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काम पर नहीं लौटे 72 कर्मचारी, कोर्ट ने दिया दो दिन का समय, 376 लौटे, कूड़ा भी उठा

शिमला | शहर में घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए सैहब सोसायटी के तहत रखे गए 72 कर्मचारी हड़ताल से वापस नहीं लौटे हैं।...

Dainik Bhaskar

May 09, 2018, 02:05 AM IST
शिमला | शहर में घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए सैहब सोसायटी के तहत रखे गए 72 कर्मचारी हड़ताल से वापस नहीं लौटे हैं। हाईकोर्ट ने सैहब सोसाइटी के 72 हड़ताली कर्मियों को दो दिनों के अंदर काम पर लौटने के आदेश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने अपने आदेशों में यह स्पष्ट किया था कि अगर सैहब सोसायटी का कोई भी कर्मी कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करता है तो उसके खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाएगा। जिलाधीश शिमला, पुलिस अधीक्षक शिमला व नगर आयुक्त शिमला को कोर्ट के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए थे। ३७६ कर्मचारी काम पर लौट गए, लेकिन 72 नहीं लौटे। सैहब में कुल 448 कर्मचारी है।

मेन लाइन की या पाइप घटिया या जानबूझकर की जा रही पंचर, जिससे हो रहा पानी बर्बाद

शिमला | हाईकोर्ट ने प्राकृतिक स्रोतों व शिमला के लिए पानी की मेन पाइप लाइन से पानी चुराने के मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए मामले पर सुनवाई 17 मई को निर्धारित की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने उक्त मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि या तो मेन पाइप से पानी की लीकेज का कारण घटिया मरम्मत हो सकती है और या जानबूझकर इन पाइपों को पंक्चर कर के पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा है । जिस कारण की भारी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है । हाईकोर्ट के समक्ष आए मामले में आरोप लगाया गया है शुहवाल, बल्देयां , संयाणा, काल्टी व क्रेग्ननो में कुछ निजी लोग प्राकृतिक स्रोतों से टुल्लू पंप की सहायता से पानी निकालते हैं और यह पानी अपने टैंक में भरने के बाद होटलो या अन्य व्यवसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। न्यायालय ने टिप्पणी की कि सक्षम अधिकारियों के ध्यान में लाने के बाद भी इस मामले में कोई भी एक्शन नहीं लिया गया है जो कि खेद का विषय है। पानी को इकट्ठा करने का कार्य निजी लोगों द्वारा अपने इस्तेमाल के लिए किया जा रहा है जिसकी कानून स्वीकृति प्रदान नहीं करता है । न्यायालय ने उक्त मामले में राज्य सरकार को हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखने के आदेश जारी किए हैं। मंगलवार को उक्त मामले में मुख्य अभियंता जन स्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग को कोर्ट के समक्ष तलब किया था । जिन्होंने न्यायालय को बताया कि यह मामला उनके क्षेत्राधिकार में नहीं पड़ता है। यह मामला नगर निगम की रेख देख में है ।इसलिए न्यायालय ने नगर निगम शिमला को प्रतिवादी बनाते हुए आदेश दिए कि वह 1 सप्ताह के भीतर अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखें ।

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