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कब्जों को नियमित करने की याचिका 15 साल से पेंडिंग, कोर्ट करे सुनवाई: सरकार

शिमला | हिमाचल सरकार ने सरकारी भूमि के कब्जाधारियों को न्यायालय से राहत दिलाने के लिए अब फिर से रास्ता तलाशना शुरू...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 13, 2018, 02:05 AM IST

शिमला | हिमाचल सरकार ने सरकारी भूमि के कब्जाधारियों को न्यायालय से राहत दिलाने के लिए अब फिर से रास्ता तलाशना शुरू कर दिया है। वीरभद्र सरकार ने पांच बीघा भूमि तक के कब्जाधारियों के लिए पाॅलिसी लाने की मंजूरी ली थी।

अब जयराम सरकार ने 15 साल पुरानी लंबित याचिका पर फैसला शीघ्र देने का आग्रह कोर्ट में करने की रणनीति तैयारी में है। राज्य सरकार में उच्च स्तरीय बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी है। विधि विभाग से मशविरे के बाद अब सरकार की आेर से कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई के लिए आग्रह किया जाना है। वर्ष 2002 में तत्कालीन धूमल सरकार के समय में सरकारी भूमि के अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए पाॅलिसी लाई थी।

इसमें लाखों लोगों ने अपने अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए आवेदन किया था। इस पाॅलिसी को उस समय ही जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी। इसे राज्य उच्च न्यायालय ने स्टे लगा दिया था। इस पर अभी तक आगे कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। शेष पेज 5 पर

10 हजार से ज्यादा है हिमाचल में कब्जाधारी

हिमाचल में वन भूमि पर 10 हजार से ज्यादा कब्जाधारी है। इनमें से पांच बीघा तक के कब्जाधारियों की संख्या काफी कम है। इन्हें तो फिलहाल सरकार की पालिसी बनाने के फैसले से राहत है, लेकिन बड़े कब्जाधारियों पर कार्रवाई की जा रही है। इन्हें राहत देने के लिए राजस्व आैर वन विभाग की आेर से संयुक्त तौर पर कोर्ट में पुराने मामले में फैसले की गुहार लगाने की तैयारी चल रही है।

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