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नगर निगम कुछ नहीं कर पाया, हाईकोर्ट ने दिलाई राहत, कहा फौरन काम पर लौटे सैहब कर्मी नहीं तो जाएगी नौकरी

नगर निगम प्रशासन शहर के लोगों को कूड़ा न उठा पाने से हो रही परेशानी को बचाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठा सका, लेकिन...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 06, 2018, 02:10 AM IST

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    नगर निगम प्रशासन शहर के लोगों को कूड़ा न उठा पाने से हो रही परेशानी को बचाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठा सका, लेकिन शनिवार को प्रदेश हाई कोर्ट ने शहर की आबादी को राहत दिलाने का अादेश दिया है। हाई कोर्ट ने लगातार बढ़ रही गंदगी के बीच शहर की जनता को मुश्किल में डालकर हड़ताल पर उतरे सैहब कर्मियों को हाईकोर्ट ने तुरंत काम पर लौटने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर ये कर्मचारी काम नहीं लौटते तो उनकी सेवाएं तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दी जाएं। काम पर न आने वालों की जगह नई भर्तियां की जाए।

    अवहेलना पर कर्मचारी पर चलाया जाएगा अवमानना का मामला

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने अपने आदेशों में यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई कर्मचारी आदेशों की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाएगा। डीसी, एसपी और नगर निगम आयुक्त को कोर्ट ने आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं। एसपी शिमला को यह आदेश भी दिए कि अगर कोई कर्मचारी कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में किसी भी तरह की अड़चन पैदा करे, तो उसे गिरफ्तार किया जाए। कोर्ट ने डीसी, एसपी, आयुक्त नगर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को आदेश दिए कि वे अदालत के आदेशों की अनुपालना संबंधी शपथ पत्र भी कोर्ट के समक्ष दायर करे। इस मामले में अगली सुनवाई 7 मई को निर्धारित की गई है।

    एक मई से हड़ताल पर हैं सैहब कर्मचारी

    शहर में घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए रखे सैहब कर्मचारी एक मई से अपनी मांग मनवाने के लिए हड़ताल कर रहे हैं। उनकी मांग स्थाई पॉलिसी की है। सैकंडों सैहब कर्मियों के एक साथ हड़ताल पर उतरने से पूरे शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। घरों से कूड़ा नहीं उठ रहा है। हालांकि, नगर निगम की ओर से जगह-जगह क्लेशन सेंटर बनाए गए हैं, मगर घरों से दूर होने के कारण लोग कूड़ा डालने उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, मजबूरन अब लोग कई दिनों से घरों में डंप पड़े कूड़े को हर कहीं ठिकाने लगाने लगे हैं। कई नाले कूड़े से भरे गए हैं। उपनगरों में लोगों ने कूड़ा जंगलों में फेंकना शुरू कर दिया है। स्कूलों और अस्पतालों के बाहर भी कूड़े के ढेर पड़े हैं, ऐसे में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को भी परेशानी हो रही है। पांच दिनों से कूड़ा अस्पताल परिसर में पड़ा होने से इन्फेक्शन का खतरा पैदा हो गया है।

    छह महीने में चौथी हड़तालसैहब कर्मचारी चौथी बार हड़ताल पर उतरे हैं। पहले इन्होंने वेतन बढ़ोतरी को लेकर हड़ताल की। नगर निगम ने वेतन बढ़ाया तो वे स्थायी नीति की मांग करने लगे हैं। सैहब कर्मियों के बार-बार यूं हड़ताल पर उतरने से परेशानी आम लोगों को उठानी पड़ रही है। शहर में पहले कूड़े के लिए जगह-जगह नजदीकी जगहों पर डंपर रखे होते थे। जबसे डोर-टु-डोर कूड़ा एकत्रीकरण योजना शुरू हुई, तब से डंपर हटा दिए हैं। अब घरों के कूड़े को ठिकाने लगाने के लिए शहर के लोग पूरी तरह से सैहब कर्मचारियों पर ही निर्भर हैं। ऐसे में कर्मचारी अगर हड़ताल करेंगे, लोग तो परेशान होंगे ही।

    कूड़े-पानी से राहत नहीं तो कांग्रेस-भाजपा-माकपा ने मांगा मेयर-डिप्टी मेयर काइस्तीफा

    पानी की कमी के चलते भाजपा और कांग्रेस पार्षद मेयर की इस्तीफे की मांग करते हुए और घेराव किया जब की मेयर कार्यलाय में नहीं थी।

