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रूसा लागू कर केंद्र से बजट लिया, सुधार के नाम पर कुछ नहीं किया

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य सरकार की ओर से गठित कमेटी की...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 02:05 AM IST

राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य सरकार की ओर से गठित कमेटी की दूसरी बैठक बुधवार को उच्चतर शिक्षा निदेशालय में आयोजित हुई। कमेटी ने रूसा लागू होने के बाद क्या बदलाव किए हैं, ग्रांट को किस तरह खर्च किया गया है इस सारे मसले पर मंथन किया गया। कमेटी के कुछ सदस्यों ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने रूसा को लागू करने में जल्दबाजी की। इसे लागू कर केंद्र से ग्रांट हासिल कर ली, लेकिन जो बेसिक बदलाव करने चाहिए थे वह नहीं किए गए। जिसका खामियाजा राज्य के छात्रों को भुगतना पड़ा। यही वजह है कि इसे बदलाव की मांग उठ रही है। कमेटी का कहना है कि रूसा एक स्कीम है। इसे बंद करना संभव नहीं है लेकिन इसमें सुधार इस तरह करने होंगे ताकि केंद्र से मिलने वाली ग्रांट पर कोई असर न पड़े।

रूसा में सुधार के लिए गठित कमेटी की हुई दूसरी बैठक

कैसे हुई चूक: बिना इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किए लागू किया सेमेस्टर सिस्टम |पूर्व कांग्रेस सरकार के समय सेमेस्टर सिस्टम लागू करने के बाद सबसे पहले इसके लिए एचपीयू में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाना था। क्योंकि एक के बजाए दो बार पेपर होने थे। न तो रिजल्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की गई और न ही पेपर चैकिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया। जिसके चलते परीक्षा परिणाम घोषित करने में एक से डेढ़ साल तक की देरी हुई।

टीचर लगाए नहीं, सीबीसीएस कर दिया लागू | क्रेडिट बेस्ड च्वाइस सिस्टम यानि सीबीसीएस लागू कर कहा गया कि कॉलेज में छात्र अपनी पसंद का विषय पढ़ सकेंगे। लेकिन इसके लिए टीचर अप्वाइंट ही नहीं किए। कॉलेजों में टीचरों की पहले से कमी थी। नए खुले 41 कॉलेजों में सिर्फ 5 ही विषय थे। सीबीसीएस के नाम पर केंद्र से ग्रांट हिमाचल लेता रहा। कमेटी की बैठक में एग्जामिनेशन सिस्टम को लेकर भी काफी चर्चा हुई। कमेटी सदस्यों ने तर्क दिया कि सेमेस्टर सिस्टम से छात्रों पर परीक्षाओं का बोझ ज्यादा बढ़ गया है। साल में उन्हें दो बार परीक्षाएं देनी पड़ रही है।

बदलाव ऐसे होंगे ताकि छात्रों को राहत मिले और ग्रांट भी न रुके : गुप्ता |कमेटी के चेयरमैन और एचपीयू के पूर्व कुलपति प्रो. सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि बैठक में कई चीजों पर मंथन हुआ है। वीरवार को भी बैठक जारी रहेगी। बदलाव ऐसे होने चाहिए ताकि छात्रों को राहत मिले और केंद्र से मिलने वाली ग्रांट भी न रुके। कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी। इस पर सभी छात्र संगठनों की राय भी ली जा रही है।

वार्षिक सिस्टम लागू के बाद अब ये होगा|यदि कमेटी समेस्टर सिस्टम को खत्म कर दोबारा से वार्षिक सिस्टम को अडॉप्ट करती है तो फिर बदलाव होगा। इसके तहत अंडर ग्रेजुएट में परीक्षाएं साल में एक ही बार होगी। मार्च महीने में परीक्षाएं आयोजित की जाएगी। इससे विश्वविद्यालय पर साल में दो बार पेपर चैकिंग से लेकर परीक्षाएं आयोजित करने का भार कम हो जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन समय पर रिजल्ट निकाल पाएगा।

एचपीयू की रही सबसे बड़ी खामी | कमेटी ने परीक्षाओं में सुधार पर काफी मंथन किया। कमेटी के सदस्यों ने कहा कि एग्जामिनेशन रिफॉर्म करना हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का काम था। एग्जामिनेशन रिफॉर्म के नाम पर कुछ नहीं किया गया। रूसा लागू करने में जो दिक्कत पेश आई है वह विश्वविद्यालय की तरफ से ही हुई है। परीक्षा शाखा को मजबूत करना सबसे जरूरी था जो एचपीयू प्रशासन ने नहीं किया। इसका खामियाजा प्रदेश भर के हजारों छात्रों को भुगतना पड़ा।

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Web Title: रूसा लागू कर केंद्र से बजट लिया, सुधार के नाम पर कुछ नहीं किया
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