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धारा-144 लगी: सीमेंट की ढुलाई होगी पुलिस सुरक्षा में, खर्चा ट्राला यूनियन देगी

श्यामलाल पुंडीर | पांवटा साहिब आखिरकार शिमला उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सिरमौर पुलिस व प्रशासन ने सिरमौर...

Danik Bhaskar | May 11, 2018, 02:05 AM IST
श्यामलाल पुंडीर | पांवटा साहिब

आखिरकार शिमला उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सिरमौर पुलिस व प्रशासन ने सिरमौर ट्राला यूनियन पांवटा साहिब के ट्रालों को सीसीआई से सीमेंट ढुलाई के लिए सुरक्षा दे दी है। वीरवार को ट्राला यूनियन के करीब 12 ट्राले सीमेंट ढुलाई के लिए सुबह 7 बजे ही फैक्टरी में पहुंच गए। अब यह ट्राले पुलिस सुरक्षा में यहां से रवाना होंगे। प्रशासन ने दोनों यूनियन के बीच टकराव टालने के लिए राजबन सीमेंट फैक्टरी के 500 मीटर दायरे में धारा-144 लागू कर दी। डीसी सिरमौर ने 9 मई को ही यह आदेश जारी कर दिए थे। जिस कारण ट्रक यूनियन के लोग सीसीआई परिसर में नहीं आ सके। अब सीमेंट की ढुलाई का काम पुलिस सुरक्षा में होगा।

5 अप्रैल से पुलिस व प्रशासन से सुरक्षा देने की कर रहे थे मांग

हालांकि, पुलिस सुरक्षा की मांग करने वाली ट्राला यूनियन को पुलिस सुरक्षा का खर्चा उठाना होगा। वीरवार को सुबह 6 बजे से फैक्टरी परिसर में कोलर से बटालियन के जवान व आसपास की पुलिस चौकी व थानों से करीब 80 जवान परिसर में अंदर बाहर तैनात हो गए थे। अब ट्राले भरने के बाद भी पुलिस पहरे में ही यहां से गंतव्यों स्थानों की ओर रवाना होंगे।

गौरतलब है कि ट्राला यूनियन पिछले 5 अप्रैल से ही पुलिस व प्रशासन के आगे ट्रालों को सुरक्षा देने की मांग कर रही थी, मगर नहीं दी गई। पुलिस व प्रशासन नेताओं, सिरमौर ट्रक कोओपरेटिव सोसाइटी व ट्रक यूनियन के दबाव में एक महीने तक बैठकें कर दोनों यूनियनों के बीच टकराव टालने का प्रयास करती रही। मगर ट्राला यूनियन के अध्यक्ष सरदार प्रदीप सिंह ने शिमला उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद ही वीरवार को सीसीआई फैक्टरी ने माल ढुलाई के लिए ट्राला यूनियन के आगे ट्रालों की मांग रखी।


पांवटा साहिब. सीसीआई में तैनात पुलिस

5 अप्रैल से माल ढुलाई का काम ट्राला सोसाइटी को दिया | पांवटा साहिब-सतौन मार्ग पर राजबन में सीसीआई की सीमेंट फैक्टरी है। इस फैक्टरी से सीमेंट की ढुलाई सिरमौर ट्रक कोऑपरेटिव सोसाइटी करती थी। मगर इस बार 5 अप्रैल से तीन महीने के लिए माल ढुलाई का काम सिरमौर ट्राला सोसाइटी को दिया गया। क्योंकि इस सोसाइटी ने प्रति टन ढुलाई का रेट सोसाइटी से कम भरा था। जिस कारण ढुलाई का टेंडर ट्राला यूनियन के नाम पर छुटा। इसके बाद कोऑपरेटिव सोसाइटी को सीमेंट ढुलाई का काम नहीं मिलने से ट्रक यूनियन के कई ट्रकों का काम कम हो गया। जिस कारण यह विवाद पैदा हो गया। ट्राला यूनियन ने टेंडर मिलने के बाद 17 अप्रैल को सीसीआई से ट्राले माल ढुलाई के लिए ट्राले पहुंचे। इसका सिरमौर ट्रक ऑपरेटर सोसाइटी ने विरोध किया।

यह है मामला

क्या कहते हैं दोनों यूनियन के अध्यक्ष | ट्राला यूनियन के अध्यक्ष प्रदीप सिंह का कहना है कि उनको अदालत का दरवाजा इसलिए खटखटाना पड़ा, क्योंकि पुलिस व प्रशासन पर उनको उम्मीद नहीं थी। दूसरी यूनियन बड़ी यूनियन है। इस कारण पुलिस व प्रशासन पीछे हट रहा था। केवल बैठकें होती रहीं। इससे ट्राला यूनियन को नुकसान हो रहा था। इस कारण न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। दूसरी ओर सिरमौर ट्रक आॅपेरटर यूनियन के अध्यक्ष बलजीत सिंह नागरा ने कहा कि सिरमौर ट्रक कोऑपरेटिव सोसायटी फैक्टरी से टेंडर लेती थी। ट्रक यूनियन के ट्रक माल ढुलाई करते थे। यूनियन के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों को अदालत के आदेशों का पालन करने के लिए कह दिया है। क्योंकि ट्रक यूनियन भी अदालत से न्याय की मांग कर रही हैं। ट्रक यूनियन में भी 1000 ट्रक है। इसलिए काम तो इनको भी चाहिए।

