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पुलिस इसी माह कोर्ट में दाखिल करेगी चार्जशीट

शहर में वर्ष 2015-16 में करीब 32 लोगों की जान लेने वाले पीलिया मामले में आरोपियों के खिलाफ इसी माह कोर्ट में चार्जशीट...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 12, 2018, 02:10 AM IST

शहर में वर्ष 2015-16 में करीब 32 लोगों की जान लेने वाले पीलिया मामले में आरोपियों के खिलाफ इसी माह कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। पीलिया के लिए जिम्मेदार तीन बड़े अफसरों के खिलाफ सरकार से प्रॉसिक्यूशन सेंक्शन न मिलने पर अब पुलिस ठेकेदार, सुपरवाइजर समेत आईपीएच के दो कनिष्ठ अभियंताओं के खिलाफ ही चालान पेश करेगी।

इनमें जेई परनीत कुमार, रूपलाल गौतम के अतिरिक्त मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पूर्व ठेकेदार अक्षय डोगर और सुपरवाइजर मनोज वर्मा मुख्य आरोपी हैं। जबकि इस मामले में 18 सहआरोपी भी हैं। पुलिस चालान की लीगल स्क्रूटनी करवा रही है। लीगल पक्ष मजबूत होने पर पुलिस निचली अदालत में चालान पेश करेगी। चालान पेश करने के बाद कोर्ट में इन चारों के खिलाफ लापरवाही समेत लोगों की जान से खिलवाड़ करने का केस चलेगा। 32 लोगों की मौत के लिए पुलिस जांच में इन चार के अलावा आईपीएच विभाग के तीन अफसर भी जिम्मेदार पाए गए थे। मामले में इनकी गिरफ्तारी भी की गई थी। हाल ही में जयराम सरकार ने इन तीन अफसरों के खिलाफ कोर्ट में केस चलाने के लिए प्रॉसिक्यूशन सेंक्शन देने से साफ इनकार कर दिया। बड़े अफसरों के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन सेंक्शन न देने पर पुलिस ने पहले से तैयार किए चालान को रिवाइज किया। तीनों अफसरों को मुख्य आरोपियों के कॉलम से बाहर निकालने के बाद पुलिस ने अब चालान लीगल स्क्रूटनी के लिए एडीए के पास भेज दिया है। लीगल तौर पर चालान की स्क्रूटनी इसलिए करवाई जा रही है ताकि इसमें किसी तरह की खामियां न रहे।

ठेकेदार, सुपरवाइजर, आईपीएच के दो कनिष्ठ अभियंताओं पर चलेगा लापरवाही, जान से खिलवाड़ का केस

ऐसे हुआ था लोगों से खिलवाड़

दिसंबर 2015 के आखिर में शहर में पीलिया फैला। पीलिया जनवरी-फरवरी 2016 में भी जारी रहा। एमसी ने अपने स्तर पर इन्क्वायरी की तो पता चला कि मल्याणा स्थित आईपीएच विभाग के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से गंदा पानी अश्वनी खड्ड में छोड़ा जाता है। छह जनवरी 2016 को डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर की शिकायत पर ढली पुलिस थाना में 269, 277, 270, 336 आईपीसी और ए वॉटर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन एक्ट की सेक्शन 43, 44 के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के लिए एसआईटी गठित की। एसआईटी ने 21 जनवरी को जेई, परनीत कुमार व सुपरवाइजर को गिरफ्तार किया। 29 को ठेकेदार अक्षय डोगर, 30 को एसडीओ हेमचंद चौहान, 31 जनवरी को एक्सईएन विनोद ठाकुर और 5 फरवरी को एसडीओ अभिषेक शर्मा और जेई रूपलाल को गिरफ्तार किया था। जांच में इनकी लापरवाही पाई गई थी और पुलिस ने इन्हें पीलिया के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

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