Hindi News »Himachal »Shimla» स्कूल हर साल लेंगे ड्राइवरों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तो पैरेंट्स भी अब चेक कर सकते हैं कि ड्राइवर कहीं नशे में तो नहीं

स्कूल हर साल लेंगे ड्राइवरों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तो पैरेंट्स भी अब चेक कर सकते हैं कि ड्राइवर कहीं नशे में तो नहीं

सड़क हादसों के बाद पुलिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के साथ ही शहर के स्कूलों ने बच्चों को ले जाने वाली गाड़ियों पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 02:10 AM IST

सड़क हादसों के बाद पुलिस और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के साथ ही शहर के स्कूलों ने बच्चों को ले जाने वाली गाड़ियों पर चेकिंग का जिम्मा ले लिया है। स्कूलों ने खुद इन बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर तक ड्रॉप कर रही बसों और छोटी गाड़ियों के ड्राइवरों काे हेल्थ रिपोर्ट कॉर्ड लेकर पूरा रिकार्ड रखने का फैसला किया है।

कई स्कूलों ने ड्राइवरों को ये हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार करके स्कूलों में सौंपने काे कहा है। इन ड्राइवरों से हर साल हेल्थ रिपोर्ट कार्ड लेकर प्रशासन के पास भेजेगा। हेल्थ रिपोर्ट में शारीरिक फिटनेस समेत आंखों की जांच शामिल है। ऐसा इसलिए जरूरी किया गया है कि ताकि फिटनेस और आंखों की कमजोरी हादसों की वजह न बने। ड्राइवर की आयु साठ साल से अधिक नहींं होनी चाहिए। अगर किसी की उम्र 60 से अधिक है तो ऐसी गाड़ी को तुरंत ही स्कूल से हटाना अनिवार्य किया गया है। स्कूलों ने पैरेंट्स को मैसेज देकर साफ कहा है कि पैरेंट्स ये चेक कर सकते हैं कि उनके बच्चों को लाने वाली गाड़ी का ड्राइवर किसी नशे में तो नही है। अगर ऐसा है तो पैरेंट्स स्कूल को सूचित कर सकते हैं। नूरपुर में हुए स्कूल बस हादसे के बाद सरकार ने स्कूलों के लिए परिवहन सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं।

हेल्थ रिपोर्ट में शारीरिक फिटनेस, अांखों की जांच होगी और उम्र ६० से ऊपर नहीं होनी चाहिए

स्कूलों को यह भी देखना होगाजो बस और टैक्सी बच्चों के लिए स्कूल में लगाई है, उसके ड्राइवर का चरित्र कैसा है, इसके बारे में भी स्कूलों को छानबीन करनी होगी। जो ड्राइवर हैं, उन पर कभी छेड़छाड़ या अन्य तरह के आरोप तो नहीं लगे हैं। जो ड्राइवर हैं उनके खिलाफ रैश ड्राइविंग, लापरवाही से वाहन चलाने के केस तो दर्ज नहीं है। अगर किसी पर यह आरोप हैं, तो उन्हें भी हटाना होगा। क्योंकि रैश ड्राइविंग बच्चों को लाते हुए भी कर सकते हैं। जो ड्राइवर गाड़ी चला रहा है, उसके पास वैद्य लाइसेंस होना चाहिए। शिमला में जिस तरह से निजी बसों में हर कोई गाड़ी चलाता नजर आता है, उस तरह स्कूल बस या टैक्सी में ऐसा न हो, इसके ऊपर भी नजर रखना आवश्यक है।

नशाखोरी पर चेक रखेंगे पैरेंट्सआपका बच्चा जिस बस या टैक्सी में सफर कर रहा है, उसका ड्राइवर ड्रिंक तो नहीं करता है या फिर अन्य तरह का नशा, यह देखना पुलिस का काम ही नहीं बल्कि आपको खुद भी देखना होगा। निजी स्कूलों ने अभिभावकों को इसके बारे में दिशानिर्देश देने भी शुरू कर दिए हैं। स्कूल हर अभिभावक को मोबाइल पर मैसेज भेज रहे हैं कि वे यह नजर रखते रहें कि कहीं ड्राइवर नशे में तो चूर नहीं रहता है। स्कूल बस या फिर टैक्सी हो, बच्चों को लेने के लिए रास्ते में अभिभावक पहुंचते हैं, ऐसे में उनके लिए ड्राइवरों पर नजर रखना आसानी होगी। प्रदेश में सड़क हादसे आए दिन बढ़ रहे हैं। सड़क की खराबी, रैश ड्राइविंग के साथ ही नशा भी हादसों का एक बड़ा कारण उभरकर सामने आया है। इसी को देखते हुए कुछ निजी स्कूल प्रबंधन आगे आएं हैं और ड्राइवरों पर नजर रखने के निर्देश दे रहे हैं। अगर ड्राइवर और अन्य कर्मचारी किसी तरह का उल्लंघन करता है तो यह भी अभिभावकों को नोट करना होगा और इसकी तुरंत स्कूल प्रबंधन को सूचना देनी होगी।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Shimla

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×