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एंटी हेलगन खरीद मामले में जांच आगे बढ़ाने से कतरा रहे अधिकारी

शिमला | धूमल सरकार के समय सेब को ओलों से बचाने के लिए एंटी हेलगन खरीदी गई थी। ढाई करोड़ रुपए से अधिक की राशि की ये एंटी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 02:05 AM IST

शिमला | धूमल सरकार के समय सेब को ओलों से बचाने के लिए एंटी हेलगन खरीदी गई थी। ढाई करोड़ रुपए से अधिक की राशि की ये एंटी हेलगन देवरीघाट , कठासू समेत चार जगहों पर लगाई गई, मगर कुछ ही समय के अंदर एंटी हेलगन ने काम करना बंद कर दिया। हेलगन सही समय में चले, इसके लिए खड़ा पत्थर में राडार लगाया था, जो कुछ ही समय के भीतर जल गया था। इसी चलते ही ये एंटी हेलगन बेकार हो गई। पूर्व कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद एंटी हेलगन मामले में जांच बिठाई। तीन साल विजिलेंस ने प्रारंभिक तौर पर इन्क्वायरी की। इसमें खरीद मामले में अनियमितताएं पाई गई और जून 2017 में केस दर्ज कर लिया गया। विजिलेंस ने पूर्व मिशन डायरेक्टर के खिलाफ हेलगन खरीद मामले में केस दर्ज किया है। एफआईआर दर्ज करने के बाद करीब एक साल होने को है, अभी तक जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंची। अब प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार है। तो ऐसे में अधिकारी जांच आगे बढ़ाने से कतरा रहे हैं।

विजिलेंस जांच में पूर्व मिशन डायरेक्टर की लापरवाही सामने आई थी। हेलगन खरीद को लेकर विदेशी कंपनी के साथ हुए अनुबंध के मुताबिक कंपनी को एक साथ पूरी पेमेंट का भुगतान नहीं करना था। मिशन डायरेक्टर एंटी हेलगन खरीदने के बाद तुरंत पूरी पेमेंट कर दी। जबकि अनुबंध में प्रावधान था कि आधी पेमेंट मशीनें लगने और आधी पेमेंट इनके सही तरीके से काम करने के बाद कंपनी को देनी थी। हेलगन को लगे अभी कुछ ही समय हुआ था कि खड़ा पत्थर में राडार जल गया। पेमेंट पहले ही पूरी किए जाने का नुकसान यह रही थी कि राडार जलने के बाद कंपनी ने इसकी मरम्मत नहीं कराई। अगर पेमेंट आधी रोक ली होती तो कंपनी आसानी से राडार की मरम्मत या फिर उसे बदल देती।

राडार जलने से यह हुआ नुकसानराडार के बिना रह गई है। ओलों को ऊपर ही खत्म करने के लिए लगाई गई मशीनें राडार पर ही निर्भर करती है। राडार से पता चलता कि कब ओले बरसने वाले हैं, इससे मशीनें ऑटोमेटिक ही चलती है और गैस का गोला दागकर ओले खत्म करती हैं। मैनुअली तौर पर इन्हें चलाने से पता ही नहीं चलती कि कब ओले बरसेंगे। कई मशीनों से गैस पहले छोड़ी जाती है, ओला बाद में गिरता है। इससे बागवानों को खासा नुकसान उठना पड़ता है। इस बार भी क्षेत्र भर में ओलों से बागवानों को काफी नुकसान हुआ था।

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