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राज्य में महंगी हुई बिजली लेकिन 18 लाख डोमेस्टिक कंज्यूमर्स को सब्सिडी के जरिए कम रेट पर मिलेगी

हिमाचल में सभी के लिए बिजली की दरें बढ़ गई हैं। लेकिन ज्यादा मार उद्योगों आैर कारोबारियों को झेलनी पड़ेगी। 18 लाख...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 06, 2018, 02:10 AM IST

हिमाचल में सभी के लिए बिजली की दरें बढ़ गई हैं। लेकिन ज्यादा मार उद्योगों आैर कारोबारियों को झेलनी पड़ेगी। 18 लाख घरेलू उपभाेक्ताओं के लिए भी बिजली कर दरें बढ़ाई गई हैं लेकिन उन्हें सरकार से मिलने वाली सब्सिडी के जरिए बढ़ी हुई बिजली की दरों का बोझ नहीं सहना पड़ेगा।

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने शनिवार को वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए बिजली की नई दरें घोषित कर दीं। औद्योगिक आैर कमर्शियल बिजली की दरों में डेढ़ से ढाई फीसदी तक की बढ़ोत्तरी की है। आयोग के आदेशों को मुताबिक नई दरें पिछले महीने पहली अप्रैल से लागू मानी जाएंगी।

राज्य बिजली बोर्ड ने 252 करोड़ का सालाना घाटा दिखाते हुए आयोग में बिजली की दरों में बढ़ोतरी की याचिका दायर की थी। 120 दिन तक विभिन्न पक्षों की सुनवाई के बाद शनिवार को नई दरें जारी की है। पानी की स्कीमों से पेयजल लिफ्ट करने में इस्तेमाल हो रही बिजली की दर में भी तीन फीसदी का इजाफा होगा। राज्य में घरेलू बिजली उपभोक्ताआें को 2017 में भी बिजली दरों की बढ़ोतरी से दूर रखा गया था।

इंडस्ट्रीज को रात में सस्ती मिलेगी बिजली, नए उद्योगों को 10 फीसदी छूट दी जाएगी

हर कैटेगिरी में नए पावर टैरिफ रुपए में

डॉमेस्टिक

स्लैब नए रेट सब्सिडी चुकाने हैं इतने

0-60 यूनिट 3.30 2.30 1.00 (प्रति यूनिट)

0-125 यूनिट 3.90 2.40 1.50 (प्रति यूनिट)

126-300 यूनिट 4.80 1.90 2.90 (प्रति यूनिट)

300 से ज्यादा 5.40 1.05 4.35 (प्रति यूनिट)

प्री पेड बिजली 4.80 1.90 2.90 (प्रति यूनिट)

इंडस्ट्री के लिए स्लैब वाइज रेट

कैटेगरी पहले अब

छोटे उद्योग 4.70 4.75 (प्रति यूनिट)

मध्यम उद्योग 4.50 4.60 (प्रति यूनिट)

बड़े उद्योग ईएचटी 4.10 4.20 (प्रति यूनिट)

एचटी वन 4.50 4.60 (प्रति यूनिट)

एचटी टू 4.20 4.30 (प्रति यूनिट)

कमर्शियल

कैटेगरी पहले अब

कामर्शियल 5.05 5.10 (प्रति यूनिट)

पुराने उद्योग ज्यादा कंज्यूम करेंगे तो इस साल मिलेगी 10% छूट

निवेशकों को हिमाचल में लाने के लिए रात के समय में बिजली के इस्तेमाल पर विशेष छूट देने का फैसला किया है। इन नए उद्योगों को बिजली की दरों में 10 फीसदी की भी छूट मिलेगी। पहले से चल रहे उद्योग अगर पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें इस साल बिजली के बिल में दस फीसदी की छूट मिलेगी।

बजट में किया था 457 करोड़ का प्रावधान

राज्य सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली की दरों के बढ़े रेट के असर से दूर रखने को 457 करोड़ का प्रावधान रखा था। सरकार ने बजट भाषण में बिजली की बढ़ी दरों से जनता को बचाने को ये प्रावधान किया था। पेयजल आपूर्ति में इस्तेमाल होने वाली बिजली के बिल का 5 करोड़ देने वाले आईपीएच पर भी 3 फीसदी बोझ आया है। विभाग हर साल बोर्ड को 5 करोड़ रुपए देता है। अब 15 लाख ज्यादा देना होगा। लेकिन पानी के बिलों में कोई असर नही होगा।

कमाई का 50% सब्सिडी पर खर्च

राज्य में बिजली की कमाई से प्रदेश को 1000 करोड़ की सालाना आय होती है। राज्य को बिजली की बेहतर दरें कई साल से नहीं मिल रही हैं। पहले जब राज्य सरकार कम बिजली बेचती थी, तक 900 करोड़ रुपए मिलते थे। राज्य में बिजली से आय का आंकड़ा एक हजार करोड़ तक ही पहुंचा है। वही सब्सिडी का आकड़ा 457 करोड़ पहुंच गया है। बिजली की कमाई का 50% सब्सिडी पर खर्च होता है।

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