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केंद्र की सलाहकार कंपनी जयराम सरकार को नहीं पसंद

जयराम सरकार को केंद्र सरकार की एचसीसी कंपनी पसंद नहीं आई। कैबिनेट की बैठक में नाहन मेडिकल काॅलेज का भवन बनाने का...

Dainik Bhaskar

May 09, 2018, 02:05 AM IST
जयराम सरकार को केंद्र सरकार की एचसीसी कंपनी पसंद नहीं आई। कैबिनेट की बैठक में नाहन मेडिकल काॅलेज का भवन बनाने का एमआेयू रद्द करने का फैसला लिया है। तीन साल से पहले ही इस काॅलेज को अपने भवन का इंतजार है। अब भवन बनाने के लिए सलाहकार कंपनी एचसीसी को बदलने से निर्माण में आेर देरी होने की आशंका है। सूत्र बताते हैं कि शुरू में मुख्यमंत्री भी इस एमआेयू के रद्द न करने के हक में थे।

कैबिनेट के सदस्य भी इसका विरोध कर रहे थे। राज्य सरकार के अधिकारी तो पहले से ही इसके पक्ष में नहीं थे। इसके बाद कैबिनेट से अन्य सदस्यों ने जब इसके लिए दवाब बनाया तो इसे पास कर दिया। इस भवन को बनाने का काम अब राज्य सरकार ने सीपीडब्लयू के माध्यम से करवाने का फैसला लिया है। इस मसले पर कैबिनेट में काफी समय तक चर्चा होती रही। मंत्रियों ने यहां तक कहां कि इसे रद्द कर दूसरी एजेंसी को देने से कालेज भवन में आेर देरी होगी। भवन निर्माण में होने वाली देरी का असर एमसीआई से मिलने वाली मंजूरी पर भी पड़ सकता है। इस कंपनी के साथ राज्य सरकार का नाहन मेडिकल कालेज ही नहीं बल्कि हमीरपुर आैर चंबा के मेडिकल कालेज को बनाने के लिए भी एमआेयू हो चुका है। पूर्व सरकार के समय में तीनों ही कालेजों को लेकर एमआेयू हुआ था, इसे पूर्व सरकार के समय में भी रद्द करने की तैयारी शुरू की थी, लेकिन मेडिकल कालेज की मान्यता के खतरे को भांपते हुए निर्णय सिरे नहीं चढ़ सका था। अब सरकार ने इस पर फैसला ले लिया है।

टांडा मेडिकल काॅलेज में हिमाचल भुगत चुका है खामियाजा | पूर्व सरकार के समय में टांडा मेडिकल कालेज के ब्लाक बनाने के लिए एचसीसी के किए करार रद्द किए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री इसे पीडब्लयूडी के माध्यम से करवाना चाहते थे, इसलिए काम एचसीसी से लेकर राज्य लोक निर्माण विभाग को दिया था। केंद्र ने इसे देखते हुए टांडा मेडिकल कालेज के ब्लाकों के लिए स्वीकृत राशि पर भी रोक लगा दी थी। अब सरकार फिर से एचसीसी से करार को रद्द कर अन्य एजेंसियों को काम देने की तैयारी में है।

‘प्राकृतिक खेती योजना’ के लिए 25 करोड़ का बजट | किसानों की आय को दोगुना करने के लिए राज्य सरकार नई योजना लेकर आई है। शून्य लागत प्राकृतिक कृषि के माध्यम से किसानों की खेतों से आय बढ़ाने और कृषि लागत कम करने के लिए प्रदेश में ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान’ योजना शुरू करने जा रही है। मंगलवार को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल ने इसे अपनी मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना से प्राकृतिक कृषि को नई दिशा मिलेगी और किसानों द्वारा खेतों में रासायनिक खादों के उपयोग में कमी आएगी। प्रदेश के विश्वविद्यालयों द्वारा इस योजना के कार्यान्वयन के लिए पैकेज ऑफ प्रेक्टिसिज तैयार करेंगे।

देसी गाय की खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी | योजना के तहत सरकार देसी गाय की खरीद पर 50 फीसदी की सब्सिडी देगी। गांव में इसके लिए दुकानें खोली जाएगी। यहां पर जीवामृत और जीरो बजट खेती के लिए अन्य सामान सरकार मुहैया करवाएगी। हर प्रोडक्ट पर सब्सिडी दी जाएगी। दुकान खोलने के लिए भी सरकार 50 हजार तक की सब्सिडी मुहैया करवाएगी। सरकार इस के लिए सामूहिक कार्यकर्ता नियुक्त करेगी। इन्हें 15 हजार मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा क्लस्टर लेवल पर क्लस्टर इंचार्ज नियुक्त किए जाएंगे। इन्हें 21 हजार मानदेय दिया जाएगा।

21 हजार हेक्टेयर भूमि पर शुरू होगी जीरो बजट खेती| राज्य सरकार प्रदेश के 12 जिलों में जीरो बजट खेती की योजना को शुरू करने जा रहा है। 7 जिलों में इस योजना को कृषि विभाग के माध्यम से शुरू किया जाएगा। जबकि 5 जिलों में बागवानी विभाग के तहत यह योजना चलेगी। कृषि, बागवानी और पशुपालन विभाग तीनों संयुक्त रूप से इस योजना को शुरू करेंगे। पहले साल 21 हजार हेक्टेयर भूमि पर यह खेती शुरू की जाएगी। 21 हजार हेक्टेयर इस भूमि पर पहले से ऑर्गेनिक खेती की जा रही है। उसे ही जीरो बजट खेती में कनवर्ट किया जाएगा। 120 क्लस्टर बने हुए हैं उसे जीरो बजट में कनवर्ट किया जाएगा। 5 साल में पूरे प्रदेश में इस तरह से खेती करवाने का लक्ष्य रखा गया है।

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