Hindi News »Himachal »Shimla» पिछली सरकार के फैसले ने रोके हैं निजी स्कूलों में गरीबों के बच्चों के पढ़ने के विकल्प

पिछली सरकार के फैसले ने रोके हैं निजी स्कूलों में गरीबों के बच्चों के पढ़ने के विकल्प

राजधानी शिमला के निजी स्कूलों में राइट टू एजुकेशन आरटीई के तहत रिजर्व 25 फीसदी सीटें बीपीएल के उन गरीब परिवार के...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 10, 2018, 02:10 AM IST

राजधानी शिमला के निजी स्कूलों में राइट टू एजुकेशन आरटीई के तहत रिजर्व 25 फीसदी सीटें बीपीएल के उन गरीब परिवार के बच्चों के लिए अनिवार्य की गई हैं। निजी स्कूल भी इन सीटों पर गरीब बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं लेकिन सरकार का फैसला ही इन बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने के रास्ते में बाधा बना गया है। असल में अगर किसी भी निजी स्कूल में गरीब बच्चे को राइट टू एजुकेशन में रिजर्व सीटों पर एडमिशन लेनी है तो उन सीटों पर दाखिले के लिए उस निजी स्कूल को पास के सरकारी स्कूल से नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना पड़ रहा है। पास का सरकारी स्कूल ये एनओसी तभी देगा अगर उसके अपने स्कूल में आरटीई में रिजर्व सभी 25 फीसदी सीटें भर गई हैं। अगर ये सीटें नहीं भरीं गई तो निजी स्कूल को उस गरीब बच्चे को अपने स्कूल में पढ़ाने के लिए एनओसी नहीं मिलेगी। इन हालात में उस गरीब बच्चे को सरकारी स्कूल में आरटीई के तहत रिजर्व सीट पर ही एडमिशन लेनी होगी। इस तरह प्राइवेट स्कूल में आरटीई की सीट खाली रहेगी। इस तरह सरकार का ही फैसला ही गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने से रोक रहा है। सरकारी स्कूलों की हालत ये है कि इन स्कूलों में पहले ही बच्चों की संख्या इतनी कम है तो आरटीई के कोटे की 25 फीसदी सीटें कहां से भर जाएंगी। ऐसे में गरीब बच्चे निजी स्कूल में अपने हिस्से ही सीटों पर एडमिशन नहीं ले पा रहे।

2015 में लिया था ये फैसला|पिछली सरकार की ओर से 6 जून 2015 की नोटिफिकेशन में प्राइवेट स्कूल में एडमिशन के लिए सरकारी स्कूलों से एनओसी लेना अनिवार्य किया गया है। अगर उनके सरकारी स्कूल में संख्या 25 से अधिक होगी तो एनओसी दे पाएंगे,इसके लिए स्कूल की मुख्याध्यापिका निजी स्कूलों को एनओसी देगी। लेकिन सरकारी स्कूल में अगर बच्चों की संख्या 25 से कम है तो एनओसी नहीं देते है। राजधानी शिमला या अन्य जिले की बात करें तो सरकारी स्कूलों में शहर में अधिकतर स्कूल ऐसे है जहां सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम है ,इसलिए सरकारी स्कूल अपने नजदीक के निजी स्कूलों को एनओसी से नहीं देता है जिस कारण गरीब बच्चा जो प्राइवेट स्कूल में पढ़ना चाहता है,सरकारी स्कूल से एनओसी न मिलने के कारण वह नहीं पढ़ पाता है।

नहीं दे पा रहे गरीब बच्चों को एडमिशननिजी स्कूल शिमला पब्लिक स्कूलज सोसायटी एंड एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमंत सिंह कंवर, महासचिव वीएन शर्मा ने कहा कि उनके निजी स्कूलों को कोई भी सरकारी स्कूल एनओसी नहीं देते है जिस कारण गरीब परिवार के बच्चों को एडमिशन देने में दिक्कत आ रही है। इसके लिए सरकार को चाहिए कि कुछ एमेंडमेंट करें ताकि निजी स्कूल आसानी से इन गरीब परिवार के बच्चों को एडमिशन दे सके।

उच्च अधिकारियों के समक्ष रखी जाएगी समस्या

निजी स्कूलों की इस समस्या को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा, ताकि गरीब व बीपीएल परिवार के 25 प्रतिशत कोटे से बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ने का मौका मिल सके। राकेश वशिष्ठ, उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Shimla

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×