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अस्थाई टीचर्स को रेगुलर के बराबर देंगे वेतन व सुविधाएं: शिक्षा मंत्री

राज्य के सरकारी स्कूलों में तैनात अस्थाई शिक्षकों को सरकार बड़ा तोहफा देगी। एसएमसी से लेकर पीटीए, पैट और पैरा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 07, 2018, 02:10 AM IST

राज्य के सरकारी स्कूलों में तैनात अस्थाई शिक्षकों को सरकार बड़ा तोहफा देगी। एसएमसी से लेकर पीटीए, पैट और पैरा टीचरों को नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन, छुट्टियां और अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएंगे। राज्य सरकार ने अस्थाई टीचरों को पॉलिसी लाने के लिए कानूनी पहलुओं को खंगालना शुरू कर दिया है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने रविवार को एसएमसी शिक्षकों द्वारा आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अस्थाई शिक्षक प्रदेश के दूर दराज क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे हैं। यदि यह टीचर न हो तो स्कूल बंद हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और अन्य संबंधित विभागों से परामर्श कर कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

एसएमसी के स्थान पर न की जाए रेगुलर नियुक्ति

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य के दूरदराज व अन्य क्षेत्रों में एसएमसी शिक्षक अपने कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। एसएमसी शिक्षक जहां पढ़ा रहे हैं, वहां नियमित शिक्षक की नियुक्ति न की जाए, इस पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन अध्यापकों को अवकाश व अन्य सुविधाएं मिलें इसके लिए विभाग से बात कर जल्द नीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का विकास और विस्तार केवल सरकारी स्कूलों व शिक्षकों के माध्यम से ही हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या की निरंतरता बनाए रखने और इनको बढ़ाने के लिए शिक्षकों की कार्यप्रणाली अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

नौवीं और दसवीं के छात्रों को भी मिलेंगी फ्री किताबें

राज्य राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 9वीं और 10वीं के सामान्य श्रेणी के छात्रों को भी फ्री किताबें दी जाएगी। शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इस साल चूंकि शैक्षणिक सत्र शुरू हो चूका है। ऐसे में यह निर्णय अब अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। करीब एक लाख से ज्यादा छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। बीते मंगलवार को राज्य सचिवालय में शिक्षा मंत्री के साथ आयोजित बैठक में ये मसला उठा था। शिक्षकों ने कहा था कि नौवीं और दसवीं दो कक्षाओं के सामान्य श्रेणी के छात्रों को फ्री बुक्स से वंचित रखा गया है। क्लास में ऐसे में भेदभाव की स्थिति पैदा हो रही है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने शिक्षकों को आश्वासन दिया था कि नए सत्र से इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि दो ही कक्षाओं के कुछेक छात्र इससे वंचित है। यदि ऐसे में इन्हें भी किताबें दे दी जाती है तो ज्यादा वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

अभी तक क्या है व्यवस्था| पहली से 8वीं कक्षा तक सभी छात्रों को फ्री बुक्स दी जाती है। राइट टू एजुकेशन एक्ट यानि आरटीई लागू होने के बाद निशुल्क शिक्षा के तहत किताबें दी जात है। नवीं और दसवीं में एससी, एसटी और बीपीएल श्रेणी के छात्रों को फ्री किताबें दी जाती है। 15000 के करीब सरकारी स्कूलों में निशुल्क किताबों की खरीद के लिए करीब 10 करोड़ का बजट खर्च किया जाता है।

नए सत्र से नया ही होगा सिलेबस| सरकार नए शैक्षणिक सत्र से नया सिलेबस लागू करने जा रही है। इसके तहत राष्ट्रीय शैक्षिक, अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी का सिलेबस पढ़ाया जाएगा। राज्य सरकार ने पिछले साल ये निर्णय लिया था। लेकिन शिक्षा बोर्ड पहले ही किताबें ज्यादा छाप चूका था। जिसके चलते इसे एक साल बाद यानि अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने का निर्णय लिया गया था। यदि इसी साल इसे लागू कर दिया जाता तो करीब साढ़े तीन करोड़ की किताबें जो छप चुकी थी वह बेकार हो जाती।

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