    सैहब कर्मियों को दी आदेश की जानकारी

    कोर्ट का ये आदेश आने के बाद नगर निगम ने इन आदेशों की जानकारी सैहब सोसायटी वेलफेअर यूनियन के प्रधान जसवंत सिंह को दी गई है। नगर निगम कमिश्नर रोहित जमवाल की ओर से जारी प्रेस ब्यान में बताया कि इन कर्मचारियों को कोर्ट के आदेशों के मुताबिक 6 मई की सुबह तक काम पर लौट आएं। अगर कोर्ट के आदेशों के मुताबिक ये कर्मचारी काम पर नहीं आते तो एसेंशन सर्विसिस मेंटिनेंस एक्ट एस्मा के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

    अब बरसात के पानी का ही आसरा

    शहर के कई हिस्सों में पानी नही आ रहा। हालत ये है कि एंदड़ी, समरहिल, बालूगंज, नाभा, बेनमाेर वार्ड, कसुम्पटी बैंच समेत कई एरिया में चार दिनों से पानी नही आया तो लोगों को शनिवार दोपहर बाद हुई बारिश के पानी के लिए ही बाल्टियां लगानी पड़ी।

    शिमला | पांच दिनों से शहर में घरों और बाजारों से कूड़ा नहीं उठ रहा। शहर में पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही। ज्यादातर हिस्सों में चौथे या पांचवें दिन पानी की सप्लाई हो रही है, तो अब जनता ही नहीं बल्कि पार्षदों का सब्र भी जवाब दे गया। कई जगह तो शनिवार को दसवें दिन भी पानी नहीं मिला, तो अब भाजपा, कांग्रेस और माकपा ने मेयर कुसुम सदरेट और डिप्टी मेयर राकेश शर्मा से व्यवस्था न संभाले पाने पर इस्तीफे की मांग कर दी है। शनिवार को भाजपा और कांग्रेस के तीन पार्षदों ने मेयर कार्यालय आकर इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अगर दोनों मूलभूत सेवाओं को देने में भी विफल हो रहे तो इनका कुर्सी में रहने का औचित्य ही नहीं बनता है। भाजपा के दस माह के शासन काल में सैहब सोसायटी कर्मचारियों की यह चौथी बार हड़ताल है। ऐसे में पार्षदों को बार बार जनता के सवालों का जवाब देना पड़ रहा है। मेयर, डिप्टी मेयर से कोई जवाब नहीं मिल रहा। गारबेज कलेक्शन और पानी की समस्या से नाराज छह पार्षद मेयर कार्यालय में पहुंचे थे, लेकिन इनमें से तीन भाजपा पार्षद पार्टी आलाकमान के डर के मारे सामने ही नहीं आए। जबकि भाजपा समर्थित पार्षद आरती चौहान, कांग्रेस के राकेश चौहान और अर्चना धवन ने मेयर कार्यालय में बैठकर काफी देर मेयर आकर उनकी खामियों को गिनाते रहे। जाखू की पार्षद अर्चना धवन ने कहा कि वे 2002 से पार्षद हैं, लेकिन इससे खराब हालात शहर में कभी खराब नहीं हुए हैं। राकेश चौहान ने कहा कि निगम में मेयर और डिप्टी मेयर का जरा भी कंट्रोल नहीं रहा है।

    सूखे नलकों के आगे पड़ी रहीं बाल्टियां

    शहर के ज्यादातर हिस्सों में पानी के लिए भी पानी नही मिल रहा। लोगों के बर्तन खाली हैं तो पानी के इंतजार में घरों के सारे बर्तन लोगों ने नलकों के आगे रख दिए हैं लेकिन ये पता नही कि पानी आएगा या नहीं।

    जाखू, समरहिल, नाभा में पांच दिन से पानी नहीं |जाखूवार्ड में पिछले पांच दिनों से पानी की दिक्कत चल रही है। वार्ड के लोगों को भी पांचवें दिन भी पानी नहीं मिल पा रहा है। शैली शर्मा ने कहा कि उनके वार्ड के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब टैंकर से पानी मंगवाने पर भी नहीं मिल पा रहे हैं। नाभा वार्ड की काउंसलर सिमी नंदा ने कहा कि उनके वार्ड के लोग सुबह छह बजे से ही फोन करना शुरू कर दे रहे हैं।

    जहां टैंकर नहीं पहुंचे, वहां ज्यादा दिक्कत |शहर के कई क्षेत्र ऐसे क्षेत्र हैं जहां वाटर टैंकर के नहीं पहुंच पा रहे हैं वहां पर लोगों को ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अब लोगों ने मजबूरी में कई ऐसे सोर्सिज से भी पानी का प्रयोग करना शुरू कर दिया है जिन्हें नगर निगम प्रशासन दूषित करार कर चुका है।

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