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अाईजीएमसी में पीडब्ल्यूडी विंग की क्लियरेंस से होगी मशीनों की खरीद

Danik Bhaskar | May 16, 2018, 02:10 AM IST

अब मशीन वही पहुंचेगी जहां इंस्टॉल होनी है

सोमदत्त शर्मा| शिमला

करोड़ों रुपए की मशीनें आईजीएमसी में अब धूल नहीं फांकेगी, मशीन की खरीद से पहले उसके लिए संबंधित विभाग में स्पेस तैयार कर दिया जाएगा। टेंडर के बाद मशीन सीधे उसी जगह पर पहुंचेगी, जहां उसे इंस्टॉल करना है।

आईजीएमसी में अब करोड़ों रुपए की मशीनें बिना स्पेस के नहीं खरीदी जाएगी। प्रशासन ने फिजूलखर्ची से बचने के लिए एक नया फार्मूला निकाला है। इसके तहत जिस विभाग को मशीन की खरीद करनी होगी, संबंधित विभाग के एचओडी को आईजीएमसी के पीडब्ल्यूडी विंग से सर्टिफिकेशन लेनी होगी। पीडब्ल्यूडी क्लियरेंस के बाद ही नई मशीन की खरीद के लिए आर्डर दिए जाएंगे। प्रशासन ने इसके लिए बैठक कर ली है। जल्द ही इसकी अधिसूचना प्रशासन जारी कर देगा। सभी एचओडी को उसके बाद नियमों के तहत ही मशीन खरीद के लिए अप्लाई करना होगा।


इसलिए किया जरूरी आईजीएमसी में करोड़ों रुपए से मशीनों की खरीद होती है। रेडियोलॉजी, रेडियोग्राफी, आर्थो समेत कई विभाग ऐसे हैं, जहां पर हर साल मशीनों की खरीद होती है। आईजीएमसी में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पर मशीनों की खरीद तो कर दी जाती थी, मगर बाद में उसके लिए पर्याप्त स्पेस न होने के कारण वह कई माह तक आईजीएमसी में बेकार पड़ी रहती थी। बिना स्पेस के उसे इंस्टॉल नहीं किया जाता था। हाल ही में आईजीएमसी में फाइब्रो स्कैन मशीन भी खरीदी गई, जो करीब 4 माह तक बिना स्पेस के ही पड़ी रही। ऐसे में प्रशासन ने अब बिना स्पेस के मशीनों की खरीद न करने का निर्णय लिया है।

लीनियर एक्सीलेटर का मामला भी अटका आईजीएमसी के कैंसर अस्पताल में भी लीनियर एक्सीलेटर मशीन का मामला इसी कारण अटका पड़ा है। करीब 45 करोड़ रुपए से आने वाले इस मशीन के लिए एक फ्लोर चाहिए। इसके साथ कई अन्य छोटी मशीनें भी लगाई जाती है। मगर मशीन के लिए कैंसर अस्पताल में पर्याप्त स्पेस नहीं है। ऐसे में प्रशासन अब इसे लगवाने से इंकार कर रहा है। कैंसर अस्पताल की नई बिल्डिंग बनने के बाद ही प्रशासन इस मशीन की खरीद करेगा।

नई बिल्डिंग में भी लगनी है करोड़ों की मशीनें आईजीएमसी का नया ओपीडी ब्लॉक दिसंबर माह तक पूरा होना है। इसमें सीटी स्कैन, डिजिटल एक्सरे, एमआरआई, फाइब्रो स्कैन समेत कई नई मशीनें इंस्टॉल होनी है। ऐसे में इस ब्लॉक में भी वही मशीनें इंस्टॉल होगी, जिसके लिए पीडब्ल्यूडी विंग की क्लियरेंस होगी, बिना क्लियरेंस के कोई भी मशीन इंस्टॉल नहीं हो पाएगी। इससे जहां फिजूलखर्ची से निजात मिलेगी, वहीं मशीन खरीद के बाद स्पेस की समस्या भी आड़े नहीं आएगी।