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शिक्षकों का फीडबैक तो ले लिया, तीन वर्ष से अभी तक कंपाइलेशन में ही फंसे, किसी पर नहीं की कोई कार्रवाई

एमएससी की पढ़ाई करने वाले छात्र कहते हैं,विभाग ने शिक्षकों की फीडबैक मांगी, हमने दे दी। मैंने ये भी फीडबैक में दिया...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 09, 2018, 02:10 AM IST

एमएससी की पढ़ाई करने वाले छात्र कहते हैं,विभाग ने शिक्षकों की फीडबैक मांगी, हमने दे दी। मैंने ये भी फीडबैक में दिया कि मेरी कक्षाएं लगाने वाले शिक्षक महीने में 20 दिन सेमिनार व अन्य तरह के कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं। महीने में सिर्फ 10 दिन कक्षाएं लगाते हैं, ऐसे में हमारा सिलेबस कैसे समय पर पूरा होगा। इसी तरह एक एमए की छात्रा का कहना है कि फीडबैक में मैंने लिखा कि शिक्षक सिर्फ टाइम पास के लिए कक्षा में आते हैं। कुछ नया नहीं पढ़ाते हैं, वे सिर्फ किताबी ज्ञान ही हमें दे रहे हैं। छात्रों का सीधा सवाल है कि जो फीडबैक उनसे लिया गया है, उसका क्या नतीजा निकला। क्या शिक्षकों पर कोई कार्रवाई हुई, क्या उनका वेतन रोका गया। अब हैरानी इस बात की है कि हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी प्रशासन पिछले तीन वर्षो से लिए गए फीडबैक को अभी तक कंपाइल ही नहीं कर पाया है। इससे पहले कई छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को शिकायत की थी कि कई शिक्षक ऐसे हैं, जो न तो समय पर कक्षाएं लगाते हैं और न ही विषय का सिलेबस पूरा करते हैं। ऐसे में छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है। इसको देखते हुए प्रशासन ने छात्रों द्वारा शिक्षकों के मूल्यांकन करने की प्रक्रिया शुरू की थी। जबकि अब इसका भी कोई फायदा विवि में पढ़ने वाले छात्रों को नहीं मिल रहा है।

लापरवाही

एचपीयू ने तीन वर्ष पहले शुरू किया था छात्रों से फीडबैक, अभी तक कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की

इसलिए शुरू किया है रिपोर्ट कार्ड सिस्टम

कौन शिक्षक छात्रों को कैसी शिक्षा दे रहे हैं?

यदि किसी शिक्षक का रिपोर्ट सही नहीं रहती है तो इसके बारे में उसे कारण बताना होगा।

अध्ययन के वातावरण की गुणवत्ता को सुदृढ़ किया जा सकेगा, वहीं समय पर कक्षाएं भी लग पाएगी।

फीडबैक आने के बाद प्रोफेसर्स पढ़ाने का तरीका बदलेंगे।

शिक्षकों की कमियां पता लगेगी और उसमें सुधार के लिए सेमिनार आयोजित किए जाएंगे।

ऐसे फीडबैक लिया गया छात्रों सेविवि प्रशासन की अोर से लगभग 30 विभागों के 80 फीसदी अंक लेने वाले टॉपर छात्रों से ये फीडबैक लिया गया है। छात्रों को 41 प्रश्नों के उत्तर देने थे। जिसमें ए, बी, सी और डी ऑप्शन रखे गए थे। इसमें सिर्फ छात्रों को राइट का निशान लगाना था। इसमें शिक्षक के व्यवहार से लेकर, कक्षाएं लगाने आैर छात्रों को किस तरह से पढ़ाते हैं। इससे संबंधित प्रश्न पूछे गए। पूर्व वीसी प्रो. एडीएन वाजपेयी ने इसे शुरू किया था। तब से लेकर अब तक इस फीडबैक का कोई फायदा छात्रों को मिला है।

शिक्षक को एेसे नंबर मिलने हैं1. आउटस्टेडिंग 2. एक्सीलेंट 3. वेरी गुड 4. एवरेज 5. विलो एवरेज। इसके आधार पर साफ हो जाएगा की कौन सा शिक्षक कैसा पढ़ाता है। फीडबैक होने के बाद संबंधित विभाग को सूचना दी जाएगी कि आपके यहां पढ़ाने वाला उक्त शिक्षक या तो समय का पाबंद नहीं है या फिर वह अच्छे से पढ़ाता नहीं है। यदि शिक्षक का रिपोर्ट कार्ड सही नहीं रहा तो विवि से मिलने वाले बेनिफिट्स या फिर सैलरी तक बंद हो सकती है। ऐसे में विवि प्रशासन फिलहाल इन रिपोर्ट कार्ड को कंपाइल करने में लापरवाही बरत रहा है।

ये लंबा प्रोसेस है, हमारे पास काफी अधिक फाॅर्म छात्रों के फीडबैक के आए हैं। हम इन्हें कंपाइल कर रहे हैं। छात्रों ने इसमें अपने विचार रखे हुए हैं। इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी और इसे विभागों को भेजा जाएगा। काफी अधिक फीडबैक आने के कारण इसे कंपाइल करने में समय लग रहा है। इस पर काम चला हुआ है। प्रो. एसएस कंवर, निदेशक, इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल, एचपीयू

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Web Title: शिक्षकों का फीडबैक तो ले लिया, तीन वर्ष से अभी तक कंपाइलेशन में ही फंसे, किसी पर नहीं की कोई कार्रवाई
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