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पहले ही पीने को पानी नहीं, जो 500 घरों का है सहारा उसी कुदरत की नैमत पर भी डाल दिया डंपिंग का कचरा

गर्मियों से पहले ही शहर के सामने पानी का संकट आ खड़ा हुआ है। शहर की रोजाना जरूरत 40 एमएलडी यानी 4 करोड़ लीटर पानी को...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 10, 2018, 02:10 AM IST

  • पहले ही पीने को पानी नहीं, जो 500 घरों का है सहारा उसी कुदरत की नैमत पर भी डाल दिया डंपिंग का कचरा
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    गर्मियों से पहले ही शहर के सामने पानी का संकट आ खड़ा हुआ है। शहर की रोजाना जरूरत 40 एमएलडी यानी 4 करोड़ लीटर पानी को पूरा करने लायक पानी नहीं है। लोगों के लिए कुदरती पानी के स्रोत इस संकट में नैमत से कम नहीं। लेकिन इन कुदरती चश्मों के वजूद पर भी इंसान की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी भारी पड़ने लगी है। लगभग पांच दशकों से ऐसे ही संकट के वक्त लोअर नवबहार व जाखा के लोगों को जिस स्रोत से पानी मिल रहा है, अब वहां भी अवैध डंपिंग शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग के ट्रक हर रोज यहां मलवा फैंक रहे हैं।

    मलबा ही नहीं कूड़ा कचरा भी इस स्रोत के ठीक ऊपर फेंकना शुरू कर दिया गया है। ये बात जब स्थानीय लोगों को पता चली तो उन्होंने पार्षदों को सूचित किया। बुधवार को ही बैनमोर की पार्षद किम्मी सूद और मल्याणा के पार्षद कुलदीप ठाकुर ने मौके का दौरा किया। उन्होंने इस बारे में नगर निगम के अलावा संबंधित विभागों के अधिकारियों से बात करके स्रोत को बचाने का भरोसा दिया।

    लोअर नवबहार जाखा के लिए होने वाली पानी की सप्लाई के पेयजल स्रोत में की जा रही डंपिंग का मुअायाना करने बुधवार को नगर निगम के पार्षद व स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे ओर यहां का जायजा लिया।

    कहां से कितना पानी लिफ्ट



    लोअर नवबहार जाखा में पानी के नेचुरल सोर्स पर मलबा फेंका जा रहा है। जिस कारण इसके अस्तित्व पर संकट अा गया है।

    पीलिया फैला तो भी साफ रहा यहां का पानीवर्षों से चल रहे इस प्राकृतिक का स्त्रोत का पानी पीने के लिए काफी अच्छा है। दो साल पहले जहां पूरे शहर में पीलिया फैल गया था। वहीं जहां-जहां इस स्त्रोत से पानी जाता था, वहां पर किसी को भी पीलिया की शिकायत नहीं हुई थी। लोगों का कहना है कि यह पेयजल स्त्रोत काफी अच्छा है तथा गर्मियों में भी लोगों को पेयजल किल्लत नहीं रहती।

    पंपिंग में बिजली की समस्या नहींहिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड के उप निदेशक अनुराग पराशर ने कहा कि शिमला में पानी की आपूर्ति के लिए भी विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित है और अप्रैल 2018 में भी शिमला में स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड की तरफ से कोई समस्या नहीं थी। हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड भविष्य में भी विद्युत की सुनिश्चित आपूर्ति के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि विद्युत आपूर्ति के कारण शिमला में पानी की पंपिंग के लिए विद्युत संबंधी कोई समस्या नहीं है।

    मंत्री से भी मिलेंगे लोगस्थानीय लोगों का कहना है कि वह इस मामले को लेकर वीरवार को आईपीएच व लोक निर्माण विभाग के मंत्रियों से भी मिलेंगे। वह मंत्री के समक्ष अपनी समस्या को बताएंगे तथा डंपिंग को बंद करवाने की मांग उठाई जाएगी। यदि उसके बाद भी समस्या का हल नहीं हुआ तो वह धरना देने के लिए भी तैयार हैं।

