहीं निकला पानी | इस बोर में पांवटा आईपीएच विभाग के एक्सईएन अश्वनी कुमार धीमान ने बताया कि किल्लत को दूर करने के लिए गांव में बोरवैल लगाने के लिए मशीनें गई थी। मगर पानी नहीं निकला। फिलहाल खच्चरों से ही पानी ढोकर गांव तक पहुंचाया जा रहा है।

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बोर करने गई मशीनें बैरंग लौटी, 320 फीट पर भी नहीं निकला पानी, आखिर खच्चरों से ही ढोना पड़ेगा
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