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केंद्र प्रायोजित स्कीमों की यूसी न देने पर केंद्र सख्त

केंद्र प्रायोजित स्कीमों की यूसी (यूटीलाइजेशन सर्टिफिकेट) जारी न हो पाने के कारण केंद्र सरकार के पास राज्य सरकार...

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 02:05 AM IST
केंद्र प्रायोजित स्कीमों की यूसी (यूटीलाइजेशन सर्टिफिकेट) जारी न हो पाने के कारण केंद्र सरकार के पास राज्य सरकार का करीब 430 करोड़ रुपए फंस गए ह। यह पैसा आईपीएच और बागवानी विभाग की अलग अलग स्कीमों का है। केंद्र सरकार राज्य सरकार को यह पैसा तभी जारी करेगी जब राज्य सरकार केंद्र को पहले दिए गए पैसों का पूरा हिसाब देगी। केंद्र ने राज्य को बागवानी विभाग की एकीकृत बागवानी मिशन और आईपीएच की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए अलग अलग बजट जारी किया है। सरकार ने संबंधित दोनों विभागों के अधिकारियों से स्कीमों के तहत जारी किए गए बजट की यूसी देने को कहा है उसी के बाद स्कीमों का अगला बजट जारी होगा।

यूसी देने का काम किया टाइमबाउंड, 15 दिन में देनी है रिपोर्ट : स्कीमों की यूसी देने के काम को टाइमबाउंड किया गया है । सरकार ने अधिकारियों को 15 दिन के भीतर स्कीमों के लिए जारी बजट का उपयोगिता प्रमाणपत्र देने को कहा है। एेसा न करने पर अधिकारियों से जवाब तलबी की जाएगी।

स्कीमों की यूसी न देने के कारण बागवानी विभाग का 30 करोड़ रुपए का बजट और आईपीएच विभाग का 400 करोड़ रुपए का बजट केंद्र के पास लंबित है। यह पैसा राज्य सरकार को तभी जारी होगा जब दोनों विभागों से यूटिलाइजेशन सर्टिंफिकेट केंद्र को भेज दिए जाएंगे। केंद्र सरकार ने बागवानी मिशन के तहत मार्च 2018 तक 20 करोड़ रुपए जारी किए है। विभाग ने यह पैसा कहां और किस अनुपात में खर्च किया है जब तक इसका हिसाब केंद्र को नहीं दिया जाता तब तक केंद्र सरकार के पास मिशन का 30 करोड़ रुपए फंसा हुआ है।

क्यों जरूरी है यूसी देना

किसी भी स्कीम के लिए जब केंद्र व राज्य सरकार विभागों को बजट जारी करता है तो सरकार स्कीमों के लिए पैसों की दूसरी किश्त तभी जारी करतीं है जब विभाग पहले जारी किए गए बजट को खर्च करने की पूरी डिटेल सरकारों को उपलब्ध करवा देता है। सरकारें खर्च किए गए बजट की पूरी रिपोर्ट वेरिफाई करने के बाद स्कीम के लिए अगला बजट जारी करता है। अगर विभाग समय पर यूसी नहीं देंगे तो केंद्र स्कीमों के लिए अगला बजट जारी नहीं करेगा। केंद्र से पैसा न मिलने पर कल्याणकारी योजनाएं पैसों के अभाव में अधर में लटक जाएगी और उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाएगा जिनके लिए योजनाएं मंजूर की गई है।


-महेंद्र सिंह, बागवानी और आईपीएच मंत्री

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