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कुछ बीएड कॉलेजों की चल रही जांच, बाकी में रुक गया एडमिशन का प्रोसेस

इस बार प्रदेश भर के बीएड कॉलेजों में नया सेशन बैठेगा या नहीं इस पर संशय बना हुआ है। निजी बीएड कॉलेजों की चल रही जांच...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 12, 2018, 02:10 AM IST

इस बार प्रदेश भर के बीएड कॉलेजों में नया सेशन बैठेगा या नहीं इस पर संशय बना हुआ है। निजी बीएड कॉलेजों की चल रही जांच के चलते अभी तक विवि प्रशासन बीएड का नया प्रोस्पेक्टस नहीं बना पाया है। ऐसे में इस बार सेशन बैठेगा या नहीं, यह अभी तय नहीं हुअा है। आने वाले 18 मई को उन बीएड कॉलेजों की स्थिति साफ हो सकती है, जिनकी जांच चली हुई है। इसके बाद ही बीएड कॉलेजों में प्रवेश पर कोई निर्णय हो पाएगा। दूसरी ओर हजारों छात्र बीएड के एडमिशन प्रोसेस का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अब विवि प्रशासन सामने मुश्किलें खड़ी हो गई है कि कैसे वह इस बार प्रवेश करवाएं।

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय नई बीएड पॉलिसी को लागू करने के लिए वर्ष 2019 के बीएड के शिक्षा सत्र को जीरो कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश के किसी भी बीएड कॉलेज में इस बार एडमिशन नहीं होगी। जिससे सीधे तौर पर प्रदेश में चल रहे बीएड कॉलेज प्रभावित होंगे। इसलिए विवि प्रशासन अब एमएचआरडी से भी संपर्क कर रहा है।

कोई फर्जी बीएड काॅलेज निकला तो दिक्कत होगी एचपीयू प्रशासन का कहना है कि यदि कोई बीएड कॉलेज एसआईटी की जांच में फर्जी निकलता है या फिर नियमाें की उल्लघंना करते हुए पाया गया तो उसमें एडमिशन नहीं हो सकती है। एेसे में तब तक एडमिशन नहीं करवाई जा सकती है, जब तक एसआईटी की किसी भी कॉलेज को क्लीन चिट नहीं मिल जाती है। इस कारण इस बार विवि प्रशासन बीएड के एडमिशन की प्रोसेस नहीं करवा रहा है।

छात्र चुन सकेंगे टीचिंग स्पेशलाइजेशन शिक्षा में गुणवत्ता लाने व स्पेशल टीचर तैयार करने के लिए एमएचआरडी की ओर से इस नीति को तैयार किया गया है। जिसके तहत कोई भी छात्र छात्रा जो भविष्य में टीचिंग प्रोफेशन में आना चाहते है, उन्हें 12वीं के बाद ही सीधे तौर पर इस चार वर्षीय कोर्स को पढ़ना होगा। बीए, बीएससी के बाद बीएड करने का सिस्टम पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। चार वर्षीय इस कोर्स में बीए, बीएससी बीएड में पढ़ाए जाने वाले सब्जेक्ट व सिलेबस शामिल होगा। जिसका सबसे बड़ा लाभ उन छात्र-छात्राओं को होगा जो टीचिंग में ही अपना करिअर बनाना चाहते है। वह टीचिंग स्पेशलाइजेशन को चुन सकेंगे।

प्रदेश में चल रहे है करीब 75 बीएड कॉलेज प्रदेश में बीएड के लगभग 75 कॉलेज चल रहे है। जो सीधे तौर पर इस नई पॉलिसी के लागू होने से प्रभावित होंगे। इन कॉलेजों में करीब सात हजार सीटें है। टीचर बनने के लिए प्रदेश में अभी तक 2 वर्षीय बीएड कोर्स करवाया जाता है। जो ग्रेजुएशन के बाद होता है। नई नीति के तहत बीएड कॉलेज संचालकों को अपने कॉलेज को प्रभावित होने से बचाने व नए कोर्स को चलाने के लिए एनसीटीई के नए नियमों के तहत इस 4 वर्षीय कोर्स को शुरू करना होगा।

अगले वर्ष से चार वर्षीय बीएड कोर्स होगा शुरूएनसीटीई यानि नेशन काउंसिल टीचर एजुकेशन पहले ही चार वर्षीय बीए बीएड, बीएससी बीएड, बीकॉम बीएड कोर्स लांच कर चुकी है। जिस संबंध में प्रदेश सरकार की ओर से भी एनसीटीई को पत्र भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि प्रदेश में कोई नया बीएड कॉलेज नहीं शुरू किया जाएगा। प्रदेश में चल रहे बीएड कॉलेजों की सीटों को भी कम किया जाएगा। जिसके तहत कई बीएड कॉलेजों में सीटें कम भी की जा चुकी है।

बीएड का इस बार का सत्र शुरू होता है या नहीं, इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। अभी बीएड कॉलेजों की एसआईटी जांच कर रही है। 18 मई तक वह अपनी पूरी रिपोर्ट देगी। इसके बाद ही एडमिशन पर कुछ स्थिति क्लियर होगी। डॉ. नैन सिंह, एडमिशन प्रोसेस प्रभारी व शिक्षक एजुकेशन विभाग एचपीयू

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