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एक का ट्रांसफर, दूसरा पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट दो महीने बाद छुट्‌टी से आया, ज्वाइनिंग के दो दिन बाद फिर लीव पर गया

प्रदेश में मुफ्त इलाज की सुविधा देने के दावे करने वाली सरकार करीब 60 हजार की आबादी वाले सोलन शहर को बच्चों के उपचार...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 16, 2018, 02:05 AM IST

  • एक का ट्रांसफर, दूसरा पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट दो महीने बाद छुट्‌टी से आया, ज्वाइनिंग के दो दिन बाद फिर लीव पर गया
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    प्रदेश में मुफ्त इलाज की सुविधा देने के दावे करने वाली सरकार करीब 60 हजार की आबादी वाले सोलन शहर को बच्चों के उपचार के लिए एक अदद पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट की सेवाएं नहीं दे पा रही है। जिला के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पांच महीने से पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट की नियमित सेवाएं नहीं मिलने सरकार व स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात यह है कि पूरे जिला में एक भी पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट नहीं है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग नवजात व किशोरावस्था के बच्चों की बीमारी के उपचार के लिए कितना संवेदनशील है। अस्पताल में इमरजेंसी में लाए जा रहे बच्चों को आईजीएमसी रेफर किया जा रहा है, जबकि सामान्य बीमारियों के उपचार करवाने के लिए अभिभावकों को प्राइवेट क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है।

    सोलन अस्पताल में पांच महीने से बच्चों को नियमित इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में दो पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट के रहते चाइल्ड ओपीडी में औसतन 400 से 500 बच्चों का उपचार होता है, लेकिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर की सेवाएं नहीं मिलने से अब बच्चों का उपचार मुश्किल हो गया है। सरकार ने क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में डॉक्टरों के 10 नए पद सृजित करने की घोषणा तो की, लेकिन अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर अपनी ड्‌यूटी देने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट डॉक्टर की सेवाएं नहीं मिलने से सामान्य बीमारी के उपचार के लिए बच्चों को अाईजीएमसी रेफर किया जा रहा है।

    सोलन अस्पताल में बंद पड़ी चाइल्ड ओपीडी

    ज्वाइनिंग के दो दिन बाद फिर मेडिकल लीव पर स्पेशलिस्ट |कहने को तो सोलन अस्पताल में बच्चों के उपचार के लिए दो पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट के पद सृजित है, लेकिन मेडिकल लीव व ट्रांसफर के चलते दोनों ही पद खाली है। पिछले करीब दो महीने से मेडिकल लीव पर चल रहे पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट ने स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर ड्‌यूटी तो ज्वाइंन की, लेकिन दो दिन सेवाएं देने के बाद ही मेडिकल ग्राउंड पर छुट्‌टी के लिए अप्लाई कर दिया। जानकारी के मुताबिक पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट डॉ. विपिन ने टांडा मेडिकल काॅलेज का मेडिकल लगाकर अस्पताल प्रशासन को मेल कर मेडिकल लीव के लिए आवेदन किया है। इससे अभिभावक अपने बच्चों का प्राइवेट क्लीनिकों में महंगा उपचार करवाने को मजबूर हैं। अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टर की तरफ से भेजे गए मेडिकल सर्टीफिकेट व लीव एप्लीकेशन की मेल को स्वास्थ निदेशालय के लिए फार्वड कर दिया है, लेकिन अभी तक इस पर कोई भी एक्शन नहीं हुआ है।

    दो पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट के पद सृजित हैं

    मेडिकल लीव व ट्रांसफर के चलते दोनों ही पद खाली

    दो महीने से मेडिकल लीव पर चल रहे स्पेशलिस्ट ने स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर ड्‌यूटी तो ज्वाइंन की

    दो दिन सेवाएं देने के बाद ही मेडिकल ग्राउंड पर छुट्‌टी के लिए अप्लाई कर दिया

    बच्चों को इलाज करवाने पहुंचे थे लोग, नहीं मिले स्पेशलिस्ट तो हुए मायूस

    अस्पताल में मंगलवार को भी लोग बच्चों का इलाज करवाने पहुंचे थे। पेडियाट्रिक स्पेशलिस्ट नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जनरल ओपीडी में अभिभावक बारी का इंतजार करते हुए।

    तीन जिलों का केंद्र बिंदू सोलन अस्पतालस्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से सोलन अस्तपाल सोलन सहित शिमला व सिरमौर के उपमंडलों के लोगों के लिए सुविधाजनक है। पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट की कमी के कारण सोलन शहर सहित सिरमौर के राजगढ़, नौहराधार, हरिपुरधार, नारग और शिमला के पुलवाहल व कुपवी क्षेत्र से अस्पताल में आने वाले बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाती। दूरदराज के क्षेत्रों से बच्चों के उपचार के लिए आने वाले अभिभावकों को स्पेशलिस्ट डॉक्टर की सेवाएं नहीं मिलने से निराश होकर लाैटना पड़ रहा है। इमरजेंसी की स्थिति में तो प्राइवेट क्लीनिकों पर ही निर्भर होना पड़ता है। अस्पताल में पिछले लंबे अरसे से गायनी, आर्थो, मेडिसिन और पेडिएट्रिक डॉक्टरों के अतिरिक्त पद सृजित किए जाने की मांग है। लाेग नई सरकार से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों की ट्रांसफर और रिजाइन देने से रोगियों की मुश्किलें बढ़ गई है।

    पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट डाॅक्टर ने विभाग के निर्देश पर अस्पताल में ड्‌यूटी ज्वांइन की , लेकिन उन्होंने ऑफिस में मेल कर फिर से मेडिकल लीव के लिए अप्लाई किया है। इस संदर्भ में स्वास्थ्य निदेशालय को सूचित किया है। फिलहाल अस्पताल में पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट की सेवाएं नहीं मिल रही है। बच्चों का उपचार जनरल आेपीडी में किया जा रहा है। गंभीर रूप से बीमार बच्चाें को आईजीएमसी रेफर किया जाता है। डॉ. महेश गुप्ता, सीनियर मेडिकल सुपरइंटेंडेंट, साेलन अस्पताल।

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Web Title: एक का ट्रांसफर, दूसरा पेडिएट्रिक स्पेशलिस्ट दो महीने बाद छुट्‌टी से आया, ज्वाइनिंग के दो दिन बाद फिर लीव पर गया
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