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बच्चे आखिर पढ़ाई में कमजोर क्यों, डेपुटेशन पर डटे टीचर्स करेंगे सर्वे

राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के बजाए डेपुटेशन पर शिक्षा निदेशालय और उप शिक्षा निदेशालय कार्यालयों में डटे...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 06, 2018, 02:10 AM IST

राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के बजाए डेपुटेशन पर शिक्षा निदेशालय और उप शिक्षा निदेशालय कार्यालयों में डटे टीचरों को फील्ड में भेजने का विभाग ने नया प्लान तैयार किया है। विभाग इन टीचरों को फील्ड में भेजकर उनसे शोध कार्य करवाएगा। टीचर ये पता लगाएंगे कि साइंस, मैथ, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषयों में बच्चे कमजोर क्यों है। आठवीं का बच्चा क्यों चौथी और पांचवीं का पाठ्यक्रम नहीं पढ़ पाता। इसके लिए प्रश्नावली तैयार की जाएगी। जिसे फील्ड में जाकर ये भरेंगे। उसके बाद एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। टीचरों को यह भी बताना होगा कि वह किस दिन किस स्कूल में गए। कितने स्टूडेंट से प्रश्नावली भरवाई। डेपुटेशन पर डटे ये टीचर खासे रसूखदार है। वे जुगाड़ से अपनी ट्रांसफर रुकवा देते हैं। शिक्षा सचिव डा. अरुण शर्मा ने माना कि शिक्षा निदेशालय में डेपुटेशन पर डटे टीचरों को नया कार्य सौंपा जा रहा है।

डेपुटेशन रद्द न कर पाने के चलते शिक्षा निदेशालय ने टीचर्स को फील्ड में भेजने का लिया निर्णय

पहले ट्रांसफर का लिया था फैसला, लेकिन ऑर्डर नहीं हुए

प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद शिक्षा मंत्री ने कहा था कि डेपुटेशन को खत्म कर इन्हें वापिस स्कूल और कॉलेजों में तैनात किया जाएगा। लोगों की ओर से आई शिकायतों के बाद सरकार ने यह फैसला लिया था। लेकिन निदेशालय से किसी भी टीचर की भी डेपुटेशन खत्म नहीं की गई। निदेशालय का कहना है कि उनके पास इस तरह के आदेश आए ही नहीं। उच्चतर और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के अलावा, डिस्ट्रिक इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (डाइट) और स्टेट काउंसिल एंड एजुकेशन रिसर्च (एससीईआरटी) के अलावा सर्व शिक्षा अभियान, आैर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में कई टीचर कार्यरत हैं। सभी डेपुटेशन पर हैं।

100 से ज्यादा डेपुटेशन पर 30 शिक्षा निदेशालय में| प्रदेश में 100 से ज्यादा टीचर डेपुटेशन पर डटे हुए हैं। इसमें 30 के करीब टीचर तो शिक्षा निदेशालय में हैं। इनमें 10 प्रारंभिक और हायर शिक्षा विभाग में हैं। जबकि अन्य एसएसए के अलावा अन्य प्रोजेक्टों में तैनात हैं। बाकी टीचर जिला स्तर पर डिप्टी डायरेक्टर कार्यालयों, अन्य परियोजनाओं में तैनात हैं। इन सभी को शोध की ये जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

हिमाचल टाॅप टेन में नहीं बना पाया जगह| राष्ट्रीय स्तर पर किए गए इस सर्वे में प्रदेश टाप टेन में भी अपनी जगह नहीं बना पाया। इस सर्वे में तीसरी कक्षा का 17वां, पांचवीं कक्षा का 13वां और आठवीं कक्षा का 15वां स्थान हासिल हुआ है।

यहां जाने कैसे पिछड़े हैं बच्चे

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आठवीं और पांचवीं के बच्चे गणित और विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में कमजोर है। मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा करवाए गए नेशनल अचीवमेंट सर्वे की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ था। सर्वे में तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा को शामिल किया था। इन तीनों कक्षाओं में अलग अलग विषयों पर बच्चों की परफार्मेंस आंकी गई, जो संतोष जनक नहीं पाई गई। सर्वे में नीति आयोग ने सीईक्यूआई (स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडिकेशन) 75 तय की थी। इस सर्वेक्षण में कक्षा तीसरी के 6828, कक्षा पांचवीं के 6949 और कक्षा 8वीं के 11003 विद्यार्थियों की उपलब्धि स्तर को जांचा गया था।

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