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पॉक्सो केसों की जांच के लिए बनेगा स्पेशल बल

प्रदेश में पॉक्सो केसों के लिए स्पेशल बल बनाया जाएगा। यह बल विशेष रूप से पॉक्सो के केसों की जांच ही करेगा। पॉक्सो...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 02:05 AM IST

प्रदेश में पॉक्सो केसों के लिए स्पेशल बल बनाया जाएगा। यह बल विशेष रूप से पॉक्सो के केसों की जांच ही करेगा। पॉक्सो एक्ट 2012 में संशोधन के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से सभी राज्यों के पुलिस प्रमुखों को विशेष बल गठित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अब प्रदेश में भी पॉक्सो मामलों की जांच के लिए विशेष बल गठित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पॉक्सो अधिनियम में रेप मामले की जांच के लिए दो माह की समय अवधि तय की है। इसी के मद्देनजर ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष बल का गठन जरूरी किया गया है, ताकि तय अवधि के भीतर केस की जांच पूरी हो सके। विशेष बात यह है कि पॉक्सो की जांच में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा सकेगी। जो बल गठित होगा, उसमें शामिल सदस्यों को केस प्राथमिकता से लेकर अंजाम तक पहुंचाना होगा।

अभी थाना स्तर पर होती है केसों की जांच

अभी पॉक्सो के केसों की जांच थाना स्तर पर ही होती है। पुलिस थानों के तहत चोरी, हत्या समेत अन्य तरह केसों की पहले ही भरमार रहती है। थाना स्तर पर मामलों की जांच के लिए आईओ की भी कमी रहती है, ऐसे में स्पेशल टीम से पॉक्सो मामलों की जांच करने में आसानी होगी। हालांकि, पॉक्सो अधिनियम में छेड़छाड़ या रेप केस की शिकायत के बाद मामले थानों में ही दर्ज होंगे। स्पेशल बल केवल मामलों की जांच करेगा। स्पेशल बल डीजीपी की निगरानी में होगा। डीजीपी भी समय-समय पर मामलों की जांच की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे।

अभी तक थाना स्तर पर होती है केसों की जांच, अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार गठित होगा विशेष बल

बढ़ रहे बच्चियों से छेड़छाड़ और के मामले

प्रदेश में बच्चियों के साथ छेड़छाड़ और रेप के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसी साल कांगड़ा जिले में तीन माह के दौरान पॉक्सो एक्ट के तीन मामले सामने आए थे। इनमें एक गैंगरेप भी है। हालांकि, पुलिस ने इन केसों को सॉल्व कर लिया है। लेकिन छेड़छाड़ के कई केस लंबित हैं। पिछले साल कोटखाई में दरिंदगी की शिकार हुई गुड़िया भी नाबालिग ही थी। अप्रैल माह में ही सीबीआई ने आठ माह की तफ्तीश करने के बाद इस केस को सॉल्व किया और आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाया। रेप के अलावा छेड़छाड़ के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। अकेले शिक्षा विभाग में भी पॉक्सो केसों के तीन सौ मामले सामने आए हैं, जिनकी इन्क्वायरी चल रही है।

यह है पॉक्सो एक्ट|पॉक्सो यानि प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 बच्चों के खिलाफ बढ़े रहे यौन मामलों की संख्या को लेकर लाया गया था। यह कानून बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है। इस कानून के माध्यम से नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरासमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है

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