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आंगनबाड़ी स्कूल में कितने बच्चे आए हैं, मोबाइल से फोटो खींचकर अपलोड होगी अटेंडेंस, रुकेगा फर्जीवाड़ा

आंगनबाड़ी स्कूल में कितने बच्चे उपस्थित हैं इसकी अब मोबाइल से फोटो खींचकर अटेंडेंस ऑनलाइन अपलोड होगी। बच्चों को...

Dainik Bhaskar

May 14, 2018, 02:05 AM IST
आंगनबाड़ी स्कूल में कितने बच्चे उपस्थित हैं इसकी अब मोबाइल से फोटो खींचकर अटेंडेंस ऑनलाइन अपलोड होगी। बच्चों को कितना न्यूट्रिशन मिला, बच्चों को आधार कार्ड के साथ जोड़ा या नहीं ये भी बताना होगा। आंगनबाड़ी केंद्र की सभी जानकारी मोबाइल एप पर उपलब्ध रहेगी, इसमें जीपीएस भी लगेगा, जिससे स्कूल की लोकेशन भी पता चलेगी कि कौन से आंगनबाड़ी केंद्र में वर्कर स्कूल में पहुंची है या नहीं। आंगनबाड़ी स्कूल में कितना राशन आया है, यह सभी जानकारी भी मोबाइल पर ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। मोबाइल एप्लिकेशन में खंड स्तर, जिला स्तर, राष्ट्रीय स्तर की सूचना पर डैश बोर्ड पर अांकड़ों सहित रहेगी। महिला बाल विकास विभाग की ओर से इसमें नजर रखी जाएगी। आने वाले दिनों में बच्चों व महिलाओं को जो सुविधाएं दी जानी है उसका अलर्ट भी मोबाइल पर आएगा। आंगनबाड़ी वर्कर को पता चलेगा कि किस बच्चे या महिला के घर उन्हें जाना है।

आंगनबाड़ी केंद्रों में ऑनलाइन मोबाइल सेवाओं के द्वारा सभी जानकारी रहेगी उपलब्ध, मोबाइल में होगा एप और जीपीएस

16 मास्टर ट्रेनर को दी जा चुकी है ट्रेनिंग

एप अभी चार जिलों शिमला, सोलन, चंबा, हमीरपुर में शुरू किया गया है। 16 मास्टर ट्रेनर को मार्च माह में ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इसके साथ ही इन्हें स्मार्ट फोन भी उपलब्ध कराए गए हैं। जिसमें काॅमन साॅफ्टवेयर डाउन लोड किया गया है। सभी आंगनबाड़ी केंद्र की जानकारी इसमें उपलब्ध रहेगी। इसमें हर जिला के चार मास्टर ट्रेनर सीडीपीओ और चार जिला के एक-एक डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर को ट्रेनिंग दी गई है। समकेतिक बाल विकास सेवाएं कार्यक्रम के तहत 29 प्रोजेक्ट में 263 सुपरवाइजर और टोटल 6281 आंगनबाड़ी केंद्र हैं जिनकी जानकारी मोबाइल एप पर उपलब्ध रहेगी। इसमें इन सभी आंगनबाड़ी केंद्र व वृत्त पर्यवेक्षकों को भी मोबाइल उपलब्ध करवाए जाएंगे। सभी मास्टर ट्रेनर को मोबाइल दिए गए हैं। मास्टर ट्रेनर पर्यवेक्षकों को ट्रेंड करेंगे। इसके बाद आंगनबाड़ी स्कूल की वर्कर को भी यह ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं विभाग द्वारा बच्चों को बौनेपन की समस्या से निजात दिलाना, जन्म के समय वजन कम होना, कुपोषण को कम करना, इसमें सुधार लाना है। 15 से 49 साल की महिलाओं की एनीमिया की कमी को भी दूर करना है।


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