शिमला

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एचपीसीए को पांच साल पहले दिए गए नोटिस से बचाने की तैयारी

शिमला . हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को पांच साल पहले दिए नोटिस से बचाने की तैयारी शुरू कर दी है। रजिस्ट्रार...

Danik Bhaskar

May 16, 2018, 02:05 AM IST
शिमला . हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को पांच साल पहले दिए नोटिस से बचाने की तैयारी शुरू कर दी है। रजिस्ट्रार कोआपरेटिव ने एचपीसीए को नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया है। पांच साल पहले वीरभद्र सरकार ने एचपीसीए को नोटिस जारी किया था। इसमें पूछा गया था कि क्यों ने एसोसिएशन में प्रशासक की तैनाती की जाए। इसे एसोसिएशन ने कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट में इस मामले की लंबी सुनवाई के बाद रजिस्ट्रार कोआपरेटिव को इस मसले पर 21 मई तक फैसला लेने के निर्देश दिए। अब इस प्रक्रिया के तहत ही रजिस्ट्रार पंजीयक ने एचपीसीए को नोटिस जारी किया है। इसमें प्रशासक न लगाने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। एचपीसीए की दावा हैं कि वह कंपनी है, इसलिए सोसायटी एक्ट के तहत उन्हें न नोटिस दिया जा सकता है, न ही प्रशासक की तैनाती सरकार कर सकती है। अब रजिस्ट्रार पंजीयक के समक्ष एचपीसीए को यह साबित करना होगा कि वह कंपनी है। इसलिए नोटिस या प्रशासक की तैनाती का अधिकार सहकारिता विभाग के पास नहीं है। रजिस्ट्रार यदि एचपीसीए की आेर से दिए दस्तावेजों से संतुष्ट होते हैं तो पांच साल पहले दिए नोटिस को विड्रा किया जाएगा। इसके पास सरकार की आेर से इसकी जानकारी न्यायालय में मुहैया करवाई जानी है। इस मामले में यदि फैसला 21 तक नहीं हो पाता है तो सरकार कोर्ट से मामले के फैसले के लिए अतिरिक्त समय की डिमांड करेगी।

एचपीसीए को कंपनी साबित करने पर ही राहत : एसोसिएशन यदि रजिस्ट्रार के समक्ष यह साबित करने में सफल होती है तो वह कंपनी के तहत रजिस्टर्ड हो चुकी है। सोसायटी एक्ट के तहत सरकार की आेर से कार्रवाई नहीं की जा सकती है। एसोसिएशन की आेर से शीघ्र ही इसका पूरा रिकार्ड मुहैया करवाने की तैयारी चल रही है।

रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसायटीज ने एचपीसीए से मांगा जवाब

अब 18 जुलाई को सुनवाई

एचपीसीए से जुड़े मुख्य मामले में मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायाधीश के किसी संवैधानिक मामलों की सुनवाई में व्यस्त होने के कारण इस मामले को 18 जुलाई के लिए लगाया है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, सांसद अनुराग ठाकुर से लेकर कई अधिकारियों को आरोपी बनाया है। जयराम सरकार इस मामले को राजनीतिक मानकर खत्म करने की तैयारी में है, सुप्रीमकोर्ट में भी यह बात साफ कह चुकी है, लेकिन इस मामले में निजी तौर पर प्रतिवादी बनाए गए पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मामले को लड़ना चाहते हैं। इस पर सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई जुलाई महीने में होनी है।

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