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मोरक्को ने माउंट एटलस की पहाड़ी पर लगाया दुनिया का सबसे बड़ा सोलर फार्म; 580 मेगावाट के इस प्लांट से 20 लाख घर होंगे रोशन

दैिनक भास्कर, शिमला, सोमवार 07 मई , 2018 ये देश 37% पावर डिमांड ग्रीन एनर्जी से पूरा करता है रबात| तस्वीर मोरक्को की...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 07, 2018, 02:10 AM IST

  • मोरक्को ने माउंट एटलस की पहाड़ी पर लगाया दुनिया का सबसे बड़ा सोलर फार्म; 580 मेगावाट के इस प्लांट से 20 लाख घर होंगे रोशन
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    दैिनक भास्कर, शिमला, सोमवार 07 मई , 2018

    ये देश 37% पावर डिमांड ग्रीन एनर्जी से पूरा करता है

    रबात| तस्वीर मोरक्को की एटलस पहाड़ी की है। यहां पीली रेत पर लाइन से मानव आकार से बड़े मिलर लगे हुए हैं। ये मिरर 14 लाख वर्ग मीटर क्षेत्रफल में लगे हुए हैं। ये सोलर पावर जेनरेटिंग प्लांट का हिस्सा है। यह 600 फुटबॉल मैदान जितना बड़ा है। पहले फेज का काम 2016 में पूरा हो चुका है। इससे 1.6 मेगावाट ऊर्जा पैदा होती है। इससे 6.5 लाख घरों की ऊर्जा जरूरत पूरी हो सकती है। मोरक्कन एजेंसी फॉर सस्टेनबल एनर्जी के प्रमुख मुस्तफा बुखारी कहते हैं प्रोजेक्ट के सभी चार चरणों का काम पूरा हो चुका है। इसका संचालन जून से शुरू हो सकता है। पूरे प्लांट की क्षमता 580 मेगावाट्स की है। 11 लाख घरों में बिजली पहुंचेगी। इससे सालाना 7.6 लाख टन हानिकारक कॉर्बन उत्सर्जन रुकेगा। प्रोजेक्ट 63 हजार करोड़ रु. का है। जर्मन इन्वेस्टमेंट बैंक, अफ्रीका डेवलपमेंट बेंक, वर्ल्ड बैंक और यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक ने फंडिंग कर रहे हैं। इनका 60% िनवेश है। इस प्लांट का नाम नूर रखा गया है।

     सूर्य का पीछा करता है मिरर; टरबाइन से चलता है प्लांट

    ये प्लांट सालाना 7.6 लाख टन कॉर्बन उत्सर्जन रोकेगा, 2.5 लाख टन फ्यूल बचेगा

    नूर सौर पैनल जब सूर्य का पीछा करते हैं तो काफी ज्यादा शोर करते हैं। यहां के रेगिस्तान में सूर्य सालाना 3600 घंटे तक चमकता है, जो मोरक्को की सौर ऊर्जा क्षमता को दुनिया के ऊच्चतम स्तर वाले देशों की कतार में खड़ा करता है।

    सूरज की रोशनी को मिरर के पाइप में रखे सिंथेटिक तेल की ओर रखा जाता है। इससे तेल 350 डिग्री तक गर्म होता है और भाप बनती है, जिससे टरबाइन संचालित जेनरेटर चलता है। इससे कॉर्बन उत्सर्जन नहीं होता है।

    14 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में प्लांट, 63 हजार करोड़ रु. का यह प्रोजेक्ट इस साल जून तक शुरू हो सकता है

    और दुनिया में सोलर ऊर्जा पर रिपोर्ट

    हर घंटे 70 हजार सोलर पैनल लग रहे, 24 घंटे में फुटबॉल मैदान जितनी जगह कवर हो रही

    2012 में जीवाश्म ईंधन पर 68% निर्भरता थी, जो 2020 तक घटकर 52% रह जाएगी

    68%

    2012

     फ्यूल  रिन्यूएबिल  हाइड्रो  विंड  सोलर (पीवी+सीएसपी)

    32%

    अभी दुनियाभर में रोजाना 70 हजार सोलर पैनल लग रहे हैं। 24 घंटे में एक फुटबॉल मैदान जितनी जगह कवर हो रही है। यह रफ्तार पांच साल तक बनी रहेगी। 2022 तक दुनिया की सोलर पावर कैपेसिटी 3 गुना तक बढ़ जाएगी।

    इंटरनेशनल एनर्जी एसोसिएशन के मुताबिक जीवाश्म ईंधन की तुलना में सोलर एनर्जी की ग्रोथ सबसे ज्यादा है।

    2022 तक चीन में दुनियाभर की कुल सोलर पैनल की 40% होगी। इससे 320 गीगावाट्स बिजली पैदा करेगा। यह जापान की इलेक्ट्रिकसिटी क्षमता से अधिक है।

    भारत, जापान और अमेरिका जैसे बड़े देशों में 2022 तक सौलर ऊर्जा 3 गुना बढ़कर 880 गीगावाट्स पहुंच जाएगी।

    शिमला, सोमवार 07 मई , 2018 |

    26%

    58%

    5.1%

    0.5%

    2020

    14%

    14%

    42%

    9

    14%

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