--Advertisement--

टूटीकंडी पहुंचे दो नन्हे मेहमान डुग्गू और बैंडेट

इन दिनों टूटीकंडी का रेस्क्यू एंड रिहेबलिटेशन कम मंकी स्टरलाइजेशन सेंटर दो नए लेकिन उम्र में बहुत ही छोटे...

Dainik Bhaskar

May 09, 2018, 02:10 AM IST
टूटीकंडी पहुंचे दो नन्हे मेहमान डुग्गू और बैंडेट
इन दिनों टूटीकंडी का रेस्क्यू एंड रिहेबलिटेशन कम मंकी स्टरलाइजेशन सेंटर दो नए लेकिन उम्र में बहुत ही छोटे मेहमानों की मेजबानी कर रहा है। 15 महीने के तेंदुए के शावक बैंडेट को तो पिंजरे में ही रखना पड़ रहा है लेकिन भालू का 3 महीने का डुग्गू सेंटर के स्टाफ के साथ खेलता कूदता भी है। ये दोनों ही जंगल में अपनी मां से बिछड़े तो स्थानीय लोगों की सूचना पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का स्टाफ दोनों को टूटीकंडी के इस सेंटर में ले आया। उन दिनों से ही ये दोनों मेहमान यहां के स्टाफ के चहेते बने हुए हैं। इन दोनों की सेहत और खाने पीने से लेकर इनके भविष्य के लिए भी स्टाफ ने कोशिशें की तो बैंडेड को तो गोद भी ले लिया गया है। लेकिन डुग्गू को अगर कोई वाइल्डलाइफ लवर गोद लेना चाहे तो इस बीअर कब को जीवन भर पालने के लिए आगे आ सकता है।

जंगल प्लेयर्स

सेंटर के स्टाफ के चहेते बने हैं मां से बिछड़े दो नन्हे शावक, डुग्गू को गोद लेना चाहें तो पहले महीने का खर्च 17 हजार, बैंडेंट का है १५ हजार रुपए


डुग्गू ज्यादातर वक्त पिंजरे में नहीं बल्कि स्टाफ के लोगों के साथ पिंजरे से बाहर बिताना पसंद करता है। क्योंकि डुग्गू को खेलना और स्टाफ के साथ रहना ज्यादा पसंद है। लेकिन स्टाफ डुग्गू को ज्यादा आजादी भी नहीं दे पाता क्योंकि डुग्गू इधर उधर भागने की कोशिश करता है। डुग्गू भी बैंडेट की तरह ही कोटगढ़ के जंगलों में अपनी मां से बिछड़ गया तो ये सेंटर उसका आशियाना बन गया। डुग्गू छोटा था तो जल्द ही स्टाफ के साथ मिक्स भी हो गया। कोई भी वाइल्डलाइफ लवर डुग्गू को भी चाहे तो गोद ले सकता है।

गोद लेने का प्रोसेस और खर्च

गोद लेने का मतलब ये नहीं कि इन जानवरों को घर ले जा सकते हैं। ये जानवर चिड़ियघरों में ही रहेंगे। लेकिन फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के तय प्रोसेस के बाद इन्हें गोद ले सकते हैं। सेंटर के वेटरनरी डॉक्टर सुशील सूद बताते हैं कि तेंदुए को गोद लेेने के बाद हर महीने की डाइट का खर्च 15 हजार है। लेकिन डुग्गू को गोद लेना ज्यादा महंगा है क्योंकि एक साल तक तो डुग्गू की स्पेशल डाइट पर 17 हजार महीने के देने होंगे। लेकिन उसके बाद डुग्गू को गोद लेने का मासिक खर्च 5 से 6 हजार महीना रह जाएगा। क्योंकि एक साल तक डुग्गू को स्पेशल डाइट की जरूरत है। उसके बाद मक्की, चना और गुड़ जैसी डाइट का खर्च ज्यादा नहीं आएगा।


जुब्बड़हट्टी के जंगलों में पिछले साल जनवरी में एक महीने का तेंदुए का शावक मां से बिछड़ गया। लोगों को पता चला तो फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को इसकी जानकारी दी गई। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का स्टाफ इस शावक को टूटीकंडी ले आया। शुरुआती दिनों में इस शावक को घुलने मिलने में दिक्कत हुई लेकिन जब सेंटर के स्टाफ से मेलजोल बढ़ा तो इसे यहां का माहौल रास आ गया। स्टाफ ने शावक का नाम भी बैंडेट भी रख दिया। बैंडेट के एडॉप्टेशन की बात आगे बढ़ी तो शिमला के ही वरुण और गणेश शुक्ला ने औपचारिकताएं पूरी करके बैंडेट को गोद ले लिया।

टूटीकंडी पहुंचे दो नन्हे मेहमान डुग्गू और बैंडेट
टूटीकंडी पहुंचे दो नन्हे मेहमान डुग्गू और बैंडेट
X
टूटीकंडी पहुंचे दो नन्हे मेहमान डुग्गू और बैंडेट
टूटीकंडी पहुंचे दो नन्हे मेहमान डुग्गू और बैंडेट
टूटीकंडी पहुंचे दो नन्हे मेहमान डुग्गू और बैंडेट
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..