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हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में उजाड़ दिए गए गरीब परिवारों के बागः सिंघा

किसान सभा के राज्य सचिव एवं विधायक राकेश सिंघा ने जुब्बल क्षेत्र में अवैध कब्जे हटाने के लिए एसआईटी की ओर से की जा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 02:10 AM IST

हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में उजाड़ दिए गए गरीब परिवारों के बागः सिंघा
किसान सभा के राज्य सचिव एवं विधायक राकेश सिंघा ने जुब्बल क्षेत्र में अवैध कब्जे हटाने के लिए एसआईटी की ओर से की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सिंघा ने कहा कि एसआईटी बड़े बागवानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनाई है, लेकिन इसमें शामिल लोग हाईकोर्ट के आदेशों की आड़ में गरीबों के बाग ही उजाड़ रहे हैं। एसआईटी ने तीन ऐसे लोगों के सेब के पौधे काटे हैं, जो कि उनकी मलकीयत में थे। उन्होंने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि इसके खिलाफ किसान सभा हाईकोर्ट जाएगी। अगर गरीब लोगों की बेदखली बंद नहीं की गई तो आने वाले दिनों में इसके विरोध में आंदोलन भी किया जाएगा।

शिमला में पत्रकारवार्ता में सेब के पौधों को काट देने से इन परिवारों के जीवन यापन का साधन की समाप्त हो गया। जबकि अगर कोई जेल में हो तो भी उसके जीने के अधिकार को भी छिना नहीं जा सकता है। उन्होंने एसआईटी पर यह भी आरोप लगाया कि बंदूक की नोक पर लोगों से हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं और कब्जा छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। जिन तीन के बाग उजाड़ दिए, उन्होंने मौके पर अवैध कब्जा हटाने पहुंची टीम को मलकीयत जमीन के कागज भी दिखाए, परन्तु टीम ने एक नहीं सुनी। यहां तक की रेवन्यू डिपार्टमेंट ने भी माना था कि इन तीनों की अपनी जमीन है। फिर भी सेब के पौधे काट दिए गए।

क्या यह गैर जिम्मेदाराना रवैया नहीं है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार से किसान सभा का एक दल जुब्बल क्षेत्र का दौरा भी करेगा और ऐसे गरीब लोगों के खिलाफ तो कार्रवाई नहीं की जानी है, इसके बारे में पता लगाया जाएगा। उन्होंने हैरानी जताई कि जिन तीन लोगों के सेब के बगीचे उजाड़ दिए, वे उस लिस्ट में शामिल थे, जिन्होंने 100 बीघा से अधिक जमीन कब्जाई है। पर कागजों में इन तीनों के पास पांच बीघा से कम जमीन है। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम से मांग की कि सभी दलों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाए। इसमें अवैध कब्जों को लेकर ठोस नीति बनाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह गरीब परिवारों के साथ अन्याय न हो। अवैध कब्जे रेवन्यू एक्ट के तहत हटाए जाने चाहिए, न कि पब्लिक प्रीमिसिज एक्ट के तहत। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बाबा रामदेव समेत प्रोजेक्ट लगाने के लिए जमीन लीज पर दी जाती है। इसी तरह गरीब लोगों को भी जमीन लीज पर देने की व्यवस्था होनी चाहिए।

केस एकः सुरेंद्र जमटा के पास 3.18 बीघा जमीन है। यह जमीन 1982 में उन्हें नौतोड़ के रूप में सरकार से मिली थी। बाद में इस भूमि का इंतकाल हुआ और जमीन उनके नाम हो गई। परिवार की आय चलाने के लिए उन्होंने इस भूमि पर सेब लगाए थे।

केस दोः सोहन लाल के पास 4.15 बीघा जमीन है। यह भूमि उन्हें नौतोड़ में मिली थी। इसमें उन्होंने सेब के पौधे लगाए थे। सोहन लाल बीपीएल श्रेणी में है। एसआईटी ने इन्हें भी नहीं बख्शा और सेब के सभी पौधे नष्ट कर दिए।

ग्रीन फेलिंग पर रोक, सेब के बाग में चल रही आरियां

किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप तनवर ने कहा कि ग्रीन फेलिंग पर कोर्ट ने रोक लगाई है। वहीं दूसरी ओर सेब के बगीचों पर आरियां चलाई जा रही है। सेब भी एक पेड़ ही है। जिस तरह से रोक के कारण देवदार को नहीं काटा जा सकता, उसी तरह सेब के पौधे को भी नहीं काटा जा सकता है। इससे अच्छा यह होता कि सेब के पौधे वन विभाग के अधीन किए जाते। पौधों को इस स्टेज में काटने को कोई औचित्य नहीं है। प्रेसवार्ता में पूर्व मेयर संजय चौहान, डॉ. आेंकार शाद भी मौजूद रहे।

केस तीनः ज्ञान चंद के पास महज एक बीघा जमीन है। थोड़ी सी जमीन पर उन्होंने भी अपने परिवार की आजीविका के लिए सेब लगाए । वर्षों की मेहनत के बाद सेब के पौधे तैयार हुए और मगर अब सब कुछ तबाह हो गया।

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