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सरकारी स्कूलों में एसएमसी और पंचायत प्रतिनिधियों को फोन करके पूछा जाएगा मिड डे मील का स्टेटस

राज्य के सरकारी स्कूलों में तैनात मिड-डे-मील (एमडीएम) को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला...

Dainik Bhaskar

May 11, 2018, 02:10 AM IST
राज्य के सरकारी स्कूलों में तैनात मिड-डे-मील (एमडीएम) को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा विभाग इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) सिस्टम को शुरू करने जा रहा है। इसके तहत विभाग स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) के अध्यक्ष, सदस्यों के अलावा पंचायत प्रतिनिधि को कॉल सेंटर से फोन कॉल आएगी। इसमें उक्त सदस्यों से पूछा जाएगा कि क्या वह मिड डे मील को लेकर स्कूलों में जाकर चैकिंग कर रहे हैं। यदि चैकिंग की है तो इसमें किसी तरह की खामियां तो नहीं पाई गई है।

विभाग फोन कॉल के द्वारा सदस्यों से पूरा फीडबैक लेगा। यदि कोई खामी सामने आती है तो उसमें सुधार किया जाएगा। विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों और एसएमसी को मिड डे मील की चैकिंग के लिए अधिकृत किया हुआ है।

ग्राम सभा में होगा सोशल ऑडिट

मिड डे मील योजना का सोशल ऑडिट ग्राम सभा की बैठक में किया जाएगा। पंचायत के अधीन जितने भी स्कूल आएंगे वह मिड डे मील से जुड़े सारे रिकार्ड को पंचायत में होने वाली ग्राम सभा की बैठक में मुहैया करवाएगा। हर तीन महीने बाद सोशल ऑडिट किया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की तरफ से इस संबंध में पहले ही आदेश जारी किए जा चूके हैं। मिड-डे-मील को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने ये फैसला लिया है।

ये अधिकारी देंगे रिपोर्ट

सोशल ऑडिट के लिए विभाग ने स्कूल हेड और एमडीएम इंचार्ज को अधिकृत किया है। ग्राम सभा में जो निर्णय लिया जाएगा, उसे स्कूल अपने यहां लागू करेगा। प्रदेश में सरकारी स्कूलों में मिड-डे -मील इंचार्ज को तैनात किया जाता था। जब तक टीचर उस स्कूल में तैनात है, एमडीएम का जिम्मा उसी के पास रहता था। इंचार्ज को इसका पूरा रिकार्ड मेंटेन करना होता है। हालांकि, विभाग यही तर्क देता है कि एमडीएम के तहत स्कूलों को नोर्मस के अनुसार ही राशन भेजा जाता है। विभाग ने लगातार मिल रही शिकायतों के बाद इसमें बदलाव करने का निर्णय लिया है।

प्रदेश के 15,351 स्कूलों में लागू है यह योजना

प्रदेश में 15 हजार 351 सरकारी स्कूल हैं। इन में रोजाना 5 लाख 59 हजार 381 स्टूडेंट के लिए रोजाना एमडीएम के तहत खाना बनाया जाता है। सोशल ऑडिट में ये देखा जाएगा, स्टूडेंट को एमडीएम के तहत स्कूलों में क्या खाना किस दिन बनाया गया? खाने में कितने पोषक तत्व हैं, जहां पर मिड-डे-मील का खाना बनाया जाता है, वो जगह साफ है, खाने की सामग्री रखने के लिए उपयुक्त स्थान हैं, किचन शेड स्कूलों में बने हैं या नहीं, कितने स्टूडेंट ने खाना खाया, साफ सफाई जैसी व्यवस्थाओं को चैक किया जाएगा।

प्रदेश के 90 फीसदी स्कूल एसएमएस से कनेक्ट

प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने मिड-डे-मील को लेकर वेब पोर्टल तैयार किया है। इसके तहत प्रदेश के कितने स्कूलों में स्टूडेंट को खाना परोसा गया। इसका सारा रिकार्ड विभाग की वेबसाइट पर मौजूद रहता है। सभी स्कूल रोजाना एसएमएस के माध्यम से इसकी जानकारी शेयर करते हैं। उनकी ये जानकारी विभाग की वेबसाइट पर अपलोड हो जाती है। 90 फीसदी स्कूल एसएमएस से कनेक्ट है। 4 लाख के करीब स्टूडेंट रोजाना एमडीएम के तहत खाना खाते हैं। विभाग ने स्कूलों को मिड डे मिल योजना के तहत मैन्यू हर रोज बदलने के भी निर्देश दिए हैं। अभी पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को हर रोज की खुराक में 450 कैलरी और 12 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध करवाने का प्रावधान है, जबकि छठी और सातवीं के छात्रों को 700 कैलरी और 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध करवाना होता है।

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