श्यामलाल पुंडीर | पांवटा साहिब

आखिरकार शिमला उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सिरमौर पुलिस व प्रशासन ने सिरमौर ट्राला यूनियन पांवटा साहिब के ट्रालों को सीसीआई से सीमेंट ढुलाई के लिए सुरक्षा दे दी है। वीरवार को ट्राला यूनियन के करीब 12 ट्राले सीमेंट ढुलाई के लिए सुबह 7 बजे ही फैक्टरी में पहुंच गए। अब यह ट्राले पुलिस सुरक्षा में यहां से रवाना होंगे। प्रशासन ने दोनों यूनियन के बीच टकराव टालने के लिए राजबन सीमेंट फैक्टरी के 500 मीटर दायरे में धारा-144 लागू कर दी। डीसी सिरमौर ने 9 मई को ही यह आदेश जारी कर दिए थे। जिस कारण ट्रक यूनियन के लोग सीसीआई परिसर में नहीं आ सके। अब सीमेंट की ढुलाई का काम पुलिस सुरक्षा में होगा।

5 अप्रैल से पुलिस व प्रशासन से सुरक्षा देने की कर रहे थे मांग

हालांकि, पुलिस सुरक्षा की मांग करने वाली ट्राला यूनियन को पुलिस सुरक्षा का खर्चा उठाना होगा। वीरवार को सुबह 6 बजे से फैक्टरी परिसर में कोलर से बटालियन के जवान व आसपास की पुलिस चौकी व थानों से करीब 80 जवान परिसर में अंदर बाहर तैनात हो गए थे। अब ट्राले भरने के बाद भी पुलिस पहरे में ही यहां से गंतव्यों स्थानों की ओर रवाना होंगे।

गौरतलब है कि ट्राला यूनियन पिछले 5 अप्रैल से ही पुलिस व प्रशासन के आगे ट्रालों को सुरक्षा देने की मांग कर रही थी, मगर नहीं दी गई। पुलिस व प्रशासन नेताओं, सिरमौर ट्रक कोओपरेटिव सोसाइटी व ट्रक यूनियन के दबाव में एक महीने तक बैठकें कर दोनों यूनियनों के बीच टकराव टालने का प्रयास करती रही। मगर ट्राला यूनियन के अध्यक्ष सरदार प्रदीप सिंह ने शिमला उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद ही वीरवार को सीसीआई फैक्टरी ने माल ढुलाई के लिए ट्राला यूनियन के आगे ट्रालों की मांग रखी।

ट्रक व ट्राला सोसायटी में इसी कारण बढ़ा विवाद | इसके बाद दोनों यूनियनों के लोग वहां पर पहुंच गए। सिरमौर ट्रक ऑपरेटर सोसाइटी के पक्ष में सिरमौर ट्रक ऑपरेटर यूनियन भी पहुंच गई। इस कारण दोनों पक्षों के बीच टकराव हो गया। इस दौरान सीसीआई में तोड़फोड़ भी हुई। इसके बाद 18 अप्रैल को दोनों पक्षों की प्रशासन बैठक बुलाई। मगर इस बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका। इसके बाद फिर 21 अप्रैल को भाजपा विधायक सुखराम चौधरी, एसडीएम लायक राम वर्मा व डीएसपी प्रमोद चौहान के अलावा दोनों पक्षों को बुलाया गया। मगर कोई सहमति नहीं बनी और एसडीएम कार्यालय में हुई यह बैठक भी बेनतीजा रही। क्योंकि ट्राला यूनियन ने माल ढुलाई का रेट टेंडर में कम भरा था, इसलिए काम ट्राला यूनियन को मिला। जिस कारण दूसरी यूनियनें परेशान है।

विवाद बढ़ता देख

सीसीआई में पुलिस

बल किया तैनात

माल ढुलाई विवाद को देखते हुए प्रशासन ने भारी संख्या में सीसीआई में पुलिस बल तैनात कर दिया है। हालांकि, इसके बाद ट्राला यूनियन के करीब 5 ट्राले कुछ समय बाद पुलिस सुरक्षा में गए थे, मगर ट्राला यूनियन ने अदालत का दरवाजा खटखटा कर न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद अदालत का फैसला ट्राला यूनियन के पक्ष में आया और पुलिस व प्रशासन को सुरक्षा मुहैया करवानी पड़ी।