    अश्विनी खड्ड से दोबारा पानी दिया तो शहर में फैलेगा पीलिया: माकपा

    शिमला | माकपा ने प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में अश्विनी खड्ड से दोबारा पानी की सप्लाई शहर में न करने के लिए चेताया है। माकपा जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि अश्विनी खड्ड को कोटी ब्रांडी के पानी में न मिलाया जाए क्योंकि अभी भी मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। यही सीवरेज अश्वनी खड्ड में मिलने से शहर की जनता 2007, 2009, 2011, 2013 और 2015 में पांच बार पीलिया की चपेट में आ चुकी है। एनआईवी पुणे ने भी इसे ही 2008 की अपनी रिपोर्ट में शिमला शहर में पीलिया का मुख्य कारण बताया था।

    2015 में शिमला पीलिया फैलने पर पूर्व नगर निगम ने यहां से पानी आपूर्ति भी रोक दी गई थी। आईपीएच ने 3 वर्ष साल पहले जो पेयजल योजना 4 करोड़ की लागत से अश्विनी खड्ड में मेहली के लिए बनाई थी, वहां से भी इसी वजह से अभी तक पानी की सप्लाई नहीं की जा रही। अब अगर अश्वनी खड्ड के प्लांट से आगे वाली योजना का पानी अभी तक पीने लायक नहीं है तो अश्वनी खड्डा से पानी की सप्लाई क्यों शुरू की जा रही है। आरोप लगाया कि अगर अभी भी मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट सही काम नहीं कर रहा है और बिना ट्रीट किया पानी ही अश्विनी खड्ड में छोड़ा जा रहा है तो अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई फिर शुरू होने पर शिमला शहर फिर से पीलिया रोग की चपेट में आएगा। चौहान ने मौजूदा विधायक और शिक्षा मंत्री पर आरोप लगाया कि तीन बार शहर के विधायक हैं और इनके कार्यकाल में ही पीलिया शहर में 5 बार फैला है। लेकिन दोबारा से शहर में अश्विनी खड्ड से सप्लाई देना समझ से परे है। माकपा ने मांग उठाई है कि सरकार स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अश्विनी खड्ड से पानी की आपूर्ति के निर्णय को तुरंत वापस ले।

    डंपिंग करना गलत है:किम्मी सूदइस बारे में बैनमोर वार्ड पार्षद किम्मी सूद ने कहा कि उन्होंने खुद दौरे में पाया है कि पेयजल स्रोत पर अवैध डंपिंग हो रही है जोकि यह गलत है। शहर में पेयजल संकट है और ऐसे में यह स्रोत भी बंद हो गया तो लोग कहां जाएंगे। इस मामले को एमसी में उठाया जाएगा। इस नाले में कल्वर्ट डालने के लिए 14 लाख रुपए आए हैं। उन्हें भी जल्द लगवाया जाएगा।

    500 घरों का सहारा है ये पानीइस पेयजल स्रोत से लोअर नवबहार, जाखा और फ्लावरडेल के करीब 500 से अधिक घरों में पानी जाता है। यह लोग आईपीएच डिपार्टमेंट को इसका बिल भी अदा करते हैं। आईपीएच ने इस स्रोत से इन घरों के लिए पानी दिया था। गर्मियों में पेयजल संकट के दौर में भी ये स्रोत नहीं सूखता। यहां इतना पानी रहता है कि इन क्षेत्रों के लोगों का गुजारा हो सके। मगर अब अवैध डंपिंग से इस स्रोत पर खतरा पैदा हो गया है। अगर स्रोत बंद हुआ तो लोगों को पानी की किल्लत हो जाएगी।

    पहले भी हो चुकी अवैध डंपिंगअवैध डंपिंग का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस जगह पर शहर वासियों ने अवैध डंपिंग शुरू कर दी थी। इससे स्रोत का पानी काफी नीचे चला गया। चुड़ैल बावड़ी को भी पूरी तरह से मिट्टी से ढक दिया था। लोगों ने बाद में खुद खुदाई करके इस स्रोत को ढूंढा और पाइपों को इसमें जोड़ा। बाद में लोगों ने एमसी व अन्य विभागों को शिकायतें देकर डंपिंग बंद करवाई। यहां पर लोहे की जालियां भी लगवाई। मगर अब जो एरिया खाली पड़ा है, उसमें अवैध डंपिंग फिर से शुरू कर दी गई है।

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