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बारिश से कर्मचारियों के आवासों के आंगन तक आ गई ढंगे की दरारें, ढहने के डर से बाहर खड़े रहे बच्चे-महिलाएं

एक ओर तो जहां सरकार सचिवालय के लिए करोड़ों रुपए खर्च करके नई बिल्डिंग का निर्माण करवा रही है। वहीं, इस निर्माण...

Dainik Bhaskar

May 07, 2018, 02:10 AM IST
बारिश से कर्मचारियों के आवासों के आंगन तक आ गई ढंगे की दरारें, ढहने के डर से बाहर खड़े रहे बच्चे-महिलाएं
एक ओर तो जहां सरकार सचिवालय के लिए करोड़ों रुपए खर्च करके नई बिल्डिंग का निर्माण करवा रही है। वहीं, इस निर्माण कार्य के कारण इस सचिवालय के तीसरे ब्लॉक के ठीक ऊपर बने सचिवालय कर्मचारियों के आवास गिरने की कगार पर पहुंच चुके हैं। रविवार को हुई हल्की बारिश में आवास के साथ लगे ढंगे की की दारारें आवास के आंगन तक आ गईं जो पहले से गहरी दिखने लगी, जिस कारण कर्मचारियों व उनके परिवारजनों ने दहशत के साये में समय गुजारा।

जैसे ही सुबह बारिश में अचानक यहां पर दरारें बढ़ गई। कर्मचारी व उनके परिवार के सदस्य बाहर आ गए। जब तक बारिश रही सभी ने बाहर ही समय गुजारा। हालांकि, सुबह 10 बजे जब बारिश कम हुई, तो उसके बाद ही कर्मचारी भीतर गए। वहीं, दोपहर डेढ़ बजे दोबारा बारिश शुरू होने पर उनकी मुसीबतें और बढ़ गईं। कर्मचारियों का आरोप है कि डेढ़ माह से बिल्डिंग में खतरा बना हुआ है, न तो प्रशासन उनकी सुनवाई कर रहा है न ही पीडब्ल्यूडी विंग। अब ऐसे में यदि बिल्डिंग गिरती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

कर्मचारियों का अावास

अावास के आंगन में गहरी हुई दरारें

आठ आवास बने हैं टाइप-4

हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि जिन बिल्डिंग को खतरा बना हुआ है, उसमें टाइप-4 के आठ कर्मचारियों के आवास है। उन्होंने कहा कि इस भवन की कीमत करीब एक करोड़ रुपए है। यहां पर कर्मचारी दहशत के साय में है। मगर इस ओर प्रशासन व लोक निर्माण विभाग कोई ध्यान नहीं दे रहा। यदि यह भवन गिरता है तो इसके साथ दूसरी बिल्डिंग को भी खतरा हो जाएगा। ऐसे में यहां पर जल्द से जल्द डंगा लगाने का कार्य करना चाहिए।

इसलिए हुआ खतरा

नए ब्लॉक के लिए जमीन समतल करने को हैवी मशीनरी का हो रहा है प्रयोग

सचिवालय की नई बिल्डिंग के पीछे खाली जमीन पर इन दिनों नए ब्लाॅक को तैयार करने के लिए जमीन को समतल करने का काम चला हुआ है। इस दौरान यहां हैवी मशीनरी का प्रयोग भी किया गया था। निर्माण स्थल के उपरी क्षेत्र में सचिवालय कर्मचारियों के आवासों को ढहने से बचाने के लिए यहां पर डंगे का निर्माण भी किया गया था, लेकिन अब डंगा भी ढह चुका है और सरकारी आवासों में दरारें भी आ चुकी हैं। आवासों को अधिक नुकसान न पहुंचे इसके लिए दरारों में पानी न अंदर जा सके इसके लिए तिरपालें बिछाई गई हैं।

जियोलॉजी सर्वे भी करवाया | यहां पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले जियोलॉजी सर्वे भी करवाया गया था। इस सर्वे की रिपोर्ट के बाद ही यहां पर नए परिसर का निर्माण कार्य शुरू किया था और डंगा ढहने और बड़ी बड़ी दरारें आने पर सर्वे की रिपोर्ट पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात तो यह है कि इस काम को करवाने के लिए पहले प्रशासन की ओर से डंगा भी लगाया था, यह भी एक तरफ से गिर गया है। गिरे हुए डंगे के नीचे जमीन पर दरारें साफ दिखाई दे रही है। वहीं यहां पर दूसरे डंगे का काम भी कछुआ चाल में चला हुआ है।

खतरा भांप कर बाहर बारिश में खड़े रहे लोग

आज भी मौसम खराब मौसम विभाग के अनुसार दो दिनों तक बारिश व तूफान की चेतावनी दी है। ऐसे में यदि आज बारिश होती है तो कर्मचारी के लिए आवासों में रहना मुसीबत हो जाएगा। उन्हें हर समय अनहोनी का डर मन में बना रहेगा। हालांकि जो तिरपाल लोक निर्माण विभाग ने यहां पर लगाया है। भारी बारिश में उससे भी राहत मिलना मुश्किल है।

बारिश से कर्मचारियों के आवासों के आंगन तक आ गई ढंगे की दरारें, ढहने के डर से बाहर खड़े रहे बच्चे-महिलाएं
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