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प्रॉपर्टी टैक्स के बड़े डिफाल्टरों से रिकवरी नहीं कर पा रहा है निगम

Dainik Bhaskar

May 06, 2018, 02:10 AM IST

Shimla News - प्रॉपर्टी टैक्स के बड़े डिफाल्टरों से निगम प्रशासन रिकवरी करने में अभी तक नाकाम रहा है। कई वर्षों से रिकवरी को...

प्रॉपर्टी टैक्स के बड़े डिफाल्टरों से रिकवरी नहीं कर पा रहा है निगम
प्रॉपर्टी टैक्स के बड़े डिफाल्टरों से निगम प्रशासन रिकवरी करने में अभी तक नाकाम रहा है। कई वर्षों से रिकवरी को लेकर कोई कड़ी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है, जिसके चलते अभी भी 21 बड़े डिफाल्टरों से 4.50 करोड़ की राशि ली जानी है। इन डिफाल्टर्स को प्रशासन कई बार नोटिस देने के अलावा और कोई बड़ी और सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन की आेर से सख्त कार्रवाई न होने के चलते ही ये डिफाल्टर प्रशासन का हल्के में ले रहे हैं और देय राशि को चुकता नहीं कर रहे हैं। प्रॉपर्टी टैक्स जमा न करवाने वालों में कई रसूखदार व्यापारियों के अलावा चौपाल के विधायक भी शामिल हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार चौपाल के विधायक को नगर निगम प्रशासन के लगभग 50 लाख देने हैं, जबकि सरकारी बिल्डिंग की बात की जाए तो अकेले न्यू आईएसबीटी की बिल्डिंग से नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में 3.50 करोड़ लेना शेष है। हालांकि ये रिकवरी पुरानी है, लेकिन निगम की सत्ता में आने के 9 माह बाद भी भाजपा शासित निगम रिकवरी करने में नाकाम रहा है। मेयर कुसुम सदरेट की ओर से भी इस मामले में अधिकारियों को निर्देश देने के अलावा रिकवरी को लेकर अपने स्तर पर कोई प्रयास नहीं किए हैं। प्रॉपर्टी टैक्स की नई दरों को तय करने के लिए सदन में प्रस्ताव तो लाया गया और कमेटी बनाकर मुंबई को दौरा भी तैयार किया, लेकिन डिफाल्टर्स से रिकवरी कैसे की जानी है इसके बारे में अभी तक चर्चा नहीं की गई है।

संपत्ति कुर्क करते तो हो जाती रिकवरी | निगम की ओर से कई बार नोटिस जारी होने के बावजूद भी टैक्स जमा न करवाने वाले डिफाल्टर्स की संपत्तियों को अटैच करने का हक निगम प्रशासन के पास है। इसके अलावा लंबे समय से टैक्स जमा न करवाने वालों की संपत्तियों को राजस्व रिकार्ड में रेड एंट्री करवाकर भी निगम प्रशासन अपनी बकाया राशि वसूल करता है। राजस्व रिकार्ड में रेड एंट्री होने से संपत्ति के मालिक इसे बेच या इसपर लोन नहीं ले सकते। ऐसी सूरत में मजबूरन संपत्ति मालिकों को निगम के पास प्रापर्टी टैक्स जमा करवाना पड़ता है। यदि प्रशासन इन कदमों को उठाता तो अभी तक निगम के पास करोड़ों रुपए की रिकवरी हो सकती थी।

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