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60 दिन से न स्पेशल वार्ड छोड़ रही मरीज, न ही चुकाया है बिल, आईजीएमसी को वार्ड खाली करवाने के लिए बुलानी पड़ी पुलिस

आईजीएमसी में जहां एक ओर स्पेशल वार्ड के लिए सिफारिशें और ऊंची पहुंच के बूते स्पेशल वार्ड पाने की कोशिश रहती है, तो...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 12, 2018, 02:10 AM IST

आईजीएमसी में जहां एक ओर स्पेशल वार्ड के लिए सिफारिशें और ऊंची पहुंच के बूते स्पेशल वार्ड पाने की कोशिश रहती है, तो वहीं एक पेशेंट ऐसी भी सामने आई कि तीन बार डिस्चार्ज किए जाने के बाद भी न तो वार्ड छोड़ा और न ही पेमेंट चुकाई। आईजीएमसी के स्पेशल वार्ड नंबर 624 में भर्ती ये महिला 60 दिनों से आईजीएमसी में भर्ती है। मरीज को डिस्चार्ज करने के लिए मेडिकल बोर्ड तक बता चुका था कि मरीज को अब इंटरवेंशनल यानी इलाज की जरूरत नहीं बल्कि स्पोर्टिव केअर की जरूरत है, जो रोहड़ू या जुब्बल के जोनल हॉस्पिटल में भी मिल सकती है। इसके बाद मरीज को तीन बार डिस्चार्ज करने के लिए डिस्चार्ज स्लिप दी गई। लेकिन न तो स्पेशल वार्ड छोड़ा और न ही वार्ड के दो महीने के करीब 60 हजार पेमेंट की गई। अब प्रशासन ने परेशान होकर मामला पुलिस में दे दिया है।

12 मार्च से वार्ड में है पेशेंट : जानकारी के अनुसार जुब्बल निवासी जानकी देवी 12 मार्च को मेडिसन डिपार्टमेंट के तहत आईजीएमसी के स्पेशल वार्ड नंबर 624 में भर्ती हुई थी। कुछ दिन महिला का यहां पर इलाज हुआ। उसके बाद महिला को डिस्चार्ज किया, मगर नर्सों ने प्रशासन को बताया कि महिला व परिजन वार्ड छोड़ने को तैयार नहीं। 8 मई को प्रशासन ने महिला के मामले में मेडिकल बोर्ड भी बिठाया। इसमें मेडिकल बोर्ड ने पाया कि महिला अब ठीक है। उसे केवल नर्सिंग केयर की जरूरत है। ऐसे में महिला को जोनल अस्पताल शिमला, सिविल अस्पताल रोहड़ू या जुब्बल अस्पताल के लिए रेफर किया गया। 9 मई को महिला की पूरी डिस्चार्ज स्लिप भी बनाकर महिला व परिजनों को सौंपी गई, मगर बावजूद उसके महिला पेशेंट ने फिर से जाने से मना कर दिया।

आईजीएमसी प्रशासन तीन बार कर चुका है डिस्चार्ज, मेडिकल बोर्ड ने किया रोहड़ू या जुब्बल अस्पताल को रेफर, नहीं छोड़ रहे फिर भी वार्ड

नॉन पेइंग पेशेंट बनकर बैठी है महिला |आईजीएमसी में जब उक्त महिला एडमिट हुई थी तो कंप्यूटर में उसकी एंट्री नॉन पेइंग पेशेंट के रूप में डाल दी गई थी। नियमों के अनुसार नॉन पेइंग पेशेंट को स्पेशल वार्ड नहीं मिल सकता। नॉन पेइंग पेशेंट को केवल जरनल वार्ड में ही एडमिट किया जा सकता है। ऐसे में अब महिला को स्पेशल वार्ड कैसे मिल गया। इस बारे में भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल प्रशासन ने इसकी शिकायत पुलिस में दी है।

स्पेशल वार्डों के लिए रहती है भीड़ |आईजीएमसी में स्पेशल वार्ड के लिए पहले ही मारामारी रहती है। यहां पर करीब 35 स्पेशल वार्ड हैं। इसमें 5 वार्ड मंत्रियों व वीआईपी के लिए बुक रहते हैं, जबकि अन्य 30 वार्डों में मरीजों को दिया जाता है। 1000 रुपए प्रतिदिन वार्ड का चार्ज लिया जाता है। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर वार्ड दिया जाता है। ऐसे में यदि पेशेंट यहां पर इतने दिनों तक जमा रहेगा तो अन्य मरीजों को भी परेशानी होना तय है।

महिला न तो स्पेशल वार्ड का बिल भर

रही, न ही वार्ड को खाली कर रही

आईजीएमसी के स्पेशल वार्ड नंबर 624 में 12 मार्च से महिला पेशेंट एडमिट है। महिला को अब नर्सिंग केयर की जरूरत है। उसे कई बार डिस्चार्ज किया है, वहीं मेडिकल बोर्ड ने जिला व सिविल अस्पताल जाने के लिए भी मंजूरी दी। मगर महिला न तो स्पेशल वार्ड का बिल भर रही, न ही वार्ड को खाली कर रही। ऐसे में अब इसकी शिकायत पुलिस में दी है। डॉ. जनकराज, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी आईजीएमसी शिमला

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