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एसएफआई के सुझाव, सेमेस्टर प्रणाली को वार्षिक प्रणाली में बदला जाए

एसएफआई राज्य कमेटी की ओर से प्रदेश सरकार को रूसा पर कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए और सरकार से मांग की गई है कि या तो इन...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 02:05 AM IST

एसएफआई राज्य कमेटी की ओर से प्रदेश सरकार को रूसा पर कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए और सरकार से मांग की गई है कि या तो इन सुझावों को माना जाए। एसएफआई के राज्य अध्यक्ष विक्रम कायथ का कहना है कि सेमेस्टर प्रणाली को बदल कर वार्षिक प्रणाली में तब्दील किया जाए।

प्रदेश की भोगौलिक स्थिति के आधार पर हिमाचल प्रदेश जहां कई जगह पर साल के 4-4 महीने बर्फ रहती है, वहां सेमेस्टर प्रणाली को उचित ढंग से लागू नहीं किया जा सकता है। 90 लैक्चर का जो लक्ष्य रखा गया है, उसे पूरा किया जा सकता है। इसलिए सेमेस्टर प्रणाली को हटा कर वार्षिक प्रणाली को लागू किया जाए। उनका कहना है कि प्रदेश के कॉलेजो में क्रेडिट प्रणाली को लागू कर कोर्सेज को कई केटेगरी में बांटा गया है। छात्रों को क्रेडिट के आधार अवाॅर्ड मिलना तय किया गया, लेकिन पिछले 5 सालों में पूरे प्रदेश में किसी को भी डिप्लोमा या सर्टिफिकेट नही मिला है अतः क्रेडिट प्रणाली को शीघ्र बंद किया जाए।

ये भी की गई मांग

टीचिंग हॉर्स एक दिन में पांच घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए |एसएफआई ने मांग की है कि टीचिंग हॉर्स एक दिन में पांच घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए। छात्रों के परीक्षा फॉर्म कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से भरवाए जाएं। रूसा के तहत परीक्षा फॉर्म छात्र खुद प्राइवेट साइबर कैफे में भरवाता, जिस कारण उसमें अनेक गलतियां रह जाती हैं और जिसे ठीक करने में विश्वविद्यालय फिर से 600 रुपए फीस लेता है। इसलिए परीक्षा फ़ॉर्म कॉलेज में ही एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा भरवाया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि रूसा के तहत सिलेबस में बदलाव की आवश्यक्ता है और शिक्षा को रोजगार के साथ जोड़ने की जरूरत है। सिलेबस में हिमाचल प्रदेश की संस्कृति, आर्थिक, सामाजिक स्थिति को पढ़ाने की आवश्यकता है।

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