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दृष्टिबाधितों के लिए अलग लाइब्रेरी, रैंप और होगी टॉकिंग सॉफ्टवेयर की सुविधा

हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में अब दृष्टिबाधित छात्र छात्राओं को अलग से सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए जल्द ही 40 लाख...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 10, 2018, 02:10 AM IST

हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में अब दृष्टिबाधित छात्र छात्राओं को अलग से सुविधाएं मिलेंगी। इसके लिए जल्द ही 40 लाख रुपए खर्च होंगे। विवि प्रशासन का दावा है कि यदि पैसों का प्रयोग सही तरीके से हुआ तो वे उत्तर भारत के पहले बाधारहित यूनिवर्सिटी बनने में सफल होंगे। शारीरिक रूप स अक्षम व दृष्टिबाधित छात्रों के लिए लाइब्रेरी में एक अलग सेक्शन का निर्माण होगा। इसके अलावा पूरी तरह बाधारहित वेब पोर्टल का निर्माण भी किया जाएगा। विवि समुदाय को विकलांगता के प्रति संवेदनशील बनाने के कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। वर्तमान में 12 दृष्टिबाधित छात्रों समेत लगभग 50 दिव्यांग छात्र यहां पढ़ाई कर रहे हैं।

विवि के शौचालयों को ‘यूनिवर्सल डिजाइन’ के इस्तेमाल से विकलांग छात्रों के लिए बाधा रहित बनाने के आदेश भी दिए गए हैं। परिसर में व्हील चेयर इस्तेमाल करने वालों व अन्य विकलांग छात्राें के लिए कई और रैंप भी बनाए जाएंगे। स्टेट बैंक आॅफ इंडिया को निर्देश दिए गए हैं कि वह परिसर में लगे अपने सभी एटीएम को ‘टाकिंग एटीएम’ में परिवर्तित करें। इससे दृष्टिबाधित छात्र आसानी से पैसे निकाल सकेंगे। विवि के सभी भवनों को पूरी तरह बाधारहित बनाने के लिए लिफ्ट लगाने का भी प्रस्ताव है। दिल्ली के अतिरिक्त उत्तर भारत का कोई भी विश्वविद्यालय अभी तक इन सभी सुविधाओं से युक्त नहीं है।

दिव्यांग छात्रों के लिए एचपीयू में मिलेगी अलग सुविधाएं, 40 लाख रुपए किए जाएंगे खर्च

हॉस्टल के लिए चलाई गई स्पेशल गाड़ीविकलांग छात्रों को फायदा देने के लिए दृष्टिबाधित एवं अन्य विकलांग की सुविधा को ध्यान में रखकर लड़कों व लड़कियों के हॉस्टल से कैंपस तक एक वैन भी चलाई गई है। अब इन छात्रों का हॉस्टल से परिसर में आना और वापस जाना आसान हो गया है। सभी शैक्षणिक विभागों में विकलांग छात्रों के लिए लाॅकर की सुविधा भी शुरू की जा रही है। जिसमें वे अपनी पुस्तकें रख सकेंगे और उन्हें रोज बस्ते का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा

एचपीयू शीघ्र ही विकलांगों के लिए उत्तर भारत का पहला ‘बाधारहित’ विवि बन जाएगा। दृष्टिबाधित एवं अन्य विकलांग छात्रों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगभग 40 लाख रुपए खर्च कर रहा है। छात्रों, शिक्षकों एवं गैर शिक्षकों को विकलांगों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए हाल ही में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग विषय पर एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन किए जाएंगे। प्रो. अजय श्रीवास्तव, ईसी सदस्य एवं नोडल आॅफिसर (विकलांगता मामले) एचपीयू

ये सुविधाएं मिलंेगी

विवि पुस्तकालय के निर्माणाधीन सेक्शन में 13 कंप्यूटर होंगे। जिनमें टाॅकिंग साॅफ्टवेयर व स्कैनर भी होंगे।

इससे दृष्टिबाधित छात्र आसानी से कोई भी पुस्तक स्कैन करवाकर हेडफोन के माध्यम से सुन सकेंगे। छात्रों की सहायता के लिए वहां एक कर्मचारी की तैनाती भी कर दी गई है।

रूसा स्कीम के अंतर्गत 10 नए कंप्यूटर, टाॅकिंग साॅफ्टवेयर, ई-बुक्स, अन्य उपकरण एवं व्हील चेयर्स खरीदने एवं कार्यशालाएं कराने के लिए 11 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।

इक्डोल की कंप्यूटर लैब में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए कंप्यूटरों में टाॅकिंग साॅफ्टवेयर भी डाले जा रहे हैं।

विवि का नया वेब पोर्टल जल्द ही लांच जाएगा। जिसे दृष्टिबाधित, मूकबधिर और वे विकलांग भी आसानी से इस्तेमाल कर पाएंगे।

यह पूरी तरह बाधा रहित यह वेब पोर्टल 21 लाख रुपए की लागत से तैयार किया गया है